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Friday, August 6, 2021

किं पतंजलिम् लोहसुष्या: लक्ष्ये भवतम् लुंठितं ? अंततः आयुर्वेदस्यैव विरोधम् किं ? क्या पतंजलि ने बंदूक की नोक पर आप को लूटा ? आखिर आयुर्वेद का ही विरोध क्यों ?

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किं आचार्य बालकृष्ण: भवतः कोश: कर्तयतु ? किं आचार्य महाशयः श्रृंगाटकिमस्योपासेवनस्य, कवचस्य, भस्मस्य नामै: भवतम् निर्बुद्धिम् निर्मित: ? किं २०० देशेषु योगम् प्राप्त्वा रामदेव महाशयः पतंजलिम् वा हाफिज सईद: दाऊद इब्राहिम: वा यथा पापम् वैश्विकाघम् वा कृतः ?

क्या आचार्य बालकृष्ण ने आपकी जेब काटी ? क्या आचार्य जी ने समोसा, चटनी, ताबीज, भभूत के नाम से आपको उल्लू बनाया ? क्या 200 देशों में योग पहुंचाकर रामदेव जी व पतंजलि ने हाफिज सईद व दाऊद इब्राहिम जैसा गुनाह व वैश्विक अपराध किया है ?

किं मदर टेरेसा यां जीवितेन चमत्कारिनः संत घोषितवन्तः, यत् स्पर्शित्वा निरोग्यति स्म, सा चिकित्सालये नर्दित्वा नर्दित्वा मृता, भवान् कदापि प्रश्नम् उत्थितं ?

क्या मदर टेरेसा जिसको जीते जी चमत्कारी संत घोषित किया, जो छूकर बीमारी ठीक करती थी, वह हॉस्पिटल में तड़प तड़प कर मरी, आपने कभी सवाल उठाया ?

किं आचार्य बालकृष्ण: बाबा रामदेव: वा स्वयं भगवतरवतार: वा घोषितौ ? किं चिकित्सालयं संचालनम्, अनाथालय निर्माणम्, विद्यालय संचालनम्, धर्मशाला निर्माणम्, हुतात्मान् सम्मानितं, भोजन वितरणं, कृषकस्य क्षेत्रेण जड़ी- बुट्यः क्रीत्वा शुद्ध वस्तूनि निर्मित्वाघम् कृतौ !

क्या आचार्य बालकृष्ण या बाबा रामदेव ने खुद को भगवान, गॉड या अवतार घोषित किया ? क्या हॉस्पिटल खोलना, अनाथालय खोलना, विद्यालय खोलना, धर्मशाला बनाना, शहीदों को सम्मानित करना, लंगर चलना, किसान के खेत से जड़ी बूटियां खरीदकर मिलावट रहित चीजें बनाकर पाप किया है ?

किमचार्य बालकृष्णमहाशय: विजय माल्यायाः नीरव मोदिण: भांति देशम् लूंठनस्याघम् कृतः ? भवान् वर्षाणि एव भवान् स्व कोशं कर्तित्वा फेयर एंड लवली घर्षणितं, किं भवान् गौर अभवत् ?

क्या आचार्य बालकृष्ण जी विजय माल्या, नीरव मोदी की तरह देश को लूटने का अपराध किया है ? आप सालों तक आप अपनी जेब कटवा कर फेयर एंड लवली रगड़ते रहे, क्या आप गोरे हुए ?

इति पतंजल्या: अघमेदमस्ति तत येन कोलगेट यत् नीमं, तुलसीम्, वेदं, रामायणं, महाभारतं न मान्यति स्म, वयमस्थिनां चूर्ण इति घर्षणयति स्म, तं ८० वर्षाणि पुरातन कोलगेट इतमस्यैव हवाई पदत्राणे रमित्वा, विदीर्णान्तर्वास: धारक: आचार्य: वेदशक्ति निर्माणं विवशं कृतौ ?

इस पतंजलि का पाप यह है कि इसने कोलगेट जो नीम, तुलसी, वेद, रामायण, महाभारत को नही मानती थी, हम हड्डियों का चूर्ण रगड़ते थे, उस 80 साल पुरानी कोलगेट को इसी हवाई चप्पल में रहकर ,फटी बनियान पहनने वाले आचार्य ने वेदशक्ति बनाने को मजबूर कर दिया ?

तु तस्मात् भवतमसुविधा न कुत्रचित हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोलगेट, नेस्ले तदा भवतः मातुलस्य संस्थानि अस्ति, तत् च् तदा वाणिज्यं कृतानि तथा यत् संचयति तत् सरलं आंग्लान् न प्रधानमंत्री आपदा राहत कोषे प्रेषयति ?

पर उससे आपको दिक्कत नही क्योंकि हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोलगेट, नेस्ले तो आपके मामा की कंपनियां है, और वह तो व्यापार नही करती तथा जो कमाती है वह सीधे अंग्रेजो को नही प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में भेजती है ?

किं भवान् प्रश्नमोत्थित: तत यदा २००० वर्षाणि पूर्व सुश्रुत: १०० प्रकारस्यशल्यं कर्तुम् शक्नोति स्म, तदाद्य भारते आयुर्वेदस्योपरि अनुसंधानं किं न भवितं ? किं भवान् प्रश्नमोत्थित: कदापि ?

क्या आप ने सवाल उठाया कि जब 2000 साल पहले महर्षि सुश्रुत 100 प्रकार की सर्जरी कर सकते थे, तो आज भारत में आयुर्वेद के ऊपर अनुसंधान क्यों नहीं होता ? क्या आपने सवाल उठाया कभी ?

अद्य भारते एलोपैथी इत्यस्योपरि संपूर्ण बजट इति किं व्ययते ? किं भवान् कदा कश्मीरे प्रस्तर प्रहारकाः आतंकिषु प्रश्नमोत्थित: ?

आज भारत में एलोपैथी के ऊपर सारा बजट क्यों खर्च किया जाता है ? क्या आपने कभी कश्मीर में पत्थरबाजी करने वाले आतंक वादियों पर सवाल उठाया ?

किं भवान् कश्चित चिकित्सकान् नेत्राणाम् चिकित्सकानोपनेत्रं धृतमानः सुश्रुषाम् कर्तुम् दृष्ट्वा तस्योपरि प्रश्नमोत्थित: ? किं वयं देशस्य अभ्यांतर लक्षानि विदेशी संस्थानि यत् लुंठयन्ति तेषु प्रश्नमोत्थित: ?

क्या आपने किसी डॉक्टर को आंखों के डॉक्टर को चश्मा लगाते हुए इलाज करते देखकर उसके ऊपर सवाल उठाया ? क्या हमने देश के अंदर लाखों विदेशी कंपनियां जो लूट रही है उस पर सवाल उठाया ?

जॉनसन एंड जॉनसन इत्स्योपरि अमेरिकायाम् रजसेन कर्कटरोग: भवे ३२००० कोटिनामर्थदंड कृतं, तु संभवतः यस्मिन् भवतम् विश्वासं नासि तदा गूगल इति करोतु, कुत्रचित भवान् तदा ९९ रूप्यकानां जियो इत्यस्य क्रान्तिकारिमसि ?

जॉनसन एंड जॉनसन के ऊपर अमेरिका में पाउडर से कैंसर होने पर 32000 करोड़ का जुर्माना किया गया, लेकिन शायद इस पर आपको यकीन ना हो तो गूगल कर लो, क्योंकि आप तो 99 रुपये के जियो के क्रांतिकारी हो ?

किं भवान् कदा तस्योपरि प्रश्नमोत्थित: ? कदा लेखम् लेखित: तत भारते तं प्रतिबंधितं कृतं ? स्मरयतु वयमेदम् विरोधम् कृत्वा पतंजल्या: न भारतस्य क्षतिम् कुर्वन्ति ?

क्या आपने कभी उसके ऊपर सवाल उठाया ? कभी पोस्ट डाली कि भारत में उसको बैन किया जाए ? याद रखिये हम यह विरोध करके पतंजलि का नही भारत का नुकसान कर रहे हैं ?

लाला लाजपत राय: कथितः स्म तत संपूर्ण विश्वे केवलं भारतीय हिंदू इदृशैव धर्ममस्ति यत् स्व महापुरुषान्, स्व व्रतानि, उत्सवाणि, परंपरान्, संस्कृत्य: स्व देवान् च् कुवच दत्वा तस्यानादरं कृत्वा गर्वमनुभूयन्ति ?

लाला लाजपत राय ने कहा था कि पूरी दुनिया में केवल भारतीय हिंदू ऐसी कौम है जो अपने महापुरुषों ,अपने व्रत, त्योहार, परंपराओं, संस्कृति और अपने भगवानों को गाली देकर उनका अपमान करके गर्व महसूस करते हैं ?

वयं होलिकोत्सवे दीपावल्याम्, करवा चौथे, रक्षा बंधने, स्व तदा स्व भगवतः श्रीकृष्णे, हनुमद् महाशयमपि न त्यक्तानि, तेषु प्रहसनं निर्मित्वा, तस्य दीपस्तंभ कृत्वा, उपहासं निर्मित्वा तस्योपरि लेखानि प्रसृत्वा वयं अवगम्याम: वयं बहु शिक्षित: भवानि, विचारयाम: तत वयं वृहद कार्यम् कृतानि वयं च् प्रसिद्धानि भविष्यामः !

हम होली पर, दिवाली पर, करवा चौथ पर, रक्षाबंधन पर, अपने तो अपने भगवान श्रीकृष्ण पर, हनुमान जी को भी नही छोड़ा, उन पर चुटकुले बनाकर, उनका मजाक करके, उपहास बनाकर उनके ऊपर पोस्ट वायरल करके हम समझते हैं हम बहुत पढ़े लिखे हो गए, सोचते है कि हमने बहुत बड़ा तीर मार लिया और हम महान हो जाएंगे !

यदि भवान् पतंजलि बाबा रामदेवं, आचार्य बालकृष्णं अपशब्दं दत्वा प्रसिद्धम् भवितुम् शक्नोति, भवतम् भारतरत्न इति लब्धिष्यते, भवान् परमवीर: निर्मिष्यते तदा भवान् अवश्यं करोतु !

अगर आप पतंजलि बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण को गाली देकर तीस मार खां बन सकते हैं, आपको भारत रत्न मिल जायेगा, आप परमवीर बन जायंगे तो आप जरूर कीजिये !

यद्यपि उपरि तिष्ठ्वा भगत सिंह, राजगुरु, आजाद, विस्मिल,सावरकर महाशया: अस्माभिः दृष्ट्वा स्व शिरं ताडितुम् शक्नुता: तत वयं यथाकर्मण्य, अयोग्य जनेभ्यः सः किं अनावश्यकं पाशबंधे आरुह्यता: ?

ताकि ऊपर बैठकर भगत सिंह, राजगुरु, आजाद, बिस्मिल, सावरकर जी हमे देखकर सिर पीट सके कि हम जैसे निक्कमे, नकारा लोगों के लिए वह क्यों खामखां फांसी चढ़े ?

येन कारणं एकदा विचारयन्तु तत यस्मात् किं भविष्यति, कस्य लाभम् भविष्यति, वयं कस्य निमित्तं निर्मिता: !

इसलिए एक बार विचार करें कि इससे क्या होगा, किसका फायदा होगा, हम किसके मोहरे बन गए !

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