इस्लामे महिलानां अतिरिक्तं पुरुषेभ्यः धार्मिक मान्यताम् किंन ? इस्लाम में महिलाओं के अलावा पुरुषों के लिए धार्मिक मान्यता क्यों नहीं ?

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देशस्य प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए- हिंदम् शनिवासरम् कथितं तत मुस्लिम महिलानां हिजाब धारणं इस्लामी सिद्धांतानां एवं शरीयतस्य अनुरूपमनिवार्यमस्ति तथा इदृशेषु येनावरोधनम् भारतीय संविधानस्यानुच्छेदस्य २५ उल्लंघनमस्ति !

देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए- हिंद ने शनिवार को कहा कि मुस्लिम महिलाओं का हिजाब धारण करना इस्लामी सिद्धांतों एवं शरीयत के तहत अनिवार्य है तथा ऐसे में इसे रोकना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है !

मौलाना अरशद मदनिण: अध्यक्षतायां जमीयतस्य कार्यसमित्या: गोष्ठ्यां अल्पसंख्यकानां सुरक्षाम्, हिजाबेण संलग्नम् वर्तमानकलहम्, सामाजिक प्रकरणानि, आधुनिक शिक्षा, बालकेभ्यः बालिकाभिः च् विद्यालयस्य महाविद्यालस्य च्चम स्थापनाम् समाजसुधारस्य प्रकाराणि केचनान्य विषयेषु चर्चाम् कृतं !

मौलाना अरशद मदनी की अध्यक्षता में जमीयत की कार्य समिति की बैठक में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, हिजाब से जुड़े हालिया विवाद, सामाजिक मुद्दों, आधुनिक शिक्षा, लड़के और लड़कियों के लिए स्कूल और कॉलेज की स्थापना और समाज सुधार के तरीकों अथवा कुछ अन्य विषयों पर चर्चा की गई !

संगठनम् प्रत्येन निर्गत कथनस्यानुसारं, इति गोष्ठ्यां अरशद मदनी कथित: तत धर्मस्य नामनि कश्चितापि प्रकारस्य हिंसा स्वीकृतम् भवितुं न शक्नुतं ! धर्मस्य नामनि अनुसूया प्रसारकानां अस्माभिः विरोधम् करणीयं !

संगठन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इस बैठक में अरशद मदनी ने कहा कि धर्म के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती ! धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों का हमें विरोध करना चाहिए !

देशस्य वर्तमान स्थितिं निस्संदेहम् निराशापूर्णमस्ति ! तु अस्माभिः निराशस्यावश्यकताम् नास्ति ! कुत्रचित् इति देशे वृहत् संख्यायां न्यायप्रियं जनाः सन्ति याः संप्रदायिकतायाः, धार्मिकातिवादस्याल्पसंख्यकाभि: च् सह भवकं अन्यायस्य विरुद्धम् स्वरम् उत्थायन्ति !

देश की वर्तमान स्थिति निस्संदेह निराशाजनक है ! लेकिन हमें निराश होने की आवश्यकता नहीं है ! क्योंकि इस देश में बड़ी संख्या में न्यायप्रिय लोगों हैं जो सांप्रदायिकता, धार्मिक अतिवाद और अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं !

हिजाबेण संलग्नम् कलहस्य उल्लेख्यन् मदनी कथित: तत केचन जनाः असाधु धारणाम् कुर्वन्ति तत इस्लामे हिजाबस्यानिवार्यताम् नास्ति कुराने च् हिजाबस्योल्लेखम् नास्ति ! कुराने हदीसे च् हिजाबे च् इस्लामी दिशानिर्देशम् सन्ति तत शरीयतस्य अनुसारम् हिजाब इति अनिवार्यमस्ति !

हिजाब से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए मदनी ने कहा कि कुछ लोग गलत धारणा बना रहे हैं कि इस्लाम में हिजाब की अनिवार्यता नहीं है और कुरान में हिजाब का जिक्र नहीं है ! कुरान और हदीस में हिजाब पर इस्लामी दिशानिर्देश हैं कि शरीयत के अनुसार हिजाब अनिवार्य है !

सः बलम् दत्वा कथित: तत संविधानस्यानुच्छेद २५ इतस्यानुरूपम् अल्पसंख्यकानां स्वधार्मिक स्वतंत्रतायाः अधिकारम् ळब्धमस्ति ! मुस्लिम छात्रा: हिजाबधारणेन अवरोधनमनुच्छेद २५ इतस्य उल्लंघनमस्ति !

उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अल्पसंख्यकों को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार हासिल है ! मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने से रोकना अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है !

जमीयतायप्रश्नम् !

जमीयत के लिए प्रश्न !

सर्वान् धर्मान् स्वधार्मिक परंपरायाः पालनस्य अधिकारमस्ति तु केवलं महिलाभिः इव किं ? पुरुषेभ्यः अपि नियमानि भवितुं भविष्यति ! तु पुरुषेभ्यः भवन्तः नियमानि न निर्मिष्यन्ति कुत्रचित् तै: लवजिहाद इति कारितमस्ति !

सभी धर्मों को अपने धार्मिक रीतिरिवाजों के पालन का अधिकार है लेकिन केवल महिलाओं के लिए ही क्यों ? पुरुषों के लिए भी नियम होते होंगे ! मगर पुरुषों के लिए आप लोग यह नियम नहीं बनाएंगे क्योंकि उनसे लवजिहाद जो करवाना है !

येनकारणं नियमानि सर्वेभ्यः भवनीयं केवलं महिलाभिः इव न ! स्पष्टमस्ति यदीस्लामे पुरुषेषु धार्मिक मान्यतायाः आरोपणं कृतः तर्हि लवजिहाद यथा उन्माद कीदृशं करिष्यति भवतां वस्त्रै: भवतां परिचयं भविष्यति, पुनः सलीमतः सोहन: न भविष्यते, येनकारणं धार्मिकमान्यतायाः उद्धरण मा ददातु !

इसलिए नियम सबके लिए होने चाहिए केवल महिलाओं के लिए ही नहीं ! स्पष्ट है कि अगर इस्लाम में पुरुषों पर धार्मिक मान्यता का आरोपण किया तो लवजिहाद जैसे उन्माद कैसे करोगे ? आपके वस्त्रों के द्वारा आपकी पहचान हो जाएगी, फिर सलीम से सोहन नहीं हो पावोगे, इसलिए धार्मिक मान्यता का हवाला मत दो !

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