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श्व छत्रपति शिवाजी महाराज: आसीत् विपक्षेभ्यः पीड़ायाः कारणं अद्य च् योगी आदित्यनाथ: सन्ति पीड़ायाः कारणं ! कल छत्रपति शिवाजी महाराज थे विपक्षियों के लिए तकलीफ का कारण और आज योगी आदित्यनाथ हैं तकलीफ का कारण !

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इति धरायाः सर्वान् जीवित हिन्दून् छत्रपति शिवाजी महाराजस्य निधनस्यानंतरस्य मराठानां इतिहासम् अवश्यमेव पठनीयं ! हिंदवी स्वराजस्य निर्माता छत्रपति शिवाजी महाराजस्य मराठा साम्राज्यं इंदप्रस्थे तिष्ठ: शक्तिशालिन् मुगल सम्राट: औरंगजेबं बहु पिड्यति !

इस धरा के सभी जीवित हिंदुओ को छत्रपति शिवाजी महाराज के निधन के पश्चात का मराठों का इतिहास जरूर पढ़ना चाहिए ! हिंदवी स्वराज के निर्माता छत्रपति शिवाजी महाराज का मराठा साम्राज्य दिल्ली में बैठे शक्तिशाली मुगल सम्राट औरंगजेब को बहुत चुभता था !

तं मराठानां राज्यं संपादनाय स्वबहुना युद्धप्रवीणा: सरदारान् प्रेषितं स्म, तु सर्वाणि प्रयासम् विफल: जात: ! १६८० तमे स्वराजस्य राजधान्यां रायगढ़े शिवाजिण: निधनस्य वार्ता श्रुत्वा औरंगजेब: प्रसन्नम् जात: शक्तिसंचितं च् मराठानां व्यवस्थां कर्तुं स्वयं दख्खन गमनस्य निर्णयम् नीत: !

उसने मराठों का राज्य नष्ट करने के लिए अपने बहुत से युद्ध कुशल सरदारों को भेजा था, मगर सभी प्रयास विफल रहें ! 1680 में स्वराज की राजधानी रायगढ़ में शिवाजी का निधन होने का समाचार सुनकर औरंगजेब प्रसन्न हो गया और हिम्मत जुटा मराठों का बंदोबस्त करने के लिए खुद दख्खन जाने का फैसला लिया !

औरंगजेबम् भ्रम: आसीत् तत शिवाजिण: निधनेण सः त्वरित स्वकार्यम् पूर्णित्वा इंदप्रस्थम् पुनः आगमिष्यति ! मराठा स्वंत्रतायाः अद्भूतम् संग्रामम् १६८० तमस्यानंतरमारंभितं ! १६८१ तः १६८९ तमे धर्माय कृतवान बलिदानमेव छत्रपति संभाजी महाराजस्य नेतृत्वे !

औरंगजेब को गलतफहमी थी कि शिवाजी के नहीं रहने से वह तुरंत अपना काम निपटा कर दिल्ली वापस आ जायेगा ! मराठा आजादी का रोमांचक संग्राम 1680 के बाद शुरू हुआ ! 1681 से 1689 में धर्म के लिए किये बलिदान तक छत्रपति संभाजी महाराज के नेतृत्व में !

पुनः १७०० तमेव छत्रपति राजाराम महाराजस्य नेतृत्वे राजाराम महाराजस्य च् पश्चात तस्य भार्या महारानी ताराबाई इत्या: नेतृत्वे मराठा योद्धा: मुगल सैन्यतः समाघाता: ! औरंगजेबस्य दुर्ग्रहेण सततं २७ वर्षाणि एव मराठा: तस्मात् इदृशैव समाघाता: तत इंदप्रस्थतः द्रुतं, तं पुनः उत्तर हिंदुस्ताने पगम् धृतमपि दिष्टम् नाभवत् !

फिर 1700 तक छत्रपति राजाराम महाराज के नेतृत्व में और राजाराम महाराज के पश्चात उनकी धर्मपत्नी महारानी ताराबाई के नेतृत्व में मराठा वीरों ने मुगल सेना से टक्कर ली ! औरंगजेब के हठ से लगातार 27 वर्षों तक मराठे उनसे ऐसे टकराए कि दिल्ली तो दूर, उसको दोबारा उत्तर हिंदुस्तान में कदम रखना भी नसीब नहीं हुआ !

१७०७ तमे अंततः पीड़ितं भूत्वा महाराष्ट्रस्य अहमदनगरस्य पार्श्वमेव स्व स्वर्वेश्यानाहुतं अभवत् ! १६८० तमे शिवाजिण: अनंतरम् १७०७ तमेव लगभगम् २७ वर्षेषु बहु अवसरमागतवन्तः यदा औरंगजेबम् स्वस्वप्नपूर्णस्य भ्रम भवितुं रमित: कुत्रचित बहुधा तदा मराठा सैन्यानि नेतृत्वविहीनम् रमितानि !

1707 में आखिरकार थक हार कर महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास ही अपनी हूरों को बुलाना पड़ा ! 1680 में शिवाजी के बाद 1707 तक लगभग 27 वर्षों में कई मौके आये जब औरंगजेब को अपना सपना पूरा होने का भ्रम होता रहा क्योंकि कई बार तब मराठा सेनाएँ नेतृत्व विहीन रहीं !

तु मराठा सैनिका: तदापि रणितं ! ज्ञायन्ते इमे मराठा सैनिका: येनास्त्राणि गृहीत्वा रणिता: ततैकं अस्त्रम् कासीत् ? तेषां पार्श्व छत्रपति शिवाजी महाराजेण तेषु हृदयेषु जागृत: स्वराजस्य ज्योतिं आत्मविश्वासं चासन् !


लेकिन मराठा सैनिक तब भी लड़े ! जानते हैं ये मराठा सैनिक जिस हथियार को लेकर लड़े वह एक हथियार क्या था ? उनके पास छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा उनके दिलो में जगाई गई स्वराज की ज्योति और आत्मविश्वास था !

यंप्रकारं छत्रपति महाराज: मराठानां हृदये स्वराजस्य ज्योतिं जागृत: स्म, आम् तादृशैव केचन कालपुरुषा: हिंदू पुनर्जागरणस्य ज्योतिं प्रतिहिंदू हृदये जागृताः तं कालपुरुषमहम् योगी आदित्यनाथस्य नाम्ना ज्ञायामि !

जिस तरह छत्रपति महाराज ने मराठों के मन में स्वराज की ज्योति जगाई थी, ठीक वैसे ही कुछ कालपुरुषों ने हिंदु पुनर्जागरण की ज्योति हिंदू जन जन के हृदय में जगाई है और उस कालपुरुष को मैं योगी आदित्यनाथ के नाम से जानता हूँ !

तमैव प्रभावमस्ति तताद्योत्तरप्रदेश निर्वाचनकाळम् सिलिकॉन वैली अमेरिकायां योगी आदित्यनाथ महोदयस्य प्रचारायोत्तरप्रदेशस्य प्रवासिण: भारतीयाः लोकयान् रैली निःसृता: ! विश्वे प्रथमदा अभवत् तत कश्चित देशस्य कश्चित राज्यस्य मुख्यमंत्रिणे पूर्ण विश्वे कश्चित समाजम् समर्थनम् करोति !

उसी का असर है कि आज उत्तर प्रदेश चुनाव समय सिलिकॉन वैली अमेरिका में योगी आदित्यनाथ जी के प्रचार के लिए उत्तर प्रदेश के प्रवासी भारतीयों ने कार रैली निकाली ! दुनिया में पहली बार हुआ है कि किसी देश के किसी राज्य के मुख्यमंत्री के लिए पूरी दुनिया में कोई समाज समर्थन कर रहा है !

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