२६/११ इतम् गृहीत्वा मनीष तिवारिण: पुस्तके प्रहारकं अभवत् भाजपा, कांग्रेस नेता अधीर रंजन: ज्ञापित: स्वकीय विचारम् ! 26/11 को लेकर मनीष तिवारी की किताब पर हमलावर हुई बीजेपी, कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने बताया, निजी विचार !

0
156

पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारिण: एकस्य पुस्तकस्य मीडिया इत्ये अंकितं केचनोद्धरणानां उल्लेखं कृतन् भारतीय जनता दळम् भौमवासरमारोपमारोपितं !

पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी की एक पुस्तक के मीडिया में छपे कुछ उद्धरणों का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को आरोप लगाया है !

कांग्रेसस्य नेतृत्वकं तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सर्वकारम् २००८ तमे २६ नवंबरम् मुम्बय्यां अभवत् ! आतंकी घातानामनंतरम् येन प्रकारस्य दृढ़ उत्तरदायी कार्यवाहिम् करणीयं स्म, तादृशमेव न कृतं राष्ट्रीय सुरक्षाम् च् भित्तिविवरमे धृतं !

कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को 2008 में 26 नवंबर को मुंबई में हुए ! आतंकवादी हमलों के बाद जिस प्रकार की मजबूत जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए थी, वैसी नहीं की और राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखा !

दलीय मुख्यालये आयोजितं संवाददाता सम्मेलनम् संबोध्यन् भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया कथित: तत यस्मात् सिद्धम् भवति तत कांग्रेसस्य सर्वकारः अयोग्यमासीत् !

पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि इससे साबित होता है कि कांग्रेस की सरकार निकम्मी थी !

भाटिया कथित: मनीष तिवारिण: पुस्तके यत् तथ्य संमुखमागतं, तेन कांग्रेसस्य विघातस्य स्वीकरोक्ति कथनैव उपयुक्तम् भविष्यति ! सः कथित: इति पुस्तकस्य सारांशमस्ति तत संयम शक्तयाः चिन्हम् नास्ति !

भाटिया ने कहा कि मनीष तिवारी की पुस्तक में जो तथ्य सामने आए हैं, उसे कांग्रेस की विफलता का कबूलनामा कहना ही उपयुक्त होगा ! उन्होंने कहा इस पुस्तक का सारांश है कि संयम शक्ति की निशानी नहीं है !

मुम्बै: घातस्य काळं संयम क्षीणता मान्यतुं शक्नोति ! भारतं तं काळं तीक्ष्ण कार्यवाहिम् करणीयं स्म, यदा कांग्रेसस्य विघातानां इदम् स्वीकरोक्ति पठितं तर्हि प्रत्येक भारतीयं इव मयापि कष्टमभवत् !

मुंबई हमले के समय संयम कमजोरी माना जा सकता है ! भारत को उस समय कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी, जब कांग्रेस की विफलताओं का यह कबूलनामा पढ़ा तो हर भारतीय की तरह हमें भी बड़ी पीड़ा हुई !

सः कथित: इति तथ्यस्यानंतरमद्य स्पष्टम् भवितं तत कांग्रेसस्य यत् सर्वकारः आसीत्, तताकर्मनयोग्यम् चासीत् ! राष्ट्रीय सुरक्षा यथा प्रकरणेषु भारतस्य अखंडतायाः अपि तेन चिंता नासीत् !

उन्होंने कहा इस तथ्य के बाद आज स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस की जो सरकार थी, वह निठल्ली और निकम्मी थी ! राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे पर भारत की अखंडता की भी उसे चिंता नहीं थी !

भाटिया इति प्रकरणे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांध्या पूर्वाध्यक्ष राहुल गांधिना च् शांतता त्रोटनस्य याचनां कृतन् प्रश्नम् उत्थितं तत तत काळम् भारतीय सैन्यं आज्ञाम् स्वच्छंदता च् किं न दत्तं !

भाटिया ने इस प्रकरण में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से चुप्पी तोड़ने की मांग करते हुए सवाल उठाया कि उस समय भारतीय सेना को अनुमति और खुली छूट क्यों नहीं दी गयी !

सः कथित: अस्माकं सैन्यं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंहेणाज्ञाम् याच्यति स्म तत वयं पकिस्तानम् ज्ञानम् शक्ष्यते ? तु तै: आज्ञाम् किं नदत्तं ? मनीष तिवारिण: पुस्तकं गृहीत्वा कांग्रेसस्य वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी कथित: तत इदम् मनीष तिवारिण: स्वकीय विचारमस्ति !

उन्होंने कहा हमारी सेना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अनुमति मांग रही थी कि हम पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे ? लेकिन उन्हें अनुमति क्यों नहीं दी गई ? मनीष तिवारी की किताब को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ये मनीष तिवारी के निजी विचार हैं !

तत्रैव अधीर: भाजपा सर्वकारमपि धातुपंजरम् स्थितन् ट्वीतं कृतः ! दृष्टिगतासि तत मनीष तिवारी स्व पुस्तके प्रश्नमुत्थितुमलिखत् तत २६/११ तमस्य घातस्य काळम् देशम् त्वरितं तीक्ष्णं च् कार्यवाहिम् करणीयं स्म !

वहीं अधीर ने भाजपा सरकार को भी कटघरे में खड़ा करते हुए ट्वीट किया है ! गौर हो कि मनीष तिवारी ने अपनी किताब में सवाल उठाते लिखा है कि 26/11 के हमले के वक्त देश को त्वरित और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी !

दृष्टिगतासि तत कांग्रेस सांसद वरिष्ठ च् नेता मनीष तिवारी २००८ तमे २६/११ तमस्य मुम्बै: आतंकी घातानां अनंतरम् तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सर्वकारेण कृतवान कार्यानां आलोचनाम् कृतः ! स्व अग्रिम पुस्तक ‘१० फ्लैश पॉइंट्स २० ईयर-राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति’ येन भारतं प्रभावितं !

गौर हो कि कांग्रेस सांसद और सीनियर नेता मनीष तिवारी ने 2008 में 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा किए गए कामों की आलोचना की है ! अपनी आगामी पुस्तक ’10 फ्लैश पॉइंट्स 20 ईयर-राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति’ जिसने भारत को प्रभावित किया !

पूर्व केंद्रीय मंत्रिण: कथनमस्ति तत २६-२९ नवंबर, २००८ तमस्य आतंकी घातानां अनंतरम् भारतम् येन प्रकारेण कार्यवाहिम् कृतं, तत क्षीणतायाः संकेतम् आसीत् न तत शक्त्या: ! वयं किं कृतवान तेन तीक्ष्ण शब्देषु ज्ञापनीयं स्म ! ते स्वयं स्व ट्विटर अकाउंट इत्ये प्रसृतं पुस्तकस्य अंशस्यानुसारम् ज्ञापयन्ति !

पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि 26-29 नवंबर, 2008 के आतंकी हमलों के बाद भारत ने जिस तरह से कार्रवाई की, वह कमजोरी का संकेत था न कि ताकत का ! हमने क्या किया उसे जोरदार शब्दों में बताना चाहिए था ! वे खुद अपने ट्विटर अकाउंट पर जारी पुस्तक के अंश के अनुसार बताते हैं !

उल्लेखनियमस्ति तत २६ नवंबर २००८ तमम् पकिस्तानस्य आतंकी संगठनम् लश्कर-ए-तैयबा इतस्य १० आतंकी समुद्री मार्गेण मुम्बय्या: विभिन्न क्षेत्रेषु प्रवेशिता: स्म तै: च् भिन्न-भिन्न स्थानेषु गुलिकाघातानि आरंभिता: स्म !

उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादी समुद्री मार्ग से मुंबई के विभिन्न इलाकों में घुस गए थे और उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी !

इति घातेषु १८ सुरक्षाकर्मिभि: सह १६६ जनाः अहनत् स्म ! इति आतंकी घाते केवलं जीवित: अजमल कसाबम् बंधने कृतः स्म ! तेन चत्वारि वर्षाणि अनंतरम् २१ नवंबर २०१२ तमम् कालपाश: दत्तं स्म !

इस हमले में 18 सुरक्षाकर्मियों सहित 166 लोग मारे गए थे ! इस आतंकवादी हमले में एकमात्र जिंदा बचे अजमल कसाब को गिरफ्तार कर लिया गया था ! उसे चार साल बाद 21 नवंबर, 2012 को फांसी दी गई थी !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here