अयोध्या, आइए दर्शन करिए इस पावन नगरी का जहां जन्मे थे श्री राम।

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“जम्बूदीपे भरतखण्डे आर्यावर्ते भारतवर्षे….
एक नगरी है विख्यात #अयोध्या नाम की…..”

भारतवर्ष की आत्मा को देखना है तो अयोध्या आइए!
श्री राम की नगरी उनके जमाने में कैसी रही होगी, इसका एक अंश महसूस करना है तो अयोध्या आइए!

और सनातन धर्म की श्रेष्ठता, सर्वोच्चता का कारण जानना है तो अयोध्या आइए!

हर गली में राम हैं, हर घर में राम हैं और हर मुख में राम का नाम है!

पिछले तीन वर्षों में कई बार प्रभु की नगरी जाना चाहा था, परन्तु किसी न किसी कारण से योजना सफल नहीं हो पा रही थी! तब लगता था, मेरे राम मुझसे रूठ गए हैं! कदाचित वे अभी बुलाना नहीं चाहते!

अबतक मैं यह सोचकर स्वयं को सांत्वना दे रहा था कि अब रामजी मंदिर बनने के बाद ही बुलाएंगे, अपने नए घर में!

परन्तु …”होई वही जो राम रची राखा….”

आखिरकार कल अचानक योजना बनी और शाम तक हम भावुक मन, भरी हुई आंखें और उल्लास भरा हृदय लेकर पहुँच गए रामलला की नगरी!

रामलला की धरती पर कदम पड़ते ही, मन श्रद्धा से भर गया और मुख से अनायास ही #जय #श्री #राम निकल गया!

सरयू मईया में स्नान करते हुए लगा कि बस, यही वह नदी है जिसके किनारे रामलला अपने भ्राताओं संग खेले होंगे!कितनी बार इस जल में स्नान किया होगा और अंत में जल समाधि भी यही ली होगी प्रभु ने!

सरयू मईया के आलिंगन से निकलने के पश्चात, हम गए अतुलित बल धामा, बजरंग बली की हनुमान गढ़ी!

वहां जाना और उस परम शक्ति को महसूस करना अपने आप में अद्भुत था! जी चाह रहा था कि वही पड़े रहे, हनुमान चालीसा पढ़ते हुए, महावीर की गोद में!

यूँ ही नहीं हनुमान गढ़ी के बजरंगी को साक्षात कहा जाता है!

कनक भवन की इमारत का स्पर्श करते हुए मैं सोच रहा रहा था कि कितना सौभाग्यशाली रहा होगा यह भवन, जहां रहते होंगे साक्षात हरि, नारायण, प्रभु राम और जगतमाता सीता!

यही कही होगा उनका विश्राम स्थल, उनका क्रीड़ा स्थल और यही पर पड़े होंगे उनके पांव कभी!

मुझे अगर प्रभु समय में पीछे लौटने का वरदान दें, तो मैं प्रभु राम की कहानी का वह अंश देखना चाहूंगा, जब उनके जीवन में शांति थी! उनके रामराज्य का समयकाल! मैं प्रभु की शासन व्यवस्था देखना चाहूंगा, उनका न्याय देखना चाहूंगा और वही कही उनके पैरों में जीवन का शेष समय काट लेना चाहूँगा!

दशरथ जी के महल से आ रही आरती की आवाज और उसके पश्चात, भक्तों के ऊपर छिड़के गए जल की बूंदें जब माथे पर पड़ी, तो आनंद आ गया!

किंतु सबसे भावुक, और सबसे अधिक आह्लादित करने वाला समय था, जन्मभूमि स्थल पर रामलला के विग्रह का दर्शन!

कितना कष्ट काटा है मेरे राम ने! बहुत थोड़ा सा सुख आपके हिस्से में आया, परन्तु धैर्य नहीं खोया आपने! मैने आपसे भी सबसे अधिक धैर्य ही सीखा है!

मेरे राम! आपने बुलाया, दर्शन दिया! आंखें डबडबा गईं! रोम रोम पुलकित हो गया! जीवन धन्य हो गया! तन मन राममय हो गया!

अब लौट रहे हैं आपकी नगरी से! उम्मीद है आप फिर बुलाएंगे! जल्दी बुलाएंगे!

आपके बुलावे का इंतज़ार रहेगा मेरे राम!

14/03/2021

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