चिनस्य सर्वात् वृहदकुचक्रे वामदळम् अंशभू आसीत् ? वामदळम्-कांग्रेसम् किं पराजयमनुमन् ? चीन की सबसे बड़ी साजिश में लेफ्ट भागीदार था ? लेफ्ट-कांग्रेस ने क्यों टेके घुटने ?

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अस्माकं देशस्य केचन राजनीतिक दलानि खादितानि तर्हि हिन्दुस्तानस्य सन्ति तु स्व स्वार्थाय चिनस्य-पकिस्तानस्य गुणगानम् कुर्वन्ति अवरुद्ध द्वारस्य पश्च चिन यथा देशै: ज्ञप्ति कुर्वन्ति !

हमारे देश की कुछ राजनीतिक पार्टियां खाती तो हिंदुस्तान का हैं लेकिन अपने स्वार्थ के लिए चीन-पाकिस्तान का गुणगान करती हैं या बंद दरवाजे के पीछे चीन जैसे देशों से डील करती हैं !

एतानि राजनीतिक दलानां प्रयोजनम् देशहिते अस्ति न वा भवन्तः स्वयं ज्ञायन्ति ! इदृशमेव अवरुद्ध द्वारस्य पश्च गोपनीय ज्ञप्ति कर्तानि अधुनानावृत अपि भवन्ति ! पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले इतस्य पुस्तके यत् उद्घाटनमभवत् तानि अचंभित कर्तानि सन्ति !

इन राजनीतिक पार्टियों का मकसद देशहित है या नहीं आप खुद जानते हैं ! ऐसे ही बंद दरवाजे के पीछे गुप्त डील करने वाले अब बेनकाब भी हो रहे हैं ! पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले की किताब में जो खुलासे हुए हैं वो चौकाने वाले है !

गोखले: स्व पुस्तके अलिखत् तत भारतामेरिकायाः मध्य न्यूक्लियर ज्ञप्ति अवरोधाय चिनम् वामदलान् स्व अस्त्राणि निर्मितं ! अर्थतः चिनम् वामदळम् च् मेलित्वा अस्य ज्ञप्ति अवरोधितुम् इच्छन्ति स्म !

गोखले ने अपनी किताब में लिखा है कि भारत अमेरिका के बीच न्यूक्लियर डील को रोकने के लिए चीन ने वामदलों को अपना हथियार बनाया ! मतलब चीन और वामदल मिलकर इस डील को रोकना चाहते थे !

अधुना वाम दलानि येनानुचित कथ्यते संलग्ना: तु किंचित दिवस पूर्वमेव चिनस्य वेबिनार इत्ये वाम दलानां उपस्थिति आसीत् ! वाम दलानि इव न कांग्रेसस्य चिनस्य च् मध्यापि गोपनीय ज्ञप्तिम् प्रति भवन्तः ज्ञायतैव भविष्यन्ति !

अब लेफ्ट पार्टियां इसे गलत बताने में लगी है लेकिन चंद दिन पहले ही चीन के वेबिनार में लेफ्ट पार्टियों की मौजूदगी थी ! लेफ्ट पार्टियां ही नहीं कांग्रेस और चीन के बीच भी गुफ्त डील के बारे में आप जानते ही होंगे !

प्रश्नमस्ति का चिनस्य सर्वात् वृहद कुचक्रे वाम दळम् अंशभू आसीत् ? प्रश्नमेदमपि अस्ति तत चिनस्य चरण वंदनाय कांग्रेसं वामदळं च् पराजयमनुमना: !

सवाल है क्या चीन की सबसे बड़ी साजिश में लेफ्ट भागीदार था ? सवाल ये भी है कि चीन की चरण वंदना के लिए कांग्रेस और लेफ्ट ने घुटने टेक दिए !

पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले: वर्तमानैव प्रस्तुत स्व नव पुस्तके भारत-अमेरिका परमाणु ज्ञप्तिम् गृहीत्वा दृढ़कथनं कृतः तत यस्य विरोधाय चिनम् कम्युनिस्ट दलानां प्रयोगम् कृतमासीत् !

पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने हाल ही में रिलीज अपनी नई किताब में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर दावा किया है कि इसके विरोध के लिए चीन ने कम्युनिस्ट पार्टियों का इस्तेमाल किया था !

स्व नव पुस्तकम् द लॉन्ग गेम हाऊ द चाइनीज निगोशिएट विद इंडिया इत्ये गोखले: अलिखत् तत वर्षम् २००७-२००८ तमे भारतामेरिका न्यूक्लियर ज्ञप्त्या: काळम् तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंहस्य यूपीए सर्वकारे वाम दलानां प्रभावम् दर्शमानः !

अपनी नई किताब द लॉन्ग गेम हाऊ द चाइनीज निगोशिएट विद इंडिया में गोखले ने लिखा है कि साल 2007-2008 में भारत अमेरिका न्यूक्लियर डील के दौरान तत्कालीन पीएम डॉ मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार में लेफ्ट पार्टियों के प्रभाव को देखते हुए !

चिनम् सम्भवतः अमेरिकाम् प्रति भारतस्य प्रीतिम् प्रति तस्य भयस्य प्रयोगम् कृतं ! भारतस्य गृह राजनीत्यां चिनस्य हस्तक्षेपस्येदम् प्रथमोदाहरण अस्ति !

चीन ने शायद अमेरिका के प्रति भारत के झुकाव के बारे में उनके डर का इस्तेमाल किया ! भारत की घरेलू राजनीति में चीन के दखल का ये पहला उदाहरण है !

इत्येव न गोखले: स्वपुस्तके जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख: मसूद अजहरस्यापि उल्लेखित: तत कीदृशं चिनम् मसूदस्य प्रयोगम् कृतवान ! किंचित दिवस पूर्वमेव चिनस्य कम्युनिस्ट दलस्य शत वर्ष पूर्णे वेबिनार इत्ये वाम दलस्य बहु नेतारः सम्मिलिता: अभवन् स्म !

इतना ही नहीं गोखले ने अपनी किताब में जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर का भी जिक्र किया है कि कैसे चीन ने मसूद का इस्तेमाल किया है ! चंद दिन पहले ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सौ साल पूरे होने पर वेबिनार में लेफ्ट पार्टी के कई नेता शामिल हुए थे !

यस्मिन् भाजपा तीक्ष्णापत्तिमपि व्यक्तम् स्म ! वामैव न कांग्रेसमपि सदैव चिनम् प्रति नम्र रमति ! सोनिया गांध्या: राजीव गांधी फाउंडेशन इतम् चिनमोपहारम् दत्तुम् रमति !

इस पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति भी जताई थी ! लेफ्ट ही नहीं कांग्रेस भी हमेशा चीन के प्रति नरम रही है ! सोनिया गांधी के राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन डोनेशन देता रहा है !

इत्येव न २००१७-१८ तमे राहुल गांधिण: चिनी राजदूतेन सह गोपनीय गोष्ठ्याः वार्तापि संमुखम् आगतमासीत् ! विना सर्वकारम् ज्ञापित: राहुल: किं गोपनीय मेलनम् कृतः, इदं अद्यापि प्रश्नमेव निर्मितुम् अभवत् !

इतना ही नहीं 2017-18 में राहुल गांधी के चीनी राजदूत के साथ गुप्त मीटिंग की बात भी सामने आई थी ! बिना सरकार को बताए राहुल ने क्यों गुप्त मुलाकात की, ये आज भी सवाल ही बना हुआ है !

प्रश्नमस्ति यत् चिन पुनः पुनः भारतस्य विरुद्धम् कुचक्रम् रचयति तत चिनेण सहानुचित संबंधम् किं ? का देशस्य विरुद्धम् सर्वात् वृहद कुचक्रे वामदळम् कांग्रेसम् अंशभू सन्ति ? प्रश्नमेदमपि अस्ति तत चिनस्य अग्रम् वामदलानि कांग्रेसम् च् किं पराजयमनुमना: !

सवाल है जो चीन बार बार भारत के खिलाफ साजिश रचता रहा है उस चीन के साथ सांठगांठ क्यों ? क्या देश के खिलाफ सबसे बड़ी साजिश में वामदल और कांग्रेस भागीदार हैं ? सवाल ये भी है कि चीन के आगे लेफ्ट दलों और कांग्रेस ने क्यों घुटने टेके हैं ?

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