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किं यथार्थतः ब्राह्मणा: दलितानां शोषण इति कृतवन्तः वामपंथिनां कुचक्रम् तु न ? क्या वाकई ब्राह्मणों ने दलितों का शोषण किया या वामपंथियों की चाल तो नहीं ?

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५००० वर्षाणि पूर्वम् ब्राह्मणा: अस्माकं बहु शोषण कृतवन्तः ब्राह्मणा: अस्माभिः पठनेण अवरुध्दयन्, अयम् वार्ता ज्ञापकाः प्रसिद्ध इतिहासकर्ता: अयम् न ज्ञापयन्ति तत १०० वर्षाणि पूर्वम् आंग्लकाः अस्माभिः सह किं कृतवन्तः ! ५०० वर्षाणि पूर्वम् मुगल नृपा: किं कृतवन्तः !

5000 साल पहले ब्राह्मणों ने हमारा बहुत शोषण किया ब्राह्मणों ने हमें पढ़ने से रोका, यह बात बताने वाले महान इतिहासकार यह नहीं बताते कि 100 साल पहले अंग्रेजो ने हमारे साथ क्या किया ! 500 साल पहले मुगल बादशाहों ने क्या किया !

अस्माकं देशे शिक्षा नासीत् तु १८९७ तमे शिवकर बापूजी तलपड़े वायुयान रचित्वौड्डयत् मुम्बै यं दर्शितुं तत कालस्योच्चन्यायालयस्य न्यायाधीश: गोविंद रानाडे इत्या मुम्बै च् एकः नृप: महाराज गायकवाडेन सह-सह सहस्राणि जनाः उपस्थिता: आसन् !

हमारे देश में शिक्षा नहीं थी लेकिन 1897 में शिवकर बापूजी तलपडे ने हवाई जहाज बनाकर उड़ाया था मुंबई में जिसको देखने के लिए उस टाइम के हाई कोर्ट के जज महा गोविंद रानाडे और मुंबई के एक राजा महाराज गायकवाड के साथ-साथ हजारों लोग मौजूद थे !

तस्यानंतरम् एकं डेली ब्रदर नाम्नः इंग्लैंडस्य कंपनी शिवकर बापू जी तलपड़े इत्या सह संधि कृतवाननंतरे च् बापू महोदयस्य मृत्यु अभवत् अयम् मृत्यु अपि एकः षड्यंत्र: हनन कृतवान् पुनः चनंतरे १९०३ तमे राइट बंधु विमान रचवन्तौ !

उसके बाद एक डेली ब्रदर नाम की इंग्लैंड की कंपनी ने शिवकर बापूजी तलपडे के साथ समझौता किया और बाद में बापू जी की मृत्यु हो गई यह मृत्यु भी एक षड्यंत्र है हत्या कर दी गई और फिर बाद में 1903 में राइट बंधु ने जहाज बनाया !

भवतः ज्ञापयतु तताद्यतः सहस्राणि वर्षाणि पूर्वस्य पुस्तकमस्ति महर्षि भारद्वाजस्य विमान शास्त्रम् यस्मिन् ५०० विमान ५०० प्रकारतः रचस्य विधि अस्ति तैव पठित्वा शिवकर बापूजी तलपड़े विमान रचित: आसीत् !

आप लोगों को बता दे कि आज से हजारों साल पहले की किताब है महर्षि भारद्वाज की विमान शास्त्र जिसमें 500 जहाज 500 प्रकार से बनाने की विधि है उसी को पढ़कर शिवकर बापूजी तलपडे ने जहाज बनाई थी !

तु इदम् तथाकथित नास्तिक व्यभिचारिन: आंग्लकाः मध्यगाः ये सन्ति वयं सर्वानां मध्यतः ते अस्माभिः ज्ञापयन्ति तत भारते कश्चित शिक्षा एव नासीत् कश्चित कार्याणि नासीत् ! अमेरिकायाः प्रथम राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन: १४ दिसंबर १७९९ तममागतवान् स्म !

लेकिन यह तथाकथित नास्तिक लंपट ईसाइयों के दलाल जो है हम सबके ही बीच से वे हमें बताते हैं कि भारत में तो कोई शिक्षा ही नहीं था कोई रोजगार नहीं था ! अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन 14 दिसंबर 1799 को आये थे !

शीतस्य ज्वरस्य च् कारणेण सः पीड़ित: आसीत् तस्य पार्श्व ज्वरस्यौषधि नासीत् ! तत काळम् भारते प्लास्टिक सर्जरी भवति स्म आंग्ला: च् प्लास्टिक सर्जरी शिक्षयन्ते स्म अस्माकं गुरुकुले अधुना केचन वामपंथिनः व्यभिचारिनः बदिष्यन्ति इदम् पूर्णतयासत्यं !

सर्दी और बुखार की वजह से वह पीड़ित थे उनके पास बुखार की दवा नहीं थी ! उस टाइम भारत में प्लास्टिक सर्जरी होती थी और अंग्रेज प्लास्टिक सर्जरी सीख रहे थे हमारे गुरुकुल में अब कुछ वामपंथी लंपट बोलेंगे यह सरासर झूठ है !

तैव वामपंथिनः व्याभिचारिनः समुहम् कर्तुं शक्नोति ! आस्ट्रेलियन कॉलेज ऑफ सर्जन मेलबर्ने ऋषि सुश्रुतस्य प्रतिमा फादर ऑफ सर्जरी इति नाम्ना सह स्थापितमस्ति !

वही वामपंथी लंपट गिरोह कर सकते है ! ऑस्ट्रेलियन कॉलेज ऑफ सर्जन मेलबर्न में ऋषि सुश्रुत की प्रतिमा फादर ऑफ सर्जरी टाइटल के साथ स्थापित है !

महर्षि सुश्रुत शल्य चिकित्सा विज्ञानमर्थतः सर्जरी इत्या: जनक: विश्वस्य वा प्रथम शल्य चिकित्सक: (सर्जन) मान्यते ! सः शल्यकर्मे (ऑपरेशन) दक्ष: आसीत् ! महर्षि सुश्रुतेण विरचितं सुश्रुतसंहिता ग्रन्थे शल्यचिकित्साम् प्रति बहु महत् ज्ञानम् विस्तारेण ज्ञाप्तवान् !

महर्षि सुश्रुत शल्य चिकित्सा विज्ञान यानी सर्जरी के जनक व दुनिया के पहले शल्यचिकित्सक (सर्जन) माने जाते हैं ! वे शल्यकर्म (आपरेशन) में दक्ष थे ! महर्षि सुश्रुत द्वारा लिखी गई सुश्रुतसंहिता ग्रंथ में शल्य चिकित्सा के बारे में कई अहम ज्ञान विस्तार से बताया है !

यस्मिन् सुचिका, छुरिका चिमटा यथा वानुमानतः १२५ तः अपि अधिकं शल्य चिकित्सायां आवश्यकी उपकरणानां नाम ३०० प्रकारस्य च् शल्यक्रिया: तस्य पूर्वस्य च् कृतं तत्परता: प्रति पूर्णाभिज्ञानम् ज्ञापितमस्ति !

इनमें सुई, चाकू व चिमटे जैसे तकरीबन 125 से भी ज्यादा शल्यचिकित्सा में जरूरी औजारों के नाम और 300 तरह की शल्यक्रियाओं व उसके पहले की जाने वाली तैयारियों, जैसे उपकरण उबालना आदि के बारे में पूरी जानकारी बताई गई है !

यद्यपि आधुनिक विज्ञानम् शल्यक्रियायाः अनुसंधानमनुमानतः चत्वारः सद्य: पूर्वमेव कृतमस्ति ! मान्यते तत महर्षि सुश्रुत मोतियाबिंद, पथरी, अस्थिभंग यथा पीड़ानां उपचाराय शल्यकर्म कृते दक्ष: आसीत् ! इदमेव न सः त्वचा परिवर्तनस्य शल्यचिकित्सापि करोति स्म !

जबकि आधुनिक विज्ञान ने शल्य क्रिया की खोज तकरीबन चार सदी पहले ही की है ! माना जाता है कि महर्षि सुश्रुत मोतियाबिंद, पथरी, हड्डी टूटना जैसे पीड़ाओं के उपचार के लिए शल्यकर्म करने में माहिर थे ! यही नहीं वे त्वचा बदलने की शल्यचिकित्सा भी करते थे !

भास्कराचार्य: आधुनिक युगे धरायाः गुरुत्वाकर्षण शक्त्या: अनुसंधानस्य श्रेय न्यूटनं दीयते ! तु बहु न्यून जना: ज्ञायन्ति तत गुरुत्वाकर्षणस्य रहस्यं न्यूटनतः अपि बहवः सद्य: पूर्वम् भास्कराचार्य महोदयः उदघाट्यत् !

भास्कराचार्य आधुनिक युग में धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति (पदार्थों को अपनी ओर खींचने की शक्ति) की खोज का श्रेय न्यूटन को दिया जाता है ! किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण का रहस्य न्यूटन से भी कई सदियों पहले भास्कराचार्यजी ने उजागर किया !

भास्कराचार्य महोदयः स्व सिद्धांतशिरोमणि ग्रंथे पृथ्व्या: गुरुत्वाकर्षणम् प्रति अलिखत् तत पृथ्वी खमीय पदार्थान् विशिष्ट शक्त्या स्वम् प्रति आकर्षयति ! येन कारणेन खमीय पदार्थ पृथ्व्यां पतति !

भास्कराचार्यजी ने अपने सिद्धांतशिरोमणि ग्रंथ में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बारे में लिखा है कि पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खींचती है ! इस वजह से आसमानी पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है !

आचार्य कणाद: परमाणो: अवधारणायाः जनक: मान्यते ! आधुनिक काले अणु विज्ञानी जॉन डॉल्टनस्यापि सहस्राणि वर्षाणि पूर्वम् महर्षि कणाद: इदम् रहस्यमुद्घाट्यत् तत द्रव्यस्य परमाणु भवन्ति !

आचार्य कणाद परमाणु की अवधारणा के जनक माने जाते हैं ! आधुनिक दौर में अणु विज्ञानी जॉन डाल्टन के भी हजारों साल पहले महर्षि कणाद ने यह रहस्य उजागर किया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं !

तस्यानासक्त जीवनम् प्रतीदम् रोचक मान्यतापि अस्ति तत कश्चित कार्येण बहिः गच्छति तु पुनः गृहागमन काळम् मार्गेषु पतितं वस्तुनां अन्नस्य कणानि संचित्वा स्व जीवनम् यापयति स्म ! अतएव तस्य नाम कणाद: अपि प्रसिद्ध: अभवत् !

उनके अनासक्त जीवन के बारे में यह रोचक मान्यता भी है कि किसी काम से बाहर जाते तो घर लौटते वक्त रास्तों में पड़ी चीजों या अन्न के कणों को बटोरकर अपना जीवनयापन करते थे ! इसीलिए उनका नाम कणाद भी प्रसिद्ध हुआ !

गर्गमुनि नक्षत्राणां अनुसंधानकर्ता मान्यते, अर्थतः नक्षत्राणां लोकस्य ज्ञेत: ! अयम् गर्गमुनि आसीत्, यः श्रीकृष्णमर्जुनम् प्रति नक्षत्र विज्ञानस्याधारे यत् किञ्चितापि ज्ञाप्तवान्, तत पूर्णरूपम् सम्यक् सिद्धमभवत् ! कौरवाणां- पांडवाणां मध्य महाभारत युद्ध: विनाशक: रमति !

गर्गमुनि नक्षत्रों के खोजकर्ता माने जाते हैं, यानी सितारों की दुनिया के जानकार ! ये गर्गमुनि ही थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के बारे में नक्षत्र विज्ञान के आधार पर जो कुछ भी बताया, वह पूरी तरह सही साबित हुआ ! कौरव-पांडवों के बीच महाभारत युद्ध विनाशक रहा है !

यस्य पश्च कारणमिदमासीत् तत युद्धस्य पूर्वम् पक्षे तिथि क्षय भूतस्य त्र्योदशानि दिवसं अमा आसीत् ! यस्य द्वितीय पक्षे अपि तिथि क्षयम् आसीत् ! पूर्णिमा चतुर्दशानि दिवसं आगतवान् तैव दिवसं च् चंद्रग्रहणमासीत् ! तिथिनां- नक्षत्राणां इदमेव स्थितिम् परिणाम वा गर्गमुनि महोदयः पूर्वम् ज्ञापितरासीत् !

इसके पीछे वजह यह थी कि युद्ध के पहले पक्ष में तिथि क्षय होने के तेरहवें दिन अमावस थी ! इसके दूसरे पक्ष में भी तिथि क्षय थी ! पूर्णिमा चौदहवें दिन आ गई और उसी दिन चंद्रग्रहण था ! तिथि-नक्षत्रों की यही स्थिति व नतीजे गर्ग मुनिजी ने पहले बता दिए थे !

चरकसंहिता यथा महतायुर्वेद ग्रंथम् रचियता आचार्य चरक: आयुर्वेद विशेषज्ञ: त्वचा चिकित्सक: वापि ज्ञाप्तवान् ! आचार्य चरक: शरीरविज्ञानम्, गर्भविज्ञानम्, औषधिविज्ञानम् प्रति गहनानुसंधानम् कृतवान्, अद्यस्य काळम् सर्वातधिकं भूतामानां यथा डायबिटीज, हृदय रोग क्षय रोग इत्यानां वा निदानस्योपचारस्य अभिज्ञानम् वर्षाणि पुरमेवोद्घाटितं कृतवान् !

चरकसंहिता जैसा महत्वपूर्ण आयुर्वेद ग्रंथ रचने वाले आचार्य चरक आयुर्वेद विशेषज्ञ व त्वचा चिकित्सक भी बताए गए हैं ! आचार्य चरक ने शरीर विज्ञान, गर्भविज्ञान, औषधि विज्ञान के बारे में गहन खोज की ! आज के दौर में सबसे ज्यादा होने वाली बीमारियों जैसे डायबिटीज, हृदय रोग व क्षय रोग के निदान व उपचार की जानकारी बरसों पहले ही उजागर कर दी !

आधुनिक काले प्राणघातका: आमेषु एकस्य कैंसर इत्या: कर्करोग इत्या: वाद्योपचार: संभव: अस्ति ! तु बहवः सद्य: पूर्वमेव ऋषि पतंजलि: कैंसर इतमपि अवरोधकं योगशास्त्रम् रचित्वा ज्ञाप्तवान् तत योगतः कैंसर इत्या: अपि उपचार: संभव: अस्ति !

आधुनिक दौर में जानलेवा बीमारियों में एक कैंसर या कर्करोग का आज उपचार संभव है ! किंतु कई सदियों पहले ही ऋषि पतंजलि ने कैंसर को भी रोकने वाला योगशास्त्र रचकर बताया कि योग से कैंसर का भी उपचार संभव है !

बौद्धयन: भारतीय त्रिकोणमितिज्ञस्य रूपे ज्ञायते ! बहवः सद्य: पूर्वमेव भिन्न-भिन्न आकारस्य-प्रकारस्य यज्ञवेद्य: निर्माणस्य त्रिकोणमितिय रचना-पद्धति अन्वेषणत् !

बौद्धयन भारतीय त्रिकोणमितिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं ! कई सदियों पहले ही तरह-तरह आकार-प्रकार की यज्ञवेदियां बनाने की त्रिकोणमितिय रचना-पद्धति खोजी !

द्वे समकोण समभुज चौकोरस्य क्षेत्रफलानां योग कृते यत् संख्यागमिष्यति, उति क्षेत्रफलस्य समकोण समभुज चौकोर: रचितुं तस्याकृत्या: तस्य क्षेत्रफलम् समम् वृत्ते परिवर्तितुं च्, अस्य प्रकारस्य बहूनां काठिन्य प्रश्नानां उत्तरम् बौद्धयन: सरलम् कृतवान् !

दो समकोण समभुज चौकोन के क्षेत्रफलों का योग करने पर जो संख्या आएगी, उतने क्षेत्रफल का समकोण समभुज चौकोन बनाना और उस आकृति का उसके क्षेत्रफल के समान वृत्त में बदलना, इस तरह के कई मुश्किल सवालों का जवाब बौद्धयन ने आसान बनाया !

१५ वर्षाणि पूर्वस्य २००० वर्षाणि पूर्वस्य मंदिरणि ळब्धन्ति यानि अद्यस्य वैज्ञानिका: तकनीकिनः च् दर्शित्वा विस्मये भवन्ति तत मंदिरम् कीदृशं रचितुं भविष्यते सम्प्रति अस्माभिः एतै: वामपंथिभि: व्यभिचारिभि: पृच्छनीयाः तत मंदिरम् रचनाकार: कं ?

15 साल पहले का 2000 साल पहले का मंदिर मिलते हैं जिसको आज के वैज्ञानिक और इंजीनियर देखकर हैरान में हो जाते हैं कि मंदिर बना कैसे होगा अब हमें इन वामपंथी लंपट लोगो से पूछना चाहिए कि मंदिर बनाया किसने ?

ब्राह्मणा: अस्माभिः पाठितुं न दत्तवानयम् वार्ता ज्ञापका: प्रसिध्द: इतिहासकर्ता: अस्माभिः अयं न ज्ञापयन्ति तत १८३५ तममेव भारते ७००००० गुरुकुलानि आसीत् यस्य पूर्ण अभिलेखानि इंडियन हाउस इत्यां ळब्धिष्यते ! भारतम् निर्धन देशमासीत् किं न तु पुनः विश्वस्य बहवः आक्रमणकारिनः भारतमेव किं आगतवन्तः अस्माभिः धनिका: कर्तुं !

ब्राह्मणों ने हमें पढ़ने नहीं दिया यह बात बताने वाले महान इतिहासकार हमें यह नहीं बताते कि सन् 1835 तक भारत में 700000 गुरुकुल थे इसका पूरा डॉक्यूमेंट इंडियन हाउस में मिलेगा ! भारत गरीब देश था चाहे है तो फिर दुनिया के तमाम आक्रमणकारी भारत ही क्यों आए हमें अमीर बनाने के लिए !

भारते कश्चित् कार्याणि नासीत् ! भारते पिछड़ान् दलितान् दास कृत्वा धारयते स्म तु वामपंथिनः व्यभिचारिनः भवद्भिः अयम् न ज्ञापिष्यन्ति तत वयं १७५० तमे पूर्णविश्वस्य वणिजे भारतस्य अंशम् २४ प्रतिशतमासीत् १९०० तमे च् एके प्रतिशते आगतवत् अंततः कारणम् किमासीत् !

भारत में कोई रोजगार नहीं था ! भारत में पिछड़े दलितों को गुलाम बनाकर रखा जाता था लेकिन वामपंथी लंपट आपसे यह नहीं बताएंगे कि हम 1750 में पूरे दुनिया के व्यापार में भारत का हिस्सा 24 परसेंट था और सन् उन्नीस सौ में एक परसेंट पर आ गया आखिर कारण क्या था !

यदि अस्माकं देशे उति एवास्पृश्यतासीतस्माकं देशे कार्याणि नासीत् तु पूर्ण विश्वस्य वणिजे अस्माकं २४ प्रतिशतस्य वणिजं कीदृशमासीत् ? अयम् वामपंथिनः व्यभिचारिनः न ज्ञापिष्यन्ति तत कीदृशं आंग्लानां नीतिनां कारणम् भारते जनाः एकेण सह ३०००००० जनाः वुभुक्षित: हतवन्त: केचन दिवसस्य अंतराले !

अगर हमारे देश में उतना ही छुआछूत थे हमारे देश में रोजगार नहीं था तो फिर पूरे दुनिया के व्यापार में हमारा 24 परसेंट का व्यापार कैसे था ? यह वामपंथी लंपट नहीं बताएंगे कि कैसे अंग्रेजों के नीतियों के कारण भारत में लोग एक ही साथ 3000000 लोग भूख से मर गए कुछ दिन के अंतराल में !

एकं बहु विशेष वार्ता वामपंथिनः व्यभिचारिनः आंग्लकः मध्यग: कथयन्ति इयतेव भारतं समप्रीतमासीत्, इयतेव सनातन संस्कृति समृद्ध: आसीत् तु सर्वाणि अविष्कारा: आंग्ला: एव किं कृतवन्तः भारतस्य जनाः कश्चितापि अविष्कार: किं न कृतवन्तः ?

एक बेहद खास बात वामपंथी लंपट या अंग्रेज दलाल कहते हैं इतना ही भारत समप्रीत था, इतना ही सनातन संस्कृति समृद्ध थी तो सभी अविष्कार अंग्रेजों ने ही क्यों किए हैं भारत के लोगों ने कोई भी अविष्कार क्यों नहीं किया ?

तान् वामपंथिनः व्याभिचारिनः जनान् ज्ञापतुं गतवान् तत कृतवान् तु सर्वाणि अविष्कार: भारते एव तु ताः जनाः चोरित्वा स्व नाम्ना पेटेंट कारितवन्तः न तु एकम् वार्ता ज्ञापयतु भारत आगमनेण पूर्वम् आंग्ळा: कश्चित अविष्कार: कृतमसि तर्हि तस्य नाम ज्ञापयतु किंचित च् स्व विवेक: प्रयुज्यतु तत भारतमागमनस्यानंतरमेव इमे अविष्कार: कीदृशं कर्तुमरभन् तस्मात् पूर्वम् किं न करोति स्म ?

उन वामपंथी लंपट लोगों को बताते चलें कि किया तो सब आविष्कार भारत में ही लेकिन उन लोगों ने चुरा करके अपने नाम से पेटेंट कराया नहीं तो एक बात बताओ भारत आने से पहले अंग्रेजों ने कोई एक अविष्कार किया हो तो उसका नाम बताओ और थोड़ा अपना दिमाग लगाओ कि भारत आने के बाद ही यह लोग आविष्कार कैसे करने लगे उससे पहले क्यों नहीं करते थे ?

समस्त लेख सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों पर आधारित !

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