एलएसी इत्ये विवादितक्षेत्रे सेतुनिर्मितं चिनम्, भारतं व्यक्तं तीक्ष्णविरोधम्, कथितं अवैधाधिपत्यं कदापि न करिष्यति स्वीकारम् ! एलएसी पर विवादित क्षेत्र में पुल बना रहा चीन, भारत ने जताया कड़ा विरोध, कहा अवैध कब्‍जा कभी नहीं करेंगे स्‍वीकार !

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पूर्वी लद्दाखे वास्तविक नियंत्रण रेखायां भारतस्य चिनस्य च् मध्य कलहस्य स्थितिम् विगत एकार्द्ध वर्षेण निर्मितं ! चिनम् स्वनियंत्रकं सीमाक्षेत्रेषु सततं बुनियादीप्रारूपस्य विकासम् गृहीत्वा कार्यम् करोति तर्हि भारतमपि यस्मिन् पश्च नास्ति !

पूर्वी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बीते करीब डेढ़ साल से बनी हुई है ! चीन अपने नियंत्रण वाले सीमा क्षेत्रों में लगातार बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर काम कर रहा है तो भारत भी इसमें पीछे नहीं है !

भारतमपि विगत वर्षेषु सीमाक्षेत्रेषु बहु आधारभूत संरचनानां निर्माणम् कृतं, यत् सततं चिनस्य नेत्रेषु पीड़ाम् ददाति ! भारतं तत्र स्वसीमाक्षेत्रेषु बुनियादी प्रारूपस्य विकासम् करोति ! तत्रैव चिनम् विवादित क्षेत्रेषु अपीदृशैव गतिविध्य: कृतेन विरक्तं न भवितं !

भारत ने भी विगत वर्षों में सीमा क्षेत्रों में कई आधार भूत संरचनाओं का निर्माण किया है, जो लगातार चीन की आंखों में खटक रहा है ! भारत जहां अपने सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है ! वहीं चीन विवादित क्षेत्रों में भी ऐसी गतिविधियों को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहा !

यस्मिन् भारतं तीक्ष्णविरोधम् व्यक्तं स्पष्टम् च् कथितं तत चिनस्यावैधम् न तर्हि कदापि स्वीकृतं नैव च् भविष्ये इदृशं भविष्यति ! भारतसर्वकारस्येदम् प्रतिक्रिया चिनेण पूर्वी लद्दाखस्य पैंगोंग सरोवरे विवादित क्षेत्रे सेतुनिर्माणस्य कार्येषु आगतं !

जिस पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है और दो टूक कहा कि चीन के अवैध को न तो कभी स्‍वीकार किया गया और न ही भविष्‍य में ऐसा होगा ! भारत सरकार की यह प्रतिक्रिया चीन द्वारा पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील पर विवादित क्षेत्र में पुल निर्माण के कार्यों पर आई है !

सर्वकारम् प्रत्येन शुक्रवासरम् संसदे ज्ञापित: तत चिनम् पूर्वी लद्दाखे एलएसी इत्ये स्थितं पैंगोंग सरस्य येन अंशे सेतो: निर्माणम् करोति ! तत १९६२ तमेनैव बीजिंगस्यानाधिकृतमधिपत्ये अस्ति ! भारतसर्वकारः चिनस्येति अवैधाधिपत्यं न तर्हि कदापि स्वीकृतं नैव च् इदृशं करिष्यते !

सरकार की ओर से शुक्रवार को संसद में बताया गया कि चीन पूर्वी लद्दाख में LAC पर स्थित पैंगोंग झील के जिस हिस्‍से पर पुल का निर्माण कर रहा है ! वह 1962 से ही बीजिंग के गैर-कानूनी कब्जे में है ! भारत सरकार ने चीन के इस अवैध कब्‍जे को न तो कभी स्‍वीकार किया है और न ही ऐसा क‍िया जाएगा !

लोकसभायां एकस्य प्रश्नस्य लिखितोत्तरे विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन: स्पष्टम् कथित: ! पूर्वी लद्दाखे गतिरोधम् गृहीत्वा चिनेण सह वार्तालापम् त्रिषु प्रमुखसिद्धांतेषु आधारितमस्ति ! प्रथमेदम् तत द्वे पक्षे वास्तविक नियंत्रण रेखायाः पूर्णरूपेण सम्मानम् करिष्यत:, द्वितीय कश्चितापि पक्षम् यथास्थितिम् परिवर्तनस्य प्रयासम् न करिष्यत: !

लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने दो टूक कहा ! पूर्वी लद्दाख में गतिरोध को लेकर चीन के साथ बातचीत तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है ! पहला यह कि दोनों पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा का पूरी तरह से सम्मान करेंगे, दूसरा कोई भी पक्ष यथास्थिति बदलने का प्रयास नहीं करेगा !

तृतीय द्वे पक्षे सर्वयो अवगम्ययो पूर्णरूपेण पालनम् करिष्यत: ! विदेशमंत्रालयं प्रत्येन संसदे कथितं, भारतसर्वकारः बहु अवसरेषु स्पष्टम् कृतं तत केंद्र शासितप्रदेशम् जम्मू-कश्मीरम् लद्दाखम् च् भारतस्य अभिन्न अंगमस्ति ! वयं विश्वस्य देशभिः आशाम् कुर्यामः तततेभारतस्य संप्रभुतायाः क्षेत्रीयाखंडतायाः सम्मानम् कुर्वन्तु !

तीसरा दोनों पक्ष सभी समझौतों का पूरी तरह से पालन करेंगे ! विदेश मंत्रालय की ओर से संसद में कहा गया, भारत सरकार ने कई मौकों पर स्‍पष्‍ट किया है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख भारत के अभ‍िन्‍न अंग हैं ! हम दुनिया के देशों से उम्‍मीद करते हैं कि वे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्‍मान करें !

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