फोटो साभार सोशल मीडिया साइट
शिवलिंगम् विराजन्ते त्रय: देवा:, सर्वात् अधो अंश: यत् अधो स्थितयति तत ब्रह्म अस्ति, द्वितीय मध्यस्य अंश: तत भगवतः विष्णो: प्रतिरूप: तृतीय च् शीर्ष: सर्वात् उपरि यस्य पूजा क्रियते तत देवानां देव: महादेवस्य प्रतीक: अस्ति !
शिवलिंग में विराजते हैं तीनों देव, सबसे निचला हिस्सा जो नीचे टिका होता है वह ब्रह्म है, दूसरा बीच का हिस्सा वह भगवान विष्णु का प्रतिरूप और तीसरा शीर्ष सबसे ऊपर जिसकी पूजा की जाती है वह देवों के देव महादेव का प्रतीक है !

शिवलिंगेण एव त्रिदेवस्याराधना भवन्ते तथा अन्यानां मान्यतानां अनुसारम्, शिवलिंगस्याधो नाली नुमा अंश: माता पार्वतिम् समर्पिता तथा प्रतीकस्य रूपे पूजनीयमस्ति अर्थतः शिवलिंगेण एव त्रिदेवस्याराधना भवन्ते !
शिवलिंग के जरिए ही त्रिदेव की आराधना हो जाती है तथा अन्य मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग का निचला नाली नुमा भाग माता पार्वती को समर्पित तथा प्रतीक के रूप में पूजनीय है अर्थात शिवलिंग के जरिए ही त्रिदेव की आराधना हो जाती है !

अन्य मान्यतायाः अनुसारम्, शिवलिंगस्याधो अंश: स्त्री उपरि अंश: पुरुषस्य च् प्रतीकौ भवत: ! अर्थतः यस्मिन् शिव: शक्ति च्, एकेण सह वसत: ! शिवलिंगस्यार्थ: शास्त्राणां अनुसारं लिंगम गम्य च् शब्दाभ्यां मेलित्वा रचितमस्ति, यस्यार्थ: आरंभ अंत: च् भवत: !
अन्य मान्यता के अनुसार, शिवलिंग का निचला हिस्सा स्त्री और ऊपरी हिस्सा पुरुष का प्रतीक होता है ! अर्थात इसमें शिव और शक्ति, एक साथ में वास करते हैं ! शिवलिंग का अर्थ शास्त्रों के अनुसार लिंगम और गम्य शब्द से मिलकर बना है, जिसका अर्थ शुरुआत व अंत होता है !
बहुसु हिंदू धर्मस्य ग्रन्थेषु अस्य वार्तायाः वर्णनम् कृतवत: तत शिव महोदयेण एव ब्रह्मांडस्य प्राकट्याभवत् एकं दिवसं च् सर्वेषु तस्मिन्नेव मेलिष्यते ! शिवलिंगे विराजन्ते त्रिदेव:, अस्मासु अनुमानतः जनाः अयमेव ज्ञायन्ते तत शिवलिंगे शिव महोदयस्य वास: अस्ति !
तमाम हिंदू धर्म के ग्रंथों में इस बात का वर्णन किया गया है कि शिव जी से ही ब्रह्मांड का प्राकट्य हुआ है और एक दिन सब उन्हीं में ही मिल जाएगा ! शिवलिंग में विराजते त्रिदेव, हम में लगभग लोग यही जानते हैं कि शिवलिंग में शिव जी का वास है !

तु किं भवान् ज्ञायते यस्मिन् त्रय: देवानां वास: अस्ति ! कथ्यते शिवलिंगम् त्रिषु अंशेषु विभक्तुं शक्नोति ! सर्वातधो अंश: यतधो स्थितयति, द्वितीय मध्यस्य अंश: तृतीय च् शीर्ष सर्वात् उपरि यस्य पूजा क्रियते !
परंतु क्या आप जानते हैं इसमें तीनों देवताओं का वास है ! कहा जाता है शिवलिंग को तीन भागों में बांटा जा सकता है ! सबसे निचला हिस्सा जो नीचे टिका होता है, दूसरा बीच का हिस्सा और तीसरा शीर्ष सबसे ऊपर जिसकी पूजा की जाती है !
अधो अंश: ब्रह्मा महोदयः (सृष्ट्याः रचियता), मध्य अंश: विष्णु (सृष्ट्याः पालनकर्ता) उपरि अंश: च् भगवतः शिव: (सृष्ट्याः विनाशक:) सन्ति ! अर्थतः शिवलिंगेण एव त्रिदेवस्याराधना भवते ! तु तत्रैवान्यानां मान्यतानां अनुसारम्, शिवलिंगस्याधो अंश: स्त्र्या: उपरि अंश: पुरुषस्य च् प्रतीक: भवत: !
निचला हिस्सा ब्रह्मा जी (सृष्टि के रचयिता), मध्य भाग विष्णु (सृष्टि के पालनहार) और ऊपरी भाग भगवान शिव (सृष्टि के विनाशक) हैं ! अर्थात शिवलिंग के जरिए ही त्रिदेव की आराधना हो जाती है ! तो वहीं अन्य मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग का निचला हिस्सा स्त्री और ऊपरी हिस्सा पुरुष का प्रतीक होता है !
अर्थतः यस्मिन् शिवशक्ति, एकेण सह वास: कुर्वत: ! कथ्यते शिवलिंगस्य अंडाकारस्य पश्च आध्यात्मिक: वैज्ञानिक: च्, द्वौ कारणम् स्त: ! यदि आध्यात्मिक दृष्टितः द्रष्टु तु शिव ब्रह्मांडस्य निर्माणस्य मूल: सन्ति ! अर्थतः शिव: एव तत बीज: सन्ति, यस्मात् पूर्ण जगत: उत्पादितमस्ति !
अर्थात इसमें शिव-शक्ति, एक साथ वास करते हैं ! कहा जाता है शिवलिंग के अंडाकार के पीछे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक, दोनों कारण है ! अगर आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो शिव ब्रह्मांड के निर्माण की जड़ हैं ! अर्थात शिव ही वो बीज हैं, जिससे पूरा संसार उपजा है !
अतएव कथ्यते अयमेव कारण: अस्ति तत शिवलिंगस्याकृति अंडा यथा ! तत्रैव यदि वैज्ञानिक दृष्टितः वार्ता कुर्वन्तु तु बिग बैंग थ्योरी कथ्यति तत ब्रह्मांडस्य निर्माण अंडा यथा लघु कणतः अभवत् !
इसलिए कहा जाता है यही कारण है कि शिवलिंग का आकार अंडे जैसा है ! वहीं अगर वैज्ञानिक दृष्टि से बात करें तो बिग बैंग थ्योरी कहती है कि ब्रह्मांड का निर्माण अंडे जैसे छोटे कण से हुआ है !
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