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भारत की बढ़ती लोकप्रियता से घबराया अमेरिका, भारत पर कूटनीतिक दवाब बनाने के लिए बनाई फर्जी मानव अधिकारों वाली रिपोर्ट

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आज का लेख बहुत ही महत्त्वपूर्ण है क्योंकि आज हम आपसे यह सवाल पूछना चाहते है कि पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे को आप देशद्रोह मानते है या अभिव्यक्ति की आजादी ? और मुझे पूरा यकीन है की आप पाकिस्तान जिंदाबाद को देश के खिलाफ विद्रोह मानेंगे |

लेकिन चिंता की बात यह है की अमेरिका के लिए यह विद्रोह नहीं अभिव्यक्ति की आजादी लगती है और अमेरिका चाहता है की  भारत में रहने वाली ऐसी तमाम देश विरोधी ताकतों पर कोई कार्यवाई नहीं की जाए इस बात का जिक्र अमेरिका ने मानव अधिकारों को लेकर जारी एक ताजा रिपोर्ट में किया है |

अमेरिका हथियारों का सबसे बड़ा निर्माता है ही, अब वो मानव अधिकारों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है अमेरिका की इस मानव अधिकार की रिपोर्ट में मानव अधिकारों की समीक्षा की गयी है और भारत में मानव अधिकारों को लेकर अपनी नकली चिंता दर्शाई गयी है |

यह सालाना रिपोर्ट है और इसे अमरीकी सरकार हर साल जारी करती है, अमेरिका को लगता है की भारत में अभिव्यक्ति की आजादी पर लगाम लगाई जा रही है, प्रेस की आजादी बंद की जा रही है, नागरिको के मौलिक अधिकारों को दबाया जा रहा है जिसका असर भारत के लोकतंत्र पर पड़ा है तो आप यह सोचिये की अब अमेरिका खुद को लोकतंत्र का ठेकेदार साबित करने में लगा हुआ है और यह बात उसकी रिपोर्ट में लिखी गई है |

इस रिपोर्ट को अमेरिका ने 194 देशों को बताया है कि उनके देशों में मानव अधिकारों की स्तिथि कैसी है ? और ये देश भविष्य में क्या कर सकते हैं ।

यानी अमेरिका पूरी दुनिया को एक हेडमास्टर की तरह यह सीखा रहा है कि मानव अधिकारों को लेकर क्या करना चाहिए और कौन सा देश अच्छा काम कर रहा है और कौन सा देश खराब काम कर रहा है।
लेकिन विडंबना यह है कि इस रिपोर्ट में अमेरिका ने अपना जिक्र नहीं किया है ।

यह नहीं बताया कि उसके अपने देश में क्या हो रहा है ? अमेरिका में लोकतंत्र के प्रति वहां के लोगो में ऐतिहासिक गिरावट आई है।
इस बात को इसने इस रिपोर्ट में छिपा लिया।

नस्लीय भेदभाव अमेरिका में बढ़ रहा है उसका इस रिपोर्ट में कोई जिक्र नहीं है, अश्वेत नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही हैं, इसके बावजूद भी अमेरिका इस रिपोर्ट में अपना जिक्र नहीं कर रहा और भारत को बहुत तरह के उपदेश दे रहा है।

इस रिपोर्ट में लगभग सारे पन्नो में भारत में मानवाधिकारों की स्तिथि पर बताया गया है। आज आपको अमेरिका के दोहरे चरित्र के बारे में बताएंगे इस रिपोर्ट के माध्यम से ।

अगर आपको भारत देश से प्यार करते हैं और आपको अगर ऐसा लग रहा है कि भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत शक्ति के रुप में उभर रहा है तो आपको यह रिपोर्ट को पढ कर बहुत गुस्सा आएगा और आपको कई बातें बुरी लगेंगी और इस रिपोर्ट को पढ कर हम सब वापस एकजुट हो जाएंगे ऐसी दुष्ट लोगो के खिलाफ ।

इस रिपोर्ट में मशहूर देशद्रोही वकील प्रशांत भूषण का जिक्र किया गया है । प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना के लिए एक रुपए का दंड लगाया गया था ।

लेकिन इस रिपोर्ट में यह लिखा गया है कि यह आदेश कोर्ट का अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ था,मतलब इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले अमेरिका के सांसद और अधिकारी खुद को हमारे देश की सुप्रीम कोर्ट से भी उपर मानते हैं,और उन्होंने सीधे हमारे देश की सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देने की कोशिश की है।

इसके मुताबिक भारत का सुप्रीम कोर्ट ही अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ काम कर रहा है । अमेरिका की इस रिपोर्ट से भारत की न्याय व्यवस्था को पूरी दुनिया में बदनाम करने की कोशिश की गईं है।

आपको याद होगा जब नागरिक सुरक्षा कानून के खिलाफ देश भर में आन्दोलन चलाए जा रहे थे और इसी दौरान बेंगलुरु की एक रैली में अमूल्या लियोना नाम की लड़की ने पाक समर्थन में नारे लगाए थे, तब पुलिस ने उसके खिलाफ देश द्रोह का मामला दर्ज किया था और कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जमानत भी मिल गई थी ।

लेकिन अमेरिका की इस रिपोर्ट में पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार करना और देशद्रोह की धाराएं लगाना अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ था।

अब आप खुद तय कीजिए कि भारत देश में पाक जिंदाबाद के नारे लगाना अपराध नहीं माना जाएगा क्योंकि अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक भारत देश में पाक जिंदाबाद के नारे लगाना अभिव्यक्ति की आजादी है ।

अमेरिका भूल जाता है कि वहां जब राष्ट्रपति के चुनाव के फैसले के खिलाफ जब 6 जनवरी 2021 को नाराज लोग अमेरिका की संसद में घुस गए थे तब अमेरिका को उनकी मांगे उनकी अभिव्यक्ति की आजादी नहीं लगी ।

तब अमेरिका में इन लोगो की अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान नही किया गया था, तब इन लोगो पर गोलियां चलाई गई थी जिसमे 6 लोगो की मौत हो गई थी।

ये तस्वीरे पूरी दुनिया ने देखी थी,तब सोशल मीडिया ट्विटर ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड कर दिया था,तब कहां गई थी अभिव्यक्ति की आजादी जिसका ज्ञान अमेरिका आज भारत को दे रहा है।

अमेरिका कभी अपनी खुद की मानव अधिकारों की चिंता जनक स्तिथि के बारे में नही लिखता है, रिपोर्ट में बस दूसरे देशों को उपदेश देता रहता है ।

इस रिपोर्ट में अमेरिका ने भारत में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के ऊपर भी लिखा है, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कई रोहिंग्या मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर में रखा गया है और कई रोहिंग्या मुसलमानो को वापस म्यांमार भेजा जा रहा है जो की गलत कदम है भारत सरकार का।

ख़ुद अमेरिका भूल जाता है कि वो कैसा बर्ताव करता है उन लोगों के साथ जो अवैध रूप से अमेरिका में घुस जाते हैं। 2018 में अमेरिका ने कई छोटे छोटे बच्चो को उनके माता पिता से दूर डिटेंशन सेंटर में रख दिया था।

तब उन मासूम बच्चों की तस्वीरें रोते बिलखते हुए पूरी दुनिया ने देखी थी । तब भारत तो क्या, किसी भी देश ने अमेरिका को ऐसा करने के लिए उसकी आलोचना नहीं की थी ।

रिपोर्ट में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शफूरा जरगर की गिरफ्तारी की आलोचना की गईं है वो भी तब जब भारत में वो लोग देश द्रोह का काम कर रहे थे ।

इसे आप अमेरिका की डिजाइनर रिपोर्ट भी कह सकते है, क्योंकि ऐसी रिपोर्ट बना कर अमेरिका अपनी नकली विदेश नीति को चमकाता है।

अमेरिकी में जब नस्लीय हिंसा होती है,वहां लोगों पर अत्याचर किया जाता है तो अमेरिका उसे एक छोटी सी घटना करार देता है और दुसरे देशों को लाइन में खड़ा करके उनको कोसता है मानव अधिकारों के लिए।

हमारे यहां पुलिस आरोपियों पर कानूनी कार्यवाही कर देती है तो अमेरिका उसको मानव अधिकारों का हनन बोलता है और खुद उसके देश में पुलिस गोली मार देती हैं लोगो को तो उसे छोटी घटना करार देता है।

अमेरिका ऐसे घटिया रिपोर्ट बना कर दूसरे देशों पर कूटनीतिक दवाब बनाना चाहता है। वो देश जो अमेरिका के खिलाफ होते है या वो देश जो चीन या रूस का समर्थन करते है।
ऐसा करके वो इन देशों की फंडिंग को भी रोक देता है, वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ से मिलने वाले लोन को ऐसी रिपोर्ट बताकर प्रभावित करता है, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी उनको तकलीफ देता है ऐसी रिपोर्ट के माध्यम से।

जो देश अमेरिका के साथ होते है उनको वो कुछ नही बोलता है और जो देश उसके खिलाफ होते है उनके खिलाफ अमेरिका ऐसी रिपोर्ट बना कर डराता है।
जैसे 1980 के दशक में अमेरिका ने सोवियत संघ को हराने के लिए तालिबान को हथियार और आर्थिक मदद की थी ।

इराक  के तानाशाह सद्दाम हुसैन ने जब ईरान पर हमला किया था तब अमेरिका ने सद्दाम हुसैन का समर्थन किया था,लेकिन उसी सद्दाम हुसैन ने जब अमेरिका के सहयोगी देश कुवैत पर हमला कर दिया तो इसी अमेरिका ने उनको हिटलर कहना शुरू कर दिया।

इससे आप अमेरिका के दोहरे चरित्र को देख सकते है,अमेरिका खुद अपने देश में हो रहे मानव अधिकारों के हनन पर कुछ नही बोलता है, ख़ुद उसके देश में इतनी नस्लीय हिंसा होती है, लेकिन उस पर चुप हो जाता है। पहले सोशल मीडिया नही था इसलिए अमेरिका ऐसी खबरों को दबा दिया करता था,लेकिन अब अमेरिका की पोल खुल रही है।

https://www.state.gov/reports/2020-count/https://www.state.gov/reports/2020-country-reports-on-human-rights-practices/india/

Raunak Nagar
Raunak Nagar
हिन्दू हूं मुझे इसी बात पर गर्व है ।

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