इदम् गृहम् विक्रीतुमस्ति तर्हि शृणुम् भविष्यति, तु इदम् न शृणुम् भविष्यतीदम् मंदिरम् विक्रीतुमस्ति !यह घर विकाऊ है तो सुना होगा, लेकिन यह नहीं सुना होगा यह मंदिर बिकाऊ है !

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आम् ! इदम् सत्यमस्ति गुजरातस्य भरूच नगरे, एकं अतिप्राचीन जलाराम बापा मंदिरे लेखम् स्थापितं, इदं मंदिरं विक्रीतुमस्ति ! भवान् अवश्य क्षुभिष्यति इदृशम् पठित्वा ? इदृशं किमभवत् यस्य पूर्ण सत्यतां भवान् ज्ञायतु इति लेखस्य माध्यमेण !

जी हाँ ! यह सच है गुजरात के भरूच शहर में, एक अति प्राचीन जलाराम बापा मंदिर पर बोर्ड लगा है, यह मंदिर बिकाऊ है ! आप जरुर चौंक गये होगे ऐसा पढ़कर ? ऐसा क्यों हुआ इसकी पूरी सच्चाई को आप जाने इस लेख के माध्यम से !

जलाराम मंदिरे प्रतिदिनम् प्रातः सायं पूर्णवैदिक मंत्रेण सह पूजनमार्तिक्यं वा भवति स्म गुरूवासरम् च् इति मंदिरे सायंकालस्य विशेषार्तिक्यं भवति स्म ! पुनः शौकत अलीति नाम्न: एकः मुस्लिम: मंदिरस्य संमुखम् एकं गृहम् क्रीतः !

जलाराम मंदिर में हर रोज सुबह शाम पूरे वैदिक मंत्रों के साथ पूजा व आरती होती थी और गुरुवार को इस मंदिर में शाम की विशेष आरती होती थी ! फिर शौकत अली नाम के एक मुसलमान ने मंदिर के ठीक सामने एक घर खरीदा !

तं गुरूवासरस्य विशेषार्तिक्यस्य विरोधम् कर्तुं आरंभितः ! शनै:-शनैः समाजस्य २८-३० गृहान् मुस्लिमा: क्रीताः सर्वे मेलित्वा च् मंदिरस्यार्तिक्यस्य विरोधम् कर्तुमारंभिताः, अधुना मंदिरे आर्तिक्यं अवरुद्धम् !

उसने गुरुवार की विशेष आरती का विरोध करना शुरू किया ! धीरे-धीरे सोसाइटी के 28-30 घरों को मुसलमानों ने खरीद लिया और सब मिलकर मंदिर की आरती का विरोध करने लगे, अब मंदिर में आरती बंद हो गई है !

इयतेव न, मंदिरं सम्प्रति विक्रयस्यापि तत्परतास्ति ! इदम् कश्चित कथानकम् नास्ति अपितु गुजरातस्य भरूच नगरेण संलग्नम् तत कटु सत्यमस्ति ! भरूच नगरस्य केचन अंशेषु २०१९ तमे अशांत क्षेत्रम् अधिनियमारंभितमासीत् !

इतना ही नहीं, मंदिर को अब बेचने की भी तैयारी है ! यह कोई कहानी नहीं है बल्कि गुजरात के भरूच शहर से जुड़ा वह कड़वा सच है ! भरूच शहर के कुछ हिस्सों में 2019 में अशांत क्षेत्र अधिनियम लागू किया गया था !

तु प्रशासनेण सह केचन जनाः यस्मिन् गोपिता: प्रमादानां लाभमुत्थायन् केचनक्षेत्रेषु पूर्ण जन सांख्यिकीमिव परिवर्तितं ! सम्प्रति स्थितिमिदम् अभवत् हिंदू केवलं भरूच नगरस्य सोनी फलियो हाथीखाना च् क्षेत्रेषु अवशेषिते !

लेकिन प्रशासन सहित कुछ लोगों ने इसमें छिपी खामियों का फायदा उठाते हुए कुछ क्षेत्रों में पूरी जन सांख्यिकी (डेमोग्राफी) ही बदल डाला ! अब स्थिति यह हो गई है कि हिंदू केवल भरूच शहर के सोनी फलियो और हाथीखाना क्षेत्रों में रह गए हैं !

सम्प्रति तत्रापि क्लिष्टताया कश्चित २०-२५ हिंदू कुटुंबानि अवशेषितानि ततापि च् सम्प्रति अत्रतः स्व गृहान् विक्रित्वा तत च् क्षेत्रम् त्यज्यस्य निर्णयम् कृतवन्तः ! मंदिरस्य न्यासिजनाः मुख्यमंत्रिणापि ऑनलाइन रजिस्टर्ड च् डाकेण यस्मिन् हस्तक्षेपस्य याचनां कृतवान !

अब वहाँ भी मुश्किल से कोई 20-25 हिंदू परिवार बचे हैं और वो भी अब यहाँ से अपने घरों को बेच कर और वह इलाका छोड़ देने का फैसला कर चुके हैं ! मंदिर के ट्रस्टी लोगों ने मुख्यमंत्री से भी ऑनलाइन और रजिस्टर्ड पोस्ट से इस पर दखल देने की मांग किया !

तु गुजरात भरूच नगरस्य प्रशासनम् मौनमस्ति, सम्प्रति यदीति मंदिरे कदापि आर्तिक्यं भवति, तर्हि आर्श्वस्य पार्श्वस्य शतानि मुस्लिमा: आगत्वा बलात् आर्तिक्यं अवरुद्धयन्ति कथ्यन्ति च् तत अस्माकं इस्लामे अलिखत ततास्माकं कर्णेषु मंदिरस्य आर्तिक्यस्य स्वरम् घटिकायाः स्वरम् नागमनीयं !

लेकिन गुजरात भरूच शहर का प्रशासन चुप है, अब यदि इस मंदिर में कभी भी आरती होती है, तो आसपास के सैकड़ों मुस्लिम आ करके जबरदस्ती आरती को बंद करवा देते हैं और कहते हैं कि हमारे इस्लाम लिखा है कि हमारे कानों में मंदिर की आरती की आवाज और घंटी की आवाज नहीं आनी चाहिए !

विवशताया बहुमासै: इति मंदिरे आर्तिक्यं न भविते ! इस्लामे तेषां कर्णेषु आर्तिक्यस्य स्वरम् नागमनीयं ! हिंदूणां कर्णेषु अजानस्य स्वरम् किं नागतं ! मम सर्वेभ्यः निवेदनमस्तीति प्रकारस्य घटनानां विरोधम् कर्तुं शिक्षयतु !

मजबूरन कई महीनों से इस मंदिर में आरती नहीं हो पा रही है ! इस्लाम में उनके कानों में आरती की आवाज नहीं आनी चाहिये ! हिंदुओं के कानों में अजान की आवाज बेशक आये ! मेरा सबसे निवेदन है इस तरह की घटनाओं का विरोध करना सीखिए !

इदृशमेव केचन दर्शित्वा कूलेण निस्सरणमस्माभिः सम्यक् नास्ति भवान् वयं च् तर्हि स्वजीवनम् जीविष्यामः तु स्वबालकेभ्यः संकटम् उत्पादितुं मा ददाम, तस्य भविष्यं तमे त्यक्त्वा मा गच्छाम ! जीवितमसि तर्हि जीवितुं दृष्टिमागमनस्यापि बहु आवश्यकमस्ति !

ऐसी कुछ देखकर साइड से निकालना हम सब के लिये ठीक नहीं है आप और हम तो अपना जीवन जी लेंगें मगर अपने बच्चों के लिए दलदल पैदा मत होने दीजिए, उनका भविष्य अन्धेरे में छोड़कर मत जाइये ! जिंदा हो तो जिंदा नजर आना भी बहुत जरूरी है !

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