अस्माकमितिहासम् एता: वामपंथिनः मेलित्वा एतेषु ७० वर्षेषु भारतस्येतिहासस्य वास्तविकपृष्ठानि कीदृशं विदारिताः का का च् संयुक्ता: दर्शयतु ! हमारे इतिहास को इन वामपंथीयो ने मिलकर इन 70 सालों में भारत के इतिहास के असली पन्ने कैसे फाड़े और क्या क्या जोड़ा देखिये !

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भारतस्येतिहासम् सिंधु घाटी सभ्यतायारंभं न भवति अपितु सरयू तटतः आरंभयति यत्र महर्षि मनुम् स्व मनुष्यभूतस्य ज्ञानमभवत् मानव सभ्यतां च् विकसितं !

भारत का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू नही होता है बल्कि सरयू तट से शुरू होता है जहाँ महर्षि मनु को अपने मनुष्य होने का ज्ञान हुआ और मानव सभ्यता विकसित हुई !

रामायण महाभारत च् हिन्दुनां धर्मग्रन्थे भवितुं शक्नोति स्म शैक्षिक रूपेणेदं भारतस्येतिहासमस्ति, यै: पाठ्यक्रमे सम्मिलितं न कृतवान !

रामायण और महाभारत हिन्दुओ के धर्मग्रंथ हो सकते थे शैक्षिक रूप से ये भारत का इतिहास है, जिन्हें पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया !

सिंधम् अरबा: जेतुं अवश्यमासीत् यदि बप्पा रावल: तै: हनित्वा हनित्वा पलायित: अप्यासीत्, तु अर्बानां विजयं पाठ्यते बप्पा रावलम् च् कथानकानां आश्रये त्यजते !

सिंध को अरबो ने जीता अवश्य था मगर बप्पा रावल ने उन्हें मार मार कर भगाया भी था, मगर सिर्फ अरबो की विजय पढ़ाई जाती है और बप्पा रावल को कहानी किस्सों के भरोसे छोड़ दिया जाता है !

व्यवस्थायाः अनुसारम् सम्राट पोरस: सिकंदरम् अवरोधित: तर्हि इदम् पठनमावश्यकं नासीत् तु अलाउद्दीन खिलजी मंगोलान् अवरोधित: इदम् वार्ता स्मरणेन लिखितवन्तः !

व्यवस्था के अनुसार सम्राट पोरस ने सिकन्दर को रोका यह पढ़ाना आवश्यक नही था लेकिन अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों को रोका ये बात याद से लिखी गयी !

बर्बरात् औरंगजेब: एव प्रति नृपेभ्यः पृथकाध्यायम् अस्ति यद्यपि भारत गौरवयुक्त भारते केचन न !

बाबर से औरंगजेब तक हर बादशाह के लिये अलग अध्याय है जबकि भारत गौरव शाली भारत पर कुछ नही !

मुगलानां १७०७ एवस्य तर्हि इतिहासम् ज्ञापितं तु वृहतेव बुद्धिमताया तस्यानंतरम् सरलं १७५७ तमस्य प्लासी युद्धम् लेखित्वा आंग्लान् आनीत्तन ! इयत् शीघ्रता कासीत् महोदयः, किंचित १७३७ तमे पेशवा बाजीरावेण मुगलानां हननमपि पाठितुं ददातु !

मुगलों का 1707 तक का तो इतिहास बता दिया मगर बड़ी ही चतुराई से उसके बाद सीधे 1757 का प्लासी युद्ध लिखकर अंग्रेजो को ले आये ! इतनी जल्दी क्या थी जनाब, जरा 1737 में पेशवा बाजीराव द्वारा मुगलों की धुलाई भी पढ़ा देते !

१७५७ तमे मुगलसल्तनतस्य मराठा साम्राज्ये विलयं भवितमासीत् तु बलात् तस्य संपादनम् १८५७ तमे पाठ्यते ! १७५७ तः १८०३ मुगल मराठा साम्राज्यस्य आधीनम् रमितं १८०३ तः १८५७ च् आंग्लानां ! १७५७ तमस्यानंतरम् कश्चित मुगल सल्तनत: नासीत् !

1757 में मुगल सल्तनत का मराठा साम्राज्य में विलय हो गया था मगर जबरदस्ती उसका अंत 1857 में पढ़ाया जाता है ! 1757 से 1803 मुगल मराठा साम्राज्य के अधीन रहे और 1803 से 1857 अंग्रेजो के ! 1757 के बाद कोई मुगल सल्तनत नही थी !

पानीपते मराठानां पराजयं सम्यकस्ति तु इदम् तस्य अंतिम युद्धम् नासीत् ते पुनः उत्तिष्ठा: आंग्लानपि च् हनिता:, इदम् कदा पाठिष्यति ? केवलं पानीपत पाठितं कुत्रचित् संदेशमिदम् गच्छेत् तत हिंदवः प्रति युद्धम् पराजितमस्ति यद्यपि युद्धस्यानंतरम् महादजी सिंधिया अफगानानां बहु ताडितमासीत् !

पानीपत में मराठों की हार हुई ठीक है मगर ये उनका अंतिम युद्ध नही था वे दोबारा खड़े हुए और अंग्रेजो को भी धो दिया, ये कब पढ़ाओगे ? सिर्फ पानीपत पढ़ा दिया ताकि संदेश यह जाए कि हिन्दुओं ने हर युद्ध हारा है जबकि युद्ध के बाद महादजी सिंधिया ने अफगानों को जमकर कूटा था !

यति कर्गदा: बलबने, फिरोजशाह तुगलके बहलोल लोद्यां च् लेखने संपादितानि तेषु कर्गदेषु महादजी सिंधियायाः, नाना फडणवीसस्य तुकोजी होल्करस्य च् वर्णनम् भवनीयं स्म !

जितने कागज बलबन, फिरोजशाह तुगलक और बहलोल लोदी पर लिखने में बर्बाद किये उन कागजों पर महादजी सिंधिया, नाना फडणवीस और तुकोजी होल्कर का वर्णन होना चाहिए था !

भारत ब्रितेनस्य दास: न उपनिवेशमासीत् ! भारतं २०० न १२९ वर्षाणि ब्रितेनस्य समुहम् रमितं, (१८१८ तमे मराठा साम्राज्यस्य पतनतः १९४७ तमे कांग्रेसम् शासनमेव) !

भारत ब्रिटेन का गुलाम नही उपनिवेश था ! भारत 200 नहीं 129 वर्ष ब्रिटेन की कॉलोनी रहा, (1818 में मराठा साम्राज्य के पतन से 1947 में कांग्रेस शासन तक) !

आंग्ल मराठा युद्धानि १८५७ तमस्य क्रांतितः अपि वृहत्तरः आसन् अतएव तस्य विवरण पूर्वम् भवनीयं तु गोपितमस्ति कुत्रचितोल्लेखम् टीपू सुल्तानस्य कृतमासीत् !

आंग्ल मराठा युद्ध 1857 की क्रांति से भी बड़े थे इसलिए उनका विवरण पहले होना चाहिए मगर गायब है क्योंकि बखान टीपू सुल्तान का करना था !

१९४७ तमे द्वयो राष्ट्रयो उदयं नाभवतामपितु एकम् इवस्याभवत्, हिंदुस्थानम् सदिभिः उदितमस्ति सदैव च् रमिष्यति ! बहु धर्मनिरपेक्षमसि तर्हि द्वितीय आतंकी राष्ट्रस्य चिंतनम् करोतु, मानचित्रे केचनमेव दिवसस्यातिथिमस्ति !

1947 में 2 राष्ट्रों का उदय नही हुआ बल्कि एक ही का हुआ, हिंदुस्तान सदियों से उदित है और हमेशा रहेगा ! ज्यादा सेक्युलर हो तो दूसरे आतंकी राष्ट्र की चिंता करो, नक्शे पर कुछ ही दिन का मेहमान है !

१९६२ तमे भारतं चिनतः पराजितं तु १९६७ तमे चिनम् पराजितमपि, तत का पाठिष्यति, सामाजिक विज्ञाने एकम् पाठमागच्छति भारतं आतंक च् तेषु वृहत् वृहत् उद्धरणानि ज्ञाप्यते तु तस्य पश्चस्य इस्लामिक कारणम् न पाठ्यते !

1962 में भारत चीन से पराजित हुआ मगर 1967 में चीन को हराया भी, वो कौन पढ़ायेगा, सामाजिक विज्ञान में एक पाठ आता है भारत और आतंकवाद, उसमें बड़े बड़े उदाहरण बताए जाते है मगर उनके पीछे का इस्लामिक कारण नही पढ़ाया जाता है !

पूर्णतयः भारतभूम्या सह बहवः आघातम् कृतमस्ति कांग्रेसम् वामपंथिन् धर्मनिरपेक्षं राजनीतिक दलानि च् मेलित्वा, अस्माकं वंशानसत्येतिहासम् पाठित्वा स्वाभिमानशून्यस्य सुनियोजितं षड्यंत्रम् कृतवन्तः !

कुल मिलाकर भारत भूमि के साथ बहुत आघात किया है कोंग्रेस वामपंथी और सेकुलर राजनीतिक दलों ने मिलकर, हमारी पीढ़ियों को झूठा इतिहास पढ़ाकर स्वाभिमान शून्य करने का सुनियोजित षड्यंत्र किया गया !

७० वर्षाणि एव विद्यालयेषु असत्येतिहासम् पाठित्वा पाठित्वा हिन्दुनां त्र्यान् वंशान् स्वाभिमानशुन्यम् कृतवन्तः यस्य परिणाममद्य देशम् निर्वहति हिन्दू देशं धर्मेण स्वेतिहासेण च् अभिज्ञ: भवितं इदमेव च् उद्देश्यमासीत् कांग्रेसस्य वामपंथिनां !

70 वर्षो तक स्कूलों में झूठा इतिहास पढ़ा पढ़ा कर हिन्दुओं की तीन पीढ़ियों को स्वाभिमान शून्य कर दिया जिसका खामियाजा आज देश भुगत रहा है हिन्दू देश धर्म और अपने इतिहास से अनजान हो गया ओर यही उद्देश्य था कोंग्रेस वामपंथीयों का !

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