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काशी की महाशिवरात्रि : बाबा की नगरी जहां से कोई खाली हाथ नहीं लौटता।

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काशी! बनारस! वाराणसी! वरुणा और अस्सी नदियों के मिलन से मिलती हैं काशी, जहां के राजा हैं स्वयं देवों के देव महादेव और प्रधानमंत्री यानी कोतवाल हैं बाबा काल भैरव!

जहां के भरण पोषण का जिम्मा उठाती हैं मईया अन्नपूर्णा, जहाँ विराजते हैं सभी अमंगलों के विनाशक श्री गणेश और जहाँ के रक्षण का काम करती हैं युगों युगों से गंगा मईया!

जहां के लोगों का बल संकटमोचन हनुमान से है,मस्तक का तेज दुर्गाकुंड की जगदम्बा से है और जहाँ हर कार्य महादेव की सम्मति से पूर्ण होते हैं!

मान महल की वैद्यशाला से भोरे भोरे गंगा से निकलते सूरज को देखकर लगता है कि लोग बेकार ही कश्मीर को स्वर्ग कहते हैं! अरे होगा सुंदर कश्मीर भी, पर एक ठेठ बिहारी और युपीयहवा के लिए तो अपने बनारस की गंगा मईया से सुंदर नजारा और कहां है भला!

हर सांझ दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर होती गंगा आरती की तैयारियों और देशी विदेशी पर्यटकों से भरे घाट देखकर मन यही कहता है कि एक छोटी सी मड़ईया डालकर काश हम भी बैठ जाएं यही कही अस्सी घाट पर सालों से खड़े इस पीपल के पेड़ के नीचे!

संसार की सर्वोत्तम प्रेम कहानियां इन्ही अस्सी और दुर्गाकुंड की गलियों से निकली हैं और संसार का सर्वोत्तम साहित्य भी इन्ही घाटों, मंदिरों और घण्टियों की आवाज के बीच लिखा गया है!

हर मौसम, हर ऋतु और हर दिन रंगीन है बनारस का! काहे कि बनारस बाबा की नगरी है, मस्ती का शहर है, प्रेम का शहर है!

पर जानते हैं! जैसे ही बसंत पंचमी को सरस्वती मईया अपना पूजन करवाकर हमसे विदा लेती हैं, त्यों ही फगुनहट का रंग छा जाता है! रँग और गुलाल याद आने लगते हैं और साथ ही याद आने लगता है अपने बाबा के दूल्हा बनने का दिन! बाबा के विवाह का दिन! शिव के शक्ति से मिलन का दिन!

बनारस में शिवरात्रि केवल शिवरात्रि नहीं होती गुरु! यह तो बाबा के मानवीकरण का दिन बन जाता है! क्या बच्चे,क्या बूढे, क्या अमीर, क्या गरीब! सबको बस बाबा की बारात में शामिल होना रहता है! सबको उनका गण बनकर, भूत प्रेत बनकर नाचना कूदना रहता है!

कही कैलाश खेर “बगड़ बम बबम” गा रहे होते हैं तो कही किसी मंदिर में डीजे पर शंकर महादेवन “शिव शिव शंकर…..हर हर शंकर” गा रहे होते हैं!

उस दिन बाबा का प्रसाद मिलता है ठंडई में मिलाकर! ठंडई जानते हैं? नहीं जानते हैं, तो पधारिए बाबा की नगरी में, ठंडई नहीं भूल पाएंगे आप, गारंटी है!

उस दिन बाबा, न शिव होते हैं, न रुद्र और न शंकर…. बाबा, सिर्फ बाबा होते हैं! अपने बच्चों के बाबा! बनारसियों के बाबा! और जब रात में गलियों में बाबा के बारात की झांकी निकलती है, तो सब उस झुंड में नाचते कूदते समा जाते हैं, मानो कोई लहर आई और डुबो कर चली गई!

जब एक साथ, एक सुर में….”नमः पार्वती पतये हर हर महादेव…..” चिल्लाते हैं, तो लगता है ब्रह्मांड की सम्पूर्ण ऊर्जा उस पुकार में केंद्रित हो गई है!

कितनी विशेष होती है महाशिवरात्रि बनारस वालों के लिए! काशी विश्वनाथ में आधी रात से ही लाइन लग गई है! दो किलोमीटर लंबी लाइन! होशियार लोग आधी रात में ही गंगा जी मे नहाकर, लाइन में लग गए हैं! सब आपस में बतिया रहे हैं!

“गुरु बाबा जगिहन त सबसे पहले आपने जल चढ़ी!”

कांवरियों के लिए लोगों ने सड़क के किनारे किनारे पानी चाय और फल की व्यवस्था भी कर दी है! क्या अमीर, क्या गरीब, सारे भेद मिट गए हैं! आज अपने बाबा को जगाना जो है! जल जो चढ़ाना है! और तो और ,बाबा से बिना डरे अपनी बात भी मनवा लेना है आज…..

“देख लिहा बाबा! अबकी हई काम ना भईल त ठीक ना होई!”

ये स्वैग होता है एक पकिया बनारसी का, जो बाबा से अपने काम की खातिर अपने बाउजी की तरह लड़ जाता है!

और जैसे ही उसका जल बाबा पर गिरता है और पुलिस वाले उसे गर्भगृह के धक्का देकर हटाते हैं, वो बोलता है….

“रुको न गुरु! अभी तो शिकायत कर रहे थे बाबा से! अब तनिक आशीर्वाद भी ले लेने दो!”

देख रहे हैं न आप? ये रूप है शिवरात्रि का बनारस में!

बनारसी जल चढ़ाएगा! फिर दिनभर मंदिर- मंदिर दर्शन करेगा! शाम को बाबा के बारात में बराती बनेगा! भूत बनेगा, प्रेत बनेगा, गण बनेगा, देवता-असुर सब बनेगा!नाचेगा! गायेगा! ठंडई का प्रसाद पिएगा और कूदेगा! चिल्लायेगा, बाबा की मस्ती में!

आज बाबा को भी कहाँ फुर्सत मिलने वाली है दिनभर! आज बाबा को दिनभर जल से स्नान करना है! सबकी पुकार सुननी है! जो भी आएगा…..जल गिराते हुए उतनी ही तेज से चिल्लायेगा….”नमः पार्वती पतये ….हर हर महादेव……” ताकि बाबा सोए भी हों, तो सुन लें!

और बाबा सुनते भी हैं! किसी को खाली नहीं लौटाते! इसका प्रत्यक्ष अनुभव लेना हो, तो कभी शिवरात्रि पर जल चढाकर देखिएगा!

तो गुरु!

ई हैं हम! और ई है हमारा बनारस! और शिवरात्रि की तैयारी हो रही है!

तो आप भी आइए बनारस! देखिए बाबा को दूल्हा बनते हुए, गौरी को सजते हुए!बाबा की बारात निकलते हुए! भोले की मस्ती में तांडव पर लोगों को नाचते हुए! कुछ दिन रुकेंगे तो रंगपंचमी को पार्वती का गौना भी देखने को मिल जाएगा!

तो आइए! और जोर से जयकारा लगाइए…….

नमः पार्वती पतये . …..हर हर महादेव🚩🚩

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