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Tuesday, November 30, 2021

एकम् हिन्दू भक्त इदृशमपि, घानाया: घनानंद: हिन्दू धर्मेण अभवत् स्म प्रभावितं, हिन्दू धर्मस्य अकरोत् स्म विस्तारं ! एक हिन्दू भक्त ऐसा भी, घाना के घनानंद हिन्दू धर्म से हुए थे प्रभावित, हिन्दू धर्म का किया था विस्तार !

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पश्चिमी अफ्रीकाया: घाना देश, यस्य अर्थम् एक योद्धक नृपः भवति, तत्रस्य निवासिमपि न केवलं हिन्दू धर्मम् मान्यति, अपितु भारतस्य भांति तैपि देवी देवानां विधिवत् पूजा अर्चनाम् कुर्वन्ति ! घानायाम् विगत ५० वर्षेभ्यः भगवतः गणपतिस्य भव्य पूजाम् मूर्ति विसर्जनस्य च् परम्पराम् भव्यते !

पश्चिमी अफ्रीका का घाना देश, जिसका अर्थ एक लड़ाकू राजा होता है, वहाँ के निवासी भी न सिर्फ हिन्दू धर्म को मानते हैं, अपितु भारत की तरह ही वे भी देवी देवताओं की विधिवत् पूजा अर्चना करते हैं ! घाना में पिछले 50 वर्षों से भगवान गणपति की भव्य पूजा और मूर्ति विसर्जन की परंपरा चली आ रही है !

साभार गूगल

अफ्रीकायाम् गणेश उत्सव मन्यतस्य परम्पराम् कुत्रात् आगतवान ? सः कासीत् येन भारतात् ८६५५ महाताल: द्रुतम् अफ्रीकायाम् हिन्दू धर्मस्य उद्घट्यते ? इति लेखे अहम् भवतः एतानि सर्वाणि प्रश्नानां उत्तरम् दास्यामि !

अफ्रीका में गणेश उत्सव मनाने की परम्परा कहाँ से आई ? वह कौन था जिसने भारत से 8,655 किलोमीटर दूर अफ्रीका में हिन्दू धर्म की अलख जगाई ? इस लेख में हम आपको इन्हीं सब सवालों के उत्तर देंगे !

कासीत् घानाया: घनानंद: ?

कौन थे घाना के घनानंद ?

साभार गूगल

अफ्रीकाया: प्रथम हिन्दू धर्म प्रचारक स्वामी घनानंद सरस्वती: एव सः धर्म प्रचारक आसीत्, यत् हिन्दू मूलस्य न भवतः अपि हिन्दू धर्मस्य स्वामी कथ्यते ! सः एव हिन्दूनां आस्था धार्मिक गौरवम् च् पश्चिम अफ्रीकी महाद्वीपस्य घाना देशे ज्योतिस्य इव प्रज्वलितम् प्रकाशितं च् अकरोत् !

अफ्रीका के प्रथम हिन्दू धर्म प्रचारक स्वामी घनानंद सरस्वती ही वह धर्म प्रचारक थे, जो हिन्दू मूल के न होते हुए भी हिन्दू धर्म के स्वामी कहलाए ! उन्होंने ही हिन्दुओं की आस्था और धार्मिक गौरव को पश्चिम अफ्रीकी महाद्वीप के घाना देश में ज्योति की भाँति प्रज्वलित और प्रकाशित किया !

घनानंदस्य जन्म घानाया: मध्य क्षेत्रे एक सेन्या बेराकू ग्रामे १२ सितंबर १९३७ तमम् अभवत् स्म ! सः एकम् स्वदेशी घानानिवासिन् कुटुम्बस्य सदस्यमासीत् ! तस्य पितरौ धर्मान्तरणम् कृत्वा ईसाईम् निर्मयत् स्म, तु घनानंद बहु न्यून उम्रेण एव ब्रह्मांडस्य रहस्येषु रुचि धारयति स्म अतएव च् सः प्रश्नानां उत्तरम् धार्मिक ग्रन्थेषु अन्वेषणम् प्रारम्भयते स्म !

घनानंद का जन्म घाना के मध्य क्षेत्र में एक सेन्या बेराकू गाँव में 12 सितंबर 1937 को हुआ था ! वह एक देशी घानावासी परिवार के सदस्य थे ! उनके माता-पिता धर्म परिवर्तन करके ईसाई बन गए थे, परंतु घनानंद बहुत कम उम्र से ही ब्रह्मांड के रहस्यों में रुचि रखते थे और इसीलिए उन्होंने अपने सवालों का जवाब धार्मिक ग्रंथों में ढूँढना शुरू किया था !

साभार गूगल

इति कालम् घनानंद: सिंधीनां सम्पर्के आगत: ! इयम् सिंधी जना: १९४७ तमे भारतस्य विभाजनस्य कालम् घानायाम् आगत्वा वसेयत् स्म ! वस्तुतः विभाजनस्य कालम् जनै: अकथ्यते स्म तत सः भारते पकिस्ताने च् कश्चितापि देशे न्यवसते ! तम् कालस्य परिस्थितिम् अवलोकित: हिन्दू धर्मेण सम्बन्ध धृतं सिंधी वंशस्य केचन कुटुंबानि न भारतम् स्व देशम् मान्यतु न पकिस्तानम्, अपितु तत् सिंधी कुटुंब दक्षिण अफ्रीकाया: घाना देशे गम्यते स्म !

इसी दौरान घनानंद सिंधियों के संपर्क में आए ! ये सिंधी जन 1947 में भारत के विभाजन के समय घाना में आकर बस गए थे ! दरअसल विभाजन के दौरान लोगों से कहा गया था कि वह भारत और पाकिस्तान में किसी भी देश में रह सकते हैं ! उस समय के हालात देखते हुए हिन्दू धर्म से संबंध रखने वाले सिंधी वंश के कुछ परिवारों ने न भारत को अपना देश माना और न पाकिस्तान को, अपितु वह सिंधी परिवार दक्षिण अफ्रीका के घाना देश में चले गए थे !

घाना भारतात् ५ मास पूर्वेव ६ मार्च १९४७ तमेव आंग्ल शासकस्य दासतास्य बन्धनम् कर्तयते स्म ! अफ्रीकी जनाः सिंधी परिवारस्य जनानां हृदयेन स्वागतम् अकरोत् तानि च् घानायाम् निवसस्य आदेशम् अददात् ! तदात् प्रथमदा अफ्रीकाया: निवासीनां हिन्दू धर्मेण परिचयम् अभवत् ! शनैः शनैः हिन्दू धर्म घानाया: जनेषु प्रचलितम् भव्यते !

घाना भारत से 5 महीने पहले ही 6 मार्च 1947 को ही अंग्रेजी हुकूमत की ग़ुलामी की बेड़ियाँ काट चुका था ! अफ्रीकी लोगों ने सिंधी परिवार के लोगों का दिल से स्वागत किया और उन्हें घाना में रहने की मंजूरी दी ! तभी से पहली बार अफ्रीका के निवासियों का हिन्दू धर्म से परिचय हुआ ! धीरे धीरे हिन्दू धर्म घाना के लोगों में प्रचलित होने लगा !

घनानंदस्य उम्र तम् कालम् केवलं १० वर्षमासीत् ! सः न्यून उम्रात् इव हिन्दू धर्मे रुचिम् लीयते स्म ! हिन्दू धर्मेण आकर्षितम् घनानंद:, भगवतस्य पूजायाम् अर्चनायाम् कालम् यापयते ! अत्रात् अफ्रीकायाम् हिन्दू धर्मस्य देवी देवानां पूजाया: प्रचलनम् प्रारम्भयते ! शनैः शनैः घानायाम् सर्वाणि देवी देवः गणेश:, शिवौ भगवतः श्री कृष्ण: च् इत्यदयः पूज्यंते !

घनानंद की उम्र उस समय मात्र 10 वर्ष थी ! वह छोटी-सी उम्र से ही हिन्दू धर्म में रुचि लेने लगे थे ! हिन्दू धर्म से आकर्षित घनानंद, भगवान की पूजा-अर्चना में समय बिताने लगे ! यहीं से अफ्रीका में हिन्दू धर्म के देवी देवताओं की पूजा का प्रचलन शुरू हुआ ! धीरे धीरे घाना में सभी देवी देवता गणेश, शिव पार्वती और भगवान श्री कृष्ण आदि पूजे जाने लगे !

साभार गूगल

प्रथम अफ्रीकी हिन्दू मठस्य स्थापनां !

प्रथम अफ्रीकी हिन्दू मठ की स्थापना !

१९६२ तमे केवलं २५ वर्षस्य अवस्थायाम् स्वामी घनानंद: घानाया: राजधानी अकरा इति गम्यते ! २४ नवम्बरम् स्वामी घनानंद: डिवाइन मिस्टिक पाथ संस्थाया: गठनम् कृत्वा ईश्वर भक्तिषु लीनम् भव्यते, तु तस्य हृदयम् सदैव हिन्दू धर्मस्य गहनतानि ज्ञाताय व्याकुलयति स्म !

1962 में मात्र 25 वर्ष की आयु में स्वामी घनानंद घाना की राजधानी अकरा चले गए ! 24 नवंबर को स्वामी घनानंद डिवाइन मिस्टिक पाथ सोसाइटी का गठन करके ईश्वर भक्ति में लीन हो गए, परंतु उनका मन सदैव हिन्दू धर्म की गहराइयों को जानने के लिए व्याकुल रहता था !

हिन्दू धर्मम् प्रति उपनतिस्य कारणम् स्वामी घनानंद: सदैव हिन्दू धर्मस्य रहस्यानाम् अन्वेषणे निरतति स्म एक दिवस च् हिन्दू धर्मेण संलग्न स्व प्रश्नानां उत्तर प्राप्ताय सः उत्तर भारत अगच्छते ! घनानंद: १९७५ तमे हिमालयस्य प्रान्तरे स्थित ऋषिकेशस्य डिवाइन लाइफ संस्थेन सह प्राप्त्वा हिन्दू जीवन पद्धतिस्य (सनातन धर्म) पत्राचार पाठ्यक्रमम् प्रारम्भयते !

हिन्दू धर्म की ओर झुकाव के कारण स्वामी घनानंद सदैव हिन्दू धर्म के रहस्यों की खोज़ में लगे रहते थे और एक दिन हिन्दू धर्म से जुड़े अपने प्रश्नों का उत्तर पाने के लिए वह उत्तर भारत चले गए ! घनानंद ने 1975 में हिमालय की तलहटी में स्थित ऋषिकेश के डिवाइन लाइफ सोसाइटी के साथ मिल कर हिन्दू जीवन पद्धति (सनातन धर्म) का पत्राचार पाठ्यक्रम शुरू किया !

इति कालम् प्रथमदा घनानंदस्य सम्पर्क भारतस्य स्वामी कृष्णानंदेन अभवत् ! स्वामी कृष्णानंदस्य व्यक्तित्वेन इति प्रभावितं अभवत् तत तस्य शिष्यम् निर्मयत् ! स्वामी कृष्णानंद: स्वामीस्य रूपे घनानंदम् दीक्षाम् अददात् !

इसी दौरान पहली बार घनानंद की मुलाकात भारत के स्वामी कृष्णानंद से हुई ! स्वामी कृष्णानंद के व्यक्तित्व से घनानंद इतने प्रभावित हुए कि उनके शिष्य बन गए ! स्वामी कृष्णानंद ने स्वामी के रूप में घनानंद को दीक्षा दी !

दीक्षाया: उपरांत घनानंद: घाना पुनरागच्छत् ! घानायाम् स्वामी घनानंद सरस्वती: पंच नव मन्दिरानां स्थापनां अकरोत्, यत् एएचएम इत्यस्य आधारशिलाम् अबनत् ! स्वामी घनानंद सरस्वती: १९७५ तमे अफ्रीकाया: घानायाम् प्रथम अफ्रीकी हिन्दू मठस्य स्थापनां अकरोत् स्म !

दीक्षा के बाद घनानंद घाना लौट आए ! घाना में स्वामी घनानंद सरस्वती ने पाँच नए मंदिरों की स्थापना की, जो एएचएम की आधारशिला बने ! स्वामी घनानंद सरस्वती ने 1975 में अफ्रीका के घाना में पहले अफ्रीकी हिन्दू मठ की स्थापना की थी !

हिन्दू धर्मस्य महान प्रचारकं धर्मगुरु च् स्वामी घनानंद: १८ जनवरी २०१६ तमम् विश्वस्य विदाम् कथ्यते ! ७८ वर्षीय स्वामी घनानंदेन प्रचारित हिन्दू मान्यतानि अद्यापि घानायाम् प्रचलितमस्ति ! दश सहस्रेण अधिकम् घाना निवासिन् हिन्दू धर्मस्य पालनम् कुर्वन्ति, येषु अधिकांशतः स्वैच्छिक धर्मान्तरितं सन्ति! घानाया: राजधानी अकरायाम् भगवतः शिवस्य सर्वात् वृहद मन्दिरमस्ति, यत्र प्रत्येक वर्षम् गणेश चतुर्थी, रथ यात्रा अन्य च् हिन्दू उत्सवम् मन्यते !

हिन्दू धर्म के महान प्रचारक और धर्मगुरू स्वामी घनानंद 18 जनवरी 2016 को दुनिया को अलविदा कह गए ! 78 वर्षीय स्वामी घनानंद द्वारा प्रचारित हिन्दू मान्यताएँ आज भी घाना में प्रचलित हैं ! 10,000 से अधिक घानावासी हिन्दू धर्म का पालन करते हैं, जिनमें अधिकांश स्वैच्छिक धर्मान्तरित हैं ! घाना की राजधानी अकरा में भगवान शिव का सबसे बड़ा मंदिर है, जहाँ हर वर्ष गणेश चतुर्थी, रथ यात्रा, और अन्य हिन्दू त्योहार मनाए जाते हैं !

प्रत्येक वर्ष गणेश चतुर्थयाः दिवसं घानाया: निवासिन् घानायाम् निवासितं हिन्दू समुदायस्य जनः अपिच् गणेश स्थापनाम् कुर्वन्ति ! अस्य उपरांत त्रय दिवसैव भगवतः गणेशस्य पूजाया: क्रियते गणेश मूर्तिम् च् समुद्रे विसर्जितं क्रियते च् ! अत्रस्य जनानां मान्यतामस्ति तत उदधि प्रत्येक स्थानं भवन्ति भगवतः गणेश च् उदधिस्य माध्यमेन सर्वेषु स्व कृपाम् स्थैर्यिष्यति !

हर वर्ष गणेश चतुर्थी के दिन घाना के निवासी और घाना में रहने वाले हिन्दू समुदाय के लोग भी गणेश स्थापना करते हैं ! इसके बाद तीन दिन तक भगवान गणेश की पूजा की जाती है और गणेश मूर्ति को समुद्र में विसर्जित कर दिया जाता है ! यहाँ के लोगों की मान्यता है कि समुद्र हर जगह होते हैं और भगवान गणेश समुद्र के माध्यम से सभी पर अपनी कृपा बनाए रखेंगे !

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