हिंदू बालकाः भवन्तु सतर्कम् ! कश्चित रक्षणाय न आगन्तुक: ! पठन्तु अवगम्यन्तु, अंतरस्पष्टमस्ति ! हिंदू बालक हो जाओ सावधान ! कोई बचाने के लिए नहीं आने वाला है ! पढ़िए और समझिए, अंतर स्पष्ट है !

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द्वे वार्ते प्रस्तुतं करोमि ! एकः यत् सर्वा: ज्ञायन्ति गोरक्षनाथमंदिरे घातक: आतंकिन् मुर्तजाब्बासम् प्रत्यां अस्ति यः केमिकल इंजीनियरिंग तः उच्चतम शिक्षाळब्धमस्ति बहु आतंकी संगठनै: संलिप्तताम् अस्ति !

दो खबरें पोस्ट कर रहा हूँ ! एक जो सभी जानते हैं गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाले आतंकी मुर्तजा अब्बास के बारे में है जो केमिकल इंजीनियरिंग से उच्चतम शिक्षा प्राप्त है कई आतंकी संगठनों से संलिप्तता है !

पुनश्चपि मुर्तजाब्बासस्य पिता, केचन राजनीतिक दळम् बहु धर्मनिर्पेक्षकाः च् तेन मानसिकरुग्ण: घोषिते संलग्ना: सन्ति ! इदम् गोरक्षनाथमंदिरे घातम् कृत्वा तिष्ठ: स्म तर्हि कारागारे सन्ति नैवाधुनैव स्वतंत्रतापत्रस्य व्यवस्थामपि निर्मितुं भवितं !

फिर भी मुर्तजा अब्बास के पिता, कुछ राजनीतिक दल और तमाम सेक्युलर उसे पागल घोषित करने में लगे हैं ! यह तो गोरखनाथ मंदिर पर हमला कर बैठे थे तो जेल में हैं नही तो अब तक बेल की व्यवस्था भी बन गयी होती !

यस्य समाजस्य जनाः तर्हि वा यै: सह सन्ति तर्हि वा मूकम् सन्ति कश्चित येषां कृत्यस्य निंदाम् कर्तुं न रमिताः ! द्वितीय अस्माकं ब्रह्मर्षिनगरस्य हिंदू युवा: सन्ति उत्साहसम्पन्ने केवलं केचन वार्ता: इदृशं लिखिताः यत् तेषां ग्रामस्य इमरानम् साधु नानुभूत: !

इनके समाज के लोग या तो इनके साथ हैं या तो चुपचाप हैं कोई इनके कृत्य की निंदा नही कर रहा ! दूसरा हमारे बहराइच के हिन्दू युवा हैं जोश खरोश में केवल कुछ बातें ऐसी लिख दीं जो उनके गांव के इमरान को नागंवार गुजरीं !

परिणामतः तः कारागारे सन्ति ! न तस्य पितरौ, न समाजम्, नैव कश्चित धार्मिक संगठनम्, नेता इत्यादयः तेषां पक्षे स्थितुं न दर्शिते ! कुत्रैव कश्चित पंडित महोदयस्य पक्षे केचन न बदिता: ! मयाशंकाम् अस्ति शुक्ल: महोदयस्य बहु धनम् मूल्यवान काळम् भविष्यं चस्यैव टिप्पणिकायां क्षतिग्रस्तं भविष्यति !

परिणामत: वो जेल में हैं ! न उनके माता पिता, न समाज, न ही कोई धार्मिक संगठन, नेता आदि उनके पक्ष में खड़े नही दिखाई पड़ रहे हैं ! कहीं किसी ने पंडित जी के पक्ष में चूं नही बोला ! हमें आशंका है शुक्ला जी का काफी धन कीमती समय और भविष्य इसी टिप्पणी पर खराब हो जायेगा !

संभवतः कश्चितस्य सहाय्य ळब्धं ! इदृशे वयं शुक्ल महोदयः यथा युवान् अवगम्यतुं इच्छामि तत भवन्तः उत्सा१हे ज्ञानम् मुक्तवा मुस्लिमपंथस्य युवान् भांति असाधु कृत्यानि न कुर्वन्तु !

मुश्किल ही है किसी का साथ मिले ! ऐसे में हम शुक्ला जी जैसे# युवाओं को समझाना चाहते हैं कि आप लोग जोश में होश खोकर मुस्लिम पंथ के युवाओं की तरह गलत हरकतें न करें !

भवतां धर्मे आतंकम्, टीका टिप्पणिका, कश्चितस्य हननम् कृते, कश्चित बालिकाम् कुचक्रम् कृत्वा पाणिग्रहणकृते, दुष्कर्मकृते कश्चितस्य भूम्यां बलात् अधिपत्यकृते भवतां समाजम् न भवतां पितरौ अपि भवद्भिः सह स्थितुं न भविष्यन्ति !

आपके धर्म में आतंकवाद, टीका टिप्पणी, किसी की हत्या करने, किसी लड़की को झांसा देकर विवाह करने, बलात्कार करने किसी की जमीन पर जबरन कब्जा करने पर आपका समाज छोड़िए आपके मां बाप भी आपके साथ खड़े नही होंगे !

भाजपायाः सर्वकारः अस्ति तर्हि मुस्लिम समाजे टिप्पणिका कुर्वन्तु तर्हि प्राथमिकी न भविष्यति इदृशं न ! संलग्न वार्ता प्रमाणमस्ति तत कारागार गमने विलंब न भविष्यति ! आम् यदि शुक्ल महोदयः भवान् हिंदू न भूत्वा मुस्लिम: भवित: तर्हि संलग्नम् द्वितीय वार्ता बहु चोदाहरणम् इति वार्तायाः प्रमाणितं कुर्वन्ति तत भवतः समाजस्य जनाः भवतः प्रत्येक अनृतकार्ये सहाय्य कृतवन्तः !

भाजपा की सरकार है तो मुस्लिम समाज पर टिप्पणी कर दीजिए तो एफ आइ आर नही होगी ऐसा नही ! संलग्न खबर प्रमाण है कि जेल जाने में देर नही लगेगी ! हां अगर शुक्ला जी आप हिन्दू न होकर मुसलमान होते तो संलग्न दूसरी खबर और तमाम उदाहरण इस बात की तस्दीक करते हैं कि आपके समाज के लोग आपकी हर गुनाह में मदद करते !

अतः निष्कर्ष स्वरूपमस्माकं प्रार्थना स्वसमाजस्य युवाभिः अस्ति तत सर्वकारस्य परिस्थितीनां ऊर्जायां विध्या: उल्लंघनम् कुर्वन्तु ! भवते विधिसम्मत जीवनमेव उचितमस्ति नैव स्थित्यां भवान् स्व भविष्यस्य स्वयं हन्तक: मानिष्यते !

अत: निष्कर्ष स्वरूप हमारी प्रार्थना अपने समाज के युवाओं से है कि सरकार और परिस्थितियों के जोश में कानून का उल्लंघन न करें ! आपके लिए कानून सम्मत जीवन ही उचित है अन्यथा की स्थिति में आप अपने भविष्य के स्वयं हत्यारे माने जायेंगे !

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