28.1 C
New Delhi
Tuesday, June 15, 2021

ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू , चुनौतियों के साथ बढ़ता हुआ उज्जवल भारत

Must read

हिंदुस्तान! अनेकानेक सभ्यताओं और संस्कृतियों का मिलन स्थल! वह भूमि, जिसने ऐसे ऐसे व्यक्तित्वों को जन्म दिया, सिंचित किया और पोषित किया, जिन्होंने सम्पूर्ण विश्व को प्रकाश से आलोकित किया! वह देश, जिसने विश्व को “वसुधैव कुटुम्बकम” का पाठ पढ़ाया और अपने पराए का भेद मिटाकर सबको गले लगाना सीखाया।

किंतु यह भारतवर्ष जितना उदार रहा है, उतनी ही बुरी तरह से छला और डसा भी गया है!इस भूमि की छाती को न जाने कितनी ही बार रक्त से लाल किया गया है और अनेकों बार शक्तिभर लुटा गया है! इस भूमि को अनेकों बार अपवित्र करने के षड्यंत्र हुए हैं और इसके प्रतीकों, इसकी पहचानों को कलुषित करने का प्रयत्न किया गया है!

कोई गजनवी सोमनाथ पर सतरहों बार आक्रमण करके, लूट, हत्या, बलात्कार करके, इस भूमि के हिस्से के हिस्से में केवल अश्रु छोड़ गया है तो कभी कोई औरंगजेब काशी विश्वनाथ और मथुरा जन्मभूमि मंदिर को जबरन मस्जिद की शक्ल दे गया है! कोई बाबर इस देश की आत्मा श्री राम का मंदिर तोड़ गया है तो कही यूनानी, तुर्की आदि क्रूर आक्रमणकारियों ने इस शांतिपूर्ण धरा को तार तार किया है!

किंतु हाय रे मेरी मातृभूमि! तू फिर भी ना बदली! नहीं बदली तेरी सादगी, नहीं मिटी सबको गले लगाने और अपनाने की तेरी चाह; और ना ही मलिन हुई तू इतने नरसंहारों और भीषण रक्तपातों के बावजूद भी! ना ही तुमने “वसुधैव कुटुम्बकम” का राग अलापना बन्द किया और ना ही तू डगमगाई इतनी तकलीफों के बाद भी!

एक आदरणीय कह गए हैं कि भारत सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा मात्र नहीं , बल्कि एक जीता जागता राष्ट्रपुरुष है! यदि इस बात को सत्य माना जाए और यह माना जाए कि वास्तव में इस भूमि में प्राण हैं, तो मैं यह सोचकर बार बार आहत होता हूँ कि मन्दिरों की आरतियों और घण्टियों की आवाज सुनते आए भारतवर्ष ने आक्रमणकारियों की तलवारों की झंकार कैसे बर्दाश्त किया होगा!

मैं यह सोचकर मर्म तक भावुक हो जाता हूँ कि जब इस देश को लूटा गया, इसके वंशजों पर अत्याचार किए गए तब कितना कष्ट हुआ होगा इस भूमि को, इस धरा को, इस भारतवर्ष को!

उस भारतवर्ष ने कैसे क्षमा किया होगा उन पापियों को, उन नरभक्षी राक्षसों को! क्या सोचकर उसने उनके साथ अपने गर्भ से निकले अनेकों बहुमूल्य रत्नों को ले जाने दिया होगा और इतना सबल उसे किसने प्रदान किया होगा! आखिर किसके दम पर यह भूमि आजतक न तो दुखी हुई, ना थकी, ना हारी…बस आगे बढ़ती रही?

किंतु आज! छब्बीस जनवरी दो हजार इक्कीस की सुबह सुबह घने कोहरे के बीच पूरी ऊर्जा के साथ परेड करते जवानों को देखकर दिल ने कहा….यह धरती इनके दम पर इतराती रही!कदाचित उसे अपना भविष्य ज्ञात रहा होगा कि एक दिन इस देश में एक महाराणा प्रताप, एक शिवाजी महाराज और एक पृथ्वीराज चौहान के बाद ढेरों ,अनगिनत प्रताप और शिवाजी जन्म लेंगे, जिनका नाम सुनते ही शत्रुओं के पसीने ऐसे छूटेंगे जैसे चेतक की टाप से छूटते थे। इन्ही के दम पर इस धरती ने माफ कर दिया अपने सभी पुराने शत्रुओं को शायद!

सुबह उठते ही दूर से कानों में आती “हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए” की आवाज ने भावुक कर दिया और उससे भी ज्यादा भावनाएं उमड़ पड़ीं छोटे छोटे बच्चों को तिरंगा लहराने जाते देखते हुए! कितने उत्साहित थे वो! वो भले ही नहीं जानते भारत माता क्या है, किंतु फिर भी फूल,माला और अगरबत्तियां लिए जाते उनका उत्साह देखते बन रहा था! उन्हें देखकर भी दिल ने कहा कि यह धरती इन्ही के दम से आबाद है!

उन “नन्हे मुन्ने राहियों” को यह तक नहीं पता कि आज तिरंगा लहराने के पीछे क्या कारण है और ना ही वो ये जानते हैं कि संविधान किस चिड़िया का नाम है, किंतु ” वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” बोलते ये बच्चे उन लोगों के गालों पर जोरदार थप्पड़ लगाते हैं, जो यह कहते हैं कि इस देश का भविष्य अंधकारमय है और इस इसके टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह!

अब समझ में आता है कि यही बच्चे जब आगे चलकर देश की कमान सम्भालते हैं तो यह धरा प्रफुल्लित हो उठती है और भूल जाती है पूर्व में मिले अपने सारे घाव!

सुबह से चित्त बड़ा प्रसन्न है! हर कोई जय हिंद बोल रहा है! आज “राम राम” की जगह “भारत माता की जय” से सम्बोधन किया जा रहा है। हर कोई सोशल मीडिया आदि पर भी बधाई दे रहा है ,वही कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो वैसी ही बातें फैला रहे हैं जैसा उनका मन है, अर्थात निगेटिव!

बहुत सी बातें आज के दिन का अपमान करने के लिए लिखी जा रही हैं, जैसे कि “हैपी स्कूल में मिलने वाला बुंदिया एंड मिठाई डे”! यानि उनके लिए इस दिवस का मतलब सिर्फ मिठाई और बुंदिया तक ही सीमित है! दुख होता है यह देखकर!

कुछ लोग इसे “सीजनल देशभक्ति” कहकर भी मजाक उड़ा रहे हैं! उनके हिसाब से आज प्रोफाइल में तिरंगा लगाकर जाहिर नहीं करना चाहिए कि आप देश से प्रेम करते हैं! वो खुद भी नहीं करेंगे और आपको भी नहीं करने देंगे!वो कहते हैं कि यह देशभक्ति सिर्फ जनवरी और अगस्त में जगती है!
वो लोग मुझे यह बताएं कि आप होली के वक़्त दीपावली मनाते हैं क्या?

कोई आपका भी मजाक बनाए तो उससे पूछिएगा….कि क्यों न दिखाएं आज देशभक्ति? आप दशहरे में रंग तो नहीं खेलने जाते न? तो फिर क्यों न लगाएं आज स्टेटस और डीपी में तिरंगा?

ऐसे लोगों से मुझे बस यही कहना है कि आप नहीं लगा रहे, मत लगाइए! खुशी नहीं मना रहे, मत मनाइए!पर जो मना रहे हैं, खुश हो रहे हैं, उन्हें तो होने दीजिए! आप मन से कुंठित हैं ठीक है, किंतु इस देश का, इस तिरंगे का अपमान तो मत कीजिए!

बाकी उन नन्हे मुन्ने राहियों से भी यह कहना है कि यह देश हम सबका है और आगे इसे हम सबको ही चलाना है! कुछ शक्तियां हैं जो देश तोड़ना चाहती हैं! उनके बरगलाने में नहीं आना है! इस देश की पहचान, इसकी सोच और इसके विशाल हृदय को हमेशा गदगद बनाए रखना है!

देश पर प्रहार करने वालों पर प्रहार जारी रखना है, फिर चाहे वह भौतिक हो अथवा बौद्धिक! और उन देश तोड़ने वालों के “इंशाअल्लाह” वाले नारे को “लाखौल विला कुवैत” और मुहर्रम वाले मातम में तब्दील कर देना है!

और मेरे देश! मेरी धरती! मैं तुमसे क्या कहूँ, कैसे कहूँ, जब मुझे एक एक हर्फ बोलना तक तुमने ही सीखाया है! फिर भी बस दिल से यही आवाज आ रही है….

“ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू!
मैं जहां रहूँ, जहां में याद रहे तू!”

तो आईए…. हम सब मिलकर इस भारत भूमि को शाद-ओ-आबाद रखें!

आशीष शाही

Disclaimer The author is solely responsible for the views expressed in this article. The author carry the responsibility for citing and/or licensing of images utilized within the text. The opinions, facts and any media content in them are presented solely by the authors, and neither Trunicle.com nor its partners assume any responsibility for them. Please contact us in case of abuse at Trunicle[At]gmail.com

- Advertisement -

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest article