राजीव गांधिन् देशस्य प्रधानमंत्रिन् रमितनभवत नर संहारम् ! भाजपायाः नाम दुर्नामकृत्वा त्रैतुं इच्छति कांग्रेसम् ! राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री रहते हुए हुआ नरसंहार ! भाजपा, आडवाणी के नाम को बदनाम करके बचना चाहती है कांग्रेस !

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राजीव गांधिन् देशस्य प्रधानमंत्रिन् रमित: ३१ अक्टूबर १९८४ तः २ दिसंबर १९८९ एव, भाजपा नेता टिक्का लाल टपलू यस्य हननेण कश्मीर नर संहारस्यारंभिते तस्य गृहे प्रवेशित्वा हननमभवत १४ सितंबर १९८९ तमम् अर्थतः यदा टिक्का लाल महोदयम् हनितं तदा राजीव गांधिन् देशस्य प्रधानमंत्रिनासीत् !

राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री रहे 31 अक्टूबर 1984 से 2 दिसंबर 1989 तक, भाजपा नेता टिक्का लाल टपलू जिनकी हत्या से कश्मीर नरसंहार की शुरूआत होती है उनकी घर में घुसकर हत्या हुई 14 सितंबर 1989 को यानि जब टिक्का लाल जी को मारा गया तब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे !

टिक्का लाल टपलो: हननस्यानंतरम् ४ नवंबर १९८९ तमम् जम्मू कश्मीरयो उच्चन्यायालयस्य न्यायाधीश: नीलकंठ गज्जू महोदयम् गृहे प्रवेशित्वा हनित: तदापि राजीव गांधी प्रधानमंत्रिनासीत् ! १९८६ तमे कश्मीरोपद्रवमभवत्, यस्मात् शतानि कश्मीरी पंडिताः हनिता: तदापि राजीव गांधी प्रधानमंत्रिनासीत् !

टिक्का लाल टपलू जी के हत्या के बाद 4 नवंबर 1989 को जम्मू कश्मीर के हाईकोर्ट के जज नीलकंठ गज्जू जी को घर में घुसकर मार दिया गया तब भी राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे ! 1986 में कश्मीर दंगे हुए, जिससे सैकड़ों कश्मीरी पंडित मारे गए तब भी राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे !

पूर्ण बहुमत गृहीत्वा सत्तायां तिष्ठ: राजीव गांधिन् का येषु हननेषु त्यागपत्रम् दत्त: ? न ! का भवन्तः कश्चित एकापि धर्मनिरपेक्ष जनस्य लेखम् कांग्रेसम्, राजीव गांधिण: विरुद्धम् दर्शिता: यत् भाजपाम् बलात् यस्य उत्तरदायिन् कृत्वा स्वनाम पवित्रम् कुर्वन्ति !

पूर्ण बहुमत लेकर सत्ता में बैठे राजीव गांधी ने क्या इन हत्याओं पर इस्तीफा दिया ? नहीं ! क्या आपने किसी एक भी सेक्युलर आदमी का पोस्ट कांग्रेस, राजीव गांधी के खिलाफ देखा जो भाजपा को जबरदस्ती इसका जिम्मेदार ठहरा कर अपना नाम पवित्र कर रहे हैं !

मतम् तदा कांग्रेसमपि हिन्दुभिः इव लभन्ते पुनः इदं इयत् अघमुक्तं किमस्ति ? वीपी सिंह: देशस्य प्रधान मंत्रिन् भूत: २ दिसंबर १९८९ तमम् हिंदवः च् कश्मीर त्यक्त्वा पलायिता: १९ जनवरी १९८९ तमं अर्थतः यत् केचनाभवत् तस्मै केवलं एकमासम् पुरातन सर्वकारम् तं सर्वकारम् च् बाह्येण समर्थनम् दाता भाजपा जिम्मेवारमस्ति ! का वार्तास्ति ?

वोट तो कांग्रेस को भी हिन्दुओं से ही मिलते हैं फिर ये इतने पापमुक्त क्यों है ? वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने 2 दिसंबर 1989 को और हिंदू कश्मीर छोड़कर भागे 19 जनवरी 1989 को यानि जो कुछ हुआ उसके लिए सिर्फ एक महीने पुरानी सरकार और उस सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली भाजपा जिम्मेदार है ! क्या बात है ?

यत् पंचवर्षाणि पूर्णबहुमतेण राज्यं कृत्वा गतं पवित्रं अस्ति ! जगमोहन जम्मो: कश्मीरस्य च् द्वयदा राज्यपाल: रमित: ! प्रथमदा राजीव गांधिण: काळम् २६ अप्रैल १९८४ तः ११ जुलै १९८९ एव १९८७ तमे नेशनल कॉन्फ्रेंस कांग्रेसम् च् मेलित्वा निर्वाचनम् जये फारूक अब्दुल्ला च् सीएम भूत: !

जो पांच साल पूर्ण बहुमत से राज करके चले गए पाक साफ है ! जगमोहन जम्मू और कश्मीर के दो बार गवर्नर रहे ! पहली बार राजीव गांधी के समय 26 अप्रैल 1984 से 11 जुलाई 1989 तक
1987 में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस मिलकर चुनाव जीती और फारुक अब्दुल्ला सीएम बने !

१९९० जनवर्याम् वीपी सिंह सर्वकारः जगमोहनम् पुनः जम्मो कश्मीरस्य च् राज्यपाल: नियुक्त: १८ जनवरी १९९० तमम् च् फारूक अब्दुल्ला त्यागपत्रं दत्त: यदैव जगमोहन: श्रीनगर प्राप्त्वा कार्यभारम् नीत: अनाथ कश्मीरे १९ जनवरी रात्रि कश्मीरे पंडितेभ्यः अंतिम रात्रि सिद्धमभवत् !

1990 जनवरी में वीपी सिंह सरकार ने जगमोहन को वापस जम्मू और कश्मीर का गवर्नर नियुक्त किया और 18 जनवरी 1990 को फारुक अब्दुल्ला ने इस्तीफा दे दिया जब तक जगमोहन श्रीनगर पहुंच कर चार्ज संभालते अनाथ कश्मीर में 19 जनवरी की रात कश्मीर में पंडितों के लिए आखिरी रात साबित हुई !

३० वर्षाणि अनंतरम् ताः ज्ञापयन्ति, इति सर्वस्मै भाजपा जगमोहन: च् जिम्मेवारे स्त: वाह का वार्ता अस्ति, कुत्रचित ज्ञातमस्ति यै: केचनापि बदित्वा अल्पमति कर्तुं शक्नोन्ति ! तु एकवार्ता स्मरणधृतु यदा कश्मीरी पंडिता: सहाय्य याचने गुरु तेगबहादुरस्य पार्श्व गता: आसन् !

30 साल बाद वो बता रहे हैं,इस सबके लिए भाजपा और जगमोहन जिम्मेदार हैं वाह क्या बात है,क्योंकि पता है इन्हें कुछ भी बोलकर मूर्ख बनाया जा सकता है ! लेकिन एक बात याद रखिए जब कश्मीरी पंडित सहायता मांगने गुरुतेगबहादुर के पास गए थे !

तदा औरंगजेब इंदप्रस्थे ९ नवंबर १६७५ भातृ मती दास महोदयं, भाई सतीदासम्, भाई दयालाम् गुरु तेग बहादुर महोदयं च् इंदप्रस्थस्य चांदनी चौके जिहादी प्रकारेण हुतात्मा कृतः ! तदा न जगमोहन: राज्यपाल: आसीत् न वीपी सिंहस्य सर्वकारः आसीत् !

जब औरंगजेब ने दिल्ली में 09 नवम्बर 1675 भाई मती दास जी, भाई सतीदास, भाई दयाला और गुरु तेगबहादुर जी को दिल्ली के चांदनी चौक में जिहादी तरीके से शहीद किया गया ! तब न जगमोहन गवर्नर थे न वीपी सिंह की सरकार थी !

तु हन्तकानां विचारम् तैवासीत् ! भित्तिविवरम् यदि गिरिजा टिक्कू कर्तितं भातृ मती दास: वा, कर्तक: एकमेव विचारस्यासीत् स्वरणम् चस्यैव विचारम् विरुद्धमस्ति ! आमिदम् अवश्य सत्यमस्ति तत २६ जनवरी १९९२ तमम् श्रीनगरे ध्वजम् विधूनक: नरेंद्र मोदिनवश्याद्य देशस्य प्रधानमंत्रिनस्ति !

लेकिन मारने वालों की सोच वो ही थी ! आरे से चाहे गिरिजा टिक्कू काटी गई हों या भाई मती दास, काटने वाले एक ही सोच के थे और अपनी लड़ाई इसी सोच के खिलाफ है ! हां यह अवश्य सही है कि 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर में तिरंगा फहराने वाले नरेंद्र मोदी जरूर आज देश के प्रधानमंत्री है !

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