क्या अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर हिंदू धर्म को बदनाम किया जा रहा है ?

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अभिव्यक्ति के नाम पर आजकल हिन्दू धर्म को बदनाम करने का बड़ा काम चलाया जा रहा है बड़े जोर शोर से कई फिल्मे ,वेब सीरीज बनाई जा रही है जिनमे जान बूझकर ऐसे आपत्तिजनक दृश्य या संवाद रखे जाते है जिससे हिन्दू धर्म की भावनाएं आहत हो और ज्यादा शोर होने पर मांफी मांगने का दिखावा कर दिया जाता है |
आखिर क्यों ऐसा किया जाता है ? क्या मानसिकता रहती है ऐसे लोगो की हिन्दू धर्म को बदनाम करने के पीछे ?
तो यह जान लीजिये की यह नफरत अभी से नहीं पिछले कई वर्षो से चली आ रही है | तो बताते है इसकी शुरुवात कैसे हुई ?

1940 से 1960 के दशक में जिसे हिंदी सिनेमा का महान दौर कहा जाता है उसमे कई फिल्मो में जान बूझकर हिन्दू धर्म का अनादर किया गया है |

बात करते है फिल्म मदर इंडिया की ,इस फिल्म को उस वक़्त की बेहतरीन फिल्म कहा जाता है लेकिन इसमें नायिका का नाम रहता है राधा (जो कि हिन्दुओ के लिए सम्मान का प्रतीक है) फिल्म में नायिका को एक जगह गाँव का बनिया अपनी इच्छा पूर्ति के लिए गलत काम करने को बोलता है |

अब आप बोलेंगे कि इसमें ऐसा कुछ भी गलत नहीं है कई लोग यह तर्क देंगे कि यह तो नारी शक्ति का परिचय देती है |

इस फिल्म के डायरेक्टर और प्रोडूसर थे महबूब खान और कहानी लिखी थी महबूब खान ,वजाहत मिर्ज़ा , और एस.अली राजा ने और इनमे से इस एस.अली राजा बाद में पाकिस्तान चले गए थे और वही उनका निधन हो गया था |

कई फिल्मो में दिखाया गया था कि डाकू ,लुटेरे, बलात्कारी तिलक लगाते थे और ऊँची जाति के लोग अक्सर छोटी जाति के लोगो के साथ गलत व्यवहार करते है सबसे ज्यादा छोटी जाति की महिलाओ के खिलाफ, उनके साथ दुष्कर्म किया जाता है वो भी हिन्दू धर्म स्थलों में |

इसके पीछे यह साजिश रही है कि भारत में सिनेमा मनोरंजन का साधन हुआ करते थे और उस वक़्त जब सोशल मीडिया का कोई नाम नहीं था |

तब इसी सिनेमा के कलाकारों को लोग अपना रोल मॉडल बना लिया करते थे और फ़िल्मी कलाकारों की हर बात चाहे वो डॉयलॉग हो या फ़िल्मी नायक नायिका का हिन्दू धर्म के खिलाफ संवाद करना |

उनकी हर चीज को गौर से देखना और उसके अनुसार व्यवहार करना यही एक पैटर्न बन गया था लोगो के मन में और खास तौर से उस वक़्त के युवा वर्ग में जिसके कारण उनकी सोच पर इसका काफी गहरा असर पड़ा और जिसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है | यही से शुरुवात हुई हिन्दू धर्म को बदनाम करने की |

इसी सोच को उस वक़्त के लोगो ने अपने बच्चो में संस्कारो के रूप में दिए जैसे मंदिर में जाकर दूध मत चढ़ाओ, दिवाली पर प्रदुषण मत करो उस पैसे से किसी गरीब को कुछ दे दो खाने के लिए | मंदिरो की जगह अस्पताल या स्कूलों का निर्माण करवाओ आदि आदि |

हिंदी सिनेमा के माध्यम से धीरे धीरे ही सही लेकिन नफरत भरा जहर घोला गया हिन्दू धर्म के खिलाफ और हिन्दू देवी देवताओ के प्रति |

यह छोटी सी बात इसलिए बताई जा रही है क्योंकि इससे आज की जनता को पता चले कि हिन्दू धर्म के प्रति कितनी नफरत भरी हुई थी जिहादी लोगो में और सिनेमा के माध्यम से हिन्दू धर्म के खिलाफ काफी दुष्प्रचार किया गया है और अब हिन्दुओ को एकजुट होकर इसका मुकाबला करना है हिन्दुओ को अपने धर्म अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए और अपने आदर्श इन सिनेमा के घटिया कलाकार नहीं बल्कि अपने इष्ट देवी देवताओ को बनाना चाहिए |

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