आगतः ज्ञायन्ति ताजमहलस्य इतिहासम्, सत येन गोप्यत् ! आइये जानते हैं ताजमहल का इतिहास, सच जिसे छिपाया गया !

0
303

इदम् लेखम् श्री पुरुषोत्तम नागेश ओकस्य अनुसंधाने आधारितः अस्ति !

यह लेख श्री पुरुषोत्तम नागेश ओक के अनुसंधान पर आधारित है !

इतिहासे अपाठ्यते तत ताजमहलस्य निर्माण कार्यम् १६३२ तमे आरम्भयत्, करीबम् च् १६५३ तमे अस्य निर्माण कार्यम् सम्पूर्णम् अभवत् ! सम्प्रति विचारेन तत यदा मुमताजयाः निधनम् १६३१ तमे अभवत् तर्हि पुनः कीदृशीम् सा १६३१ तमेव ताजमहले निखन्यते, अपितु ताजमहलम् तर्हि १६३२ तमे निर्माणम् आरम्भयत् स्म !

इतिहास में पढ़ाया जाता है कि ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ, और लगभग 1653 में इसका निर्माण कार्य पूर्ण हुआ ! अब सोचिए कि जब मुमताज का इंतकाल 1631 में हुआ तो फिर कैसे उन्हें 1631 में ही ताजमहल में दफना दिया गया, जबकि ताजमहल तो 1632 में बनना शुरू हुआ था !

अयम् सर्वम् मननिर्मितम् वार्तानि सन्ति, यत् आंग्लकम् मुस्लिमम् च् इतिहासकरानि अष्टादश सदे अलिखत् ! वस्तुतः १६३२ तमे हिन्दू मन्दिरम् इस्लामिकम् प्रतिरूपम् दास्य कार्यम् आरम्भयत् ! १६४९ तमे अस्य मुख्य द्वारम् अबनत् तस्मिन् कुरानस्य आयतानि उत्कीर्णयत् ! इति मुख्य द्वारस्य उपरि हिन्दू शैल्याः लघु शिखरस्य आकारस्य मण्डपम् अस्ति, अत्यन्तम् च् भव्यम् प्रतीतं भवति, आर्श्व पार्श्व स्तम्भम् स्थाप्यते पुनः च् सम्मुखम् स्थित उत्सानि पुनेन अरचयत् !

यह सब मनगढ़ंत बातें हैं, जो अंग्रेज और मुस्लिम इतिहासकारों ने 18वीं सदी में लिखी !
दरअसल 1632 में हिन्दू मंदिर को इस्लामिक लुक देने का कार्य शुरू हुआ ! 1649 में इसका मुख्य द्वार बना जिस पर कुरान की आयतें तराशी गईं ! इस मुख्य द्वार के ऊपर हिन्दू शैली का छोटे गुम्बद के आकार का मंडप है, और अत्यंत भव्य प्रतीत होता है , आस पास मीनारें खड़ी की गई और फिर सामने स्थित फव्वारे
को फिर से बनाया गया !

जे ए माॅण्डेलस्लो: मुमताजया: निधनस्य सप्त वर्षाणि यावत् Voyages and Travels into the East Indies नामधेयम् स्व पर्यटनस्य संस्मरणेषु आगरास्य तर्हि उल्लेखम् अकरोत्, अपितु ताजमहलस्य निर्माणस्य कश्चित उल्लेखम् न अकरोत् ! टाॅम्हरनिए: कथनस्य अनुसारम् २० सहस्र श्रमिका: यदि २२ वर्षाणि यावत ताजमहलस्य निर्माणम् कृत अरहत् तर्हि माॅण्डेलस्लो: अपि तम् विशाल निर्माण कार्यस्य उल्लेखम् अवश्यम् करोति !

जे ए माॅण्डेलस्लो ने मुमताज की मृत्यु के 7 वर्ष पश्चात Voyages and Travels into the East Indies नाम से निजी पर्यटन के संस्मरणों में आगरे का तो उल्लेख किया गया है, किंतु ताजमहल के निर्माण का कोई उल्लेख नहीं किया ! टाॅम्हरनिए के कथन के अनुसार 20 हजार मजदूर यदि 22 वर्ष तक ताजमहल का निर्माण करते रहते तो माॅण्डेलस्लो भी उस विशाल निर्माण कार्य का उल्लेख अवश्य करता !

ताजस्य नद्या: प्रति द्वारस्य काष्ठस्य एक कृतिस्य शाहजहांस्य कालात् ३०० वर्षाणि पूर्वस्य अस्ति, कुत्रचित ताजस्य द्वाराणि एकादश सदेन एव मुस्लिम आततायै: कतिदा त्रोटित्वा उद्घाटयत्, पुनेन च् अवरुद्धाय द्वितीय द्वारमपि स्थाप्यते !

ताज के नदी के तरफ के दरवाजे के लकड़ी के एक टुकड़े की एक अमेरिकन प्रयोगशाला में की गई कार्बन जांच से पता चला है कि लकड़ी का वो टुकड़ा शाहजहां के काल से 300 वर्ष पहले का है, क्योंकि ताज के दरवाजों को 11वीं सदी से ही मुस्लिम आक्रामकों द्वारा कई बार तोड़कर खोला गया है, और फिर से बंद करने के लिए दूसरे दरवाजे भी लगाए गए हैं !

ताज पुरातनं चापि भवशक्नोति ! वास्तवे ताजम् १११५ तमे अर्थतः शाहजहांस्य कालात् यथा ५०० वर्षाणि पूर्वम् अरचयत् स्म ! ताजमहलस्य शिखरे यत् अष्टधातुस्य कलशं उत्तिष्ठम् अस्ति तत् त्रिशूल आकारस्य पूर्ण कुम्भम् अस्ति ! तस्य मध्य दंडस्य शिखरे नारिकेलस्य आकृतिम् निर्मित अस्ति ! नारिकेलस्य अधो द्वे युजम् चूतस्य पत्राणि तस्य अधो च् कलशं अदर्शयत् ! तम् चंद्राकारस्य द्वे फलम् तस्य च् मध्यातिमध्यम् नारिकेलस्य शिखरम् मिलित्वा त्रिशूलस्य आकारम् निर्मितम् अस्ति !

ताज और भी पुराना हो सकता है ! असल में ताज को सन् 1115 में अर्थात शाहजहां के समय से लगभग 500 वर्ष पूर्व बनवाया गया था ! ताजमहल के गुम्बद पर जो अष्टधातु का कलश खड़ा है वह त्रिशूल आकार का पूर्ण कुंभ है ! उसके मध्य दंड के शिखर पर नारियल की आकृति बनी है ! नारियल के तले दो झुके हुए आम के पत्ते और उसके नीचे कलश दर्शाया गया है ! उस चंद्राकार के दो नोक और उनके बीचो बीच नारियल का शिखर मिलाकर त्रिशूल का आकार बना है !

हिन्दू बौद्ध च् मन्दिरेषु इदमेव कलशं निर्मितं भवतः ! समाधि भवनम् उपरि शिखरस्य मध्यात् अष्टधातुस्य एकम् लौहशृङखलः लडनति ! शिवलिंगे जल सिंचन कर्तुम् सुवर्ण कलशं इति लौहशृङखलः लडनम् रहति स्म ! तस्मै निष्कासित्वा यदा शाहजहांस्य कोषे संचयते तर्हि तत् लौहशृङखलः अलडनते ! तस्मिन् लार्ड कर्जन: एकम् दीपम् अलडन्यते, यत् अद्यापि अस्ति !

हिन्दू और बौद्ध मंदिरों पर ऐसे ही कलश बने होते हैं ! कब्र के ऊपर गुंबद के मध्य से अष्टधातु की एक जंजीर लटक रही है ! शिवलिंग पर जल सिंचन करने वाला सुवर्ण कलश इसी जंजीर पर टंगा रहता था ! उसे निकालकर जब शाहजहां के खजाने में जमा करा दिया गया तो वह जंजीर लटकी रह गई ! उस पर लाॅर्ड कर्जन ने एक दीप लटकवा दिया, जो आज भी है !

समाधि भवनम् प्रासादम् किं अकथ्यते ?

कब्रगाह को महल क्यों कहा गया ?

किं कश्चितः एते कदा विचारयति, कुत्रचित पूर्वेनेव निर्मितं एकम् प्रासादम् समाधि भवने परिवर्तितः ! समाधि भवने परिवर्तित कालम् तस्य नाम न परिवर्तितः ! तम् कालस्य कश्चितापि सरकरिम् शाही दस्तावेजम् वा समाचारपत्रम् वा इत्यादये ताजमहल शब्दस्य उल्लेखम् न आगतवान ! ताजमहलम् ताज-ए-महल इति मान्यति हास्यास्पदम् अस्ति !

क्या किसी ने इस पर कभी सोचा, क्योंकि पहले से ही निर्मित एक महल को कब्रगाह में बदल दिया गया ! कब्रगाह में बदलते वक्त उसका नाम नहीं बदला गया ! यहीं पर शाहजहां से गलती हो गई ! उस काल के किसी भी सरकारी या शाही दस्तावेज एवं अखबार आदि में ताजमहल शब्द का उल्लेख नहीं आया है ! ताजमहल को ताज-ए-महल समझना हास्यास्पद है !

महल शब्द मुस्लिम शब्दम् नास्ति ! अरबम्, इरानम्, अफगानिस्तानम् इत्यादि स्थाने एकमपि इदृषिम् मस्जिदम् समाधि भवनम् वा नास्ति ! यस्य उपरांतम् महल इति शब्दम् प्रयोगम् अभवत् ! इदमपि अनृतं अस्ति तत मुमताजया: कारणम् अस्य नाम मुमताज महल इति पतयत् कुत्रचित तस्य पतन्या: नाम आसीत् मुमता-उल-जमानी इति ! यदि मुमताजया: नामे अस्य नाम धारयति तर्हि ताजमहलस्य अग्रात् मुम इति निष्कासितस्य किमपि औचित्यम् न परिलक्षयति !

महल शब्द मुस्लिम शब्द नहीं है ! अरब, ईरान, अफगानिस्तान आदि जगह पर एक भी ऐसी मस्जिद या कब्र नहीं है जिसके बाद महल लगाया गया हो ! यह भी गलत है कि मुमताज के कारण इसका नाम मुमताज महल पड़ा, क्योंकि उनकी बेगम का नाम था मुमता – उल – जमानी ! यदि मुमताज के नाम पर इसका नाम रखा होता तो ताजमहल के आगे से मुम को हटा देने का कोई औचित्य नजर नहीं आता !

विसेंट स्मिथ: स्व पुस्तके Akbar the Great Moghul लिखति, बाबर: १५३० तमे आगरास्य वाटिकाम् प्रासादे स्व आततायी जीवनात् मुक्तिम् अलभत् ! वाटिकाम् तत् प्रासादम् इयम् ताजमहलम् आसीत् ! बाबरस्य जाया गुलबदन हुंमायूंनामा नामकम् स्व ऐतिहासिक वृतांते ताजस्य सन्दर्भम् रहस्य महलस्य नामेन ददाति !

विंसेंट स्मिथ अपनी पुस्तक ‘Akbar the Great Moghul’ में लिखते हैं, बाबर ने सन् 1530 में आगरा के वाटिका वाले महल में अपने उपद्रवी जीवन से मुक्ति पाई ! वाटिका वाला वो महल यही ताजमहल था ! यह इतना विशाल और भव्य था कि इसके जितना दूसरा कोई भारत में महल नहीं था ! बाबर की पुत्री गुलबदन हुमायूंनामा नामक अपने ऐतिहासिक वृत्तांत में ताज का संदर्भ रहस्य महल (Mystic House) के नाम से देती है !

ताजमहलस्य निर्माणम् नृप परमर्दिदेवस्य शासनकाले ११५५ तमम् अश्विन शुक्लपक्ष पंचमी रविवासरम् अभवत् स्म ! अतः उपरांते मुहम्मद गौरी: समेतम् बहु मुस्लिम आक्रान्तानि ताजमहलस्य द्वारम् इत्यादिम् त्रोटित्वा तस्य अलुण्ठत् ! इदम् प्रासादम् अद्यस्य ताजमहलात् बहु विशालं आसीत् अस्य च् त्रय शिखरम् भव्यते स्म ! हिन्दूनि तम् पुनेन जिर्णोद्धारम् कृत्वा अनिर्मयत्, तु ते बहु कालेव अस्य प्रासादस्य रक्षाम् न कृत शक्नोति !

ताजमहल का निर्माण राजा परमर्दिदेव के शासनकाल में 1155 अश्विन शुक्ल पंचमी रविवार को हुआ था ! अतः बाद में मुहम्मद गौरी सहित कई मुस्लिम आक्रांताओं ने ताजमहल के द्वार आदि को तोड़कर उसको लूटा ! यह महल आज के ताजमहल से कई गुना ज्यादा बड़ा था और इसके तीन गुम्बद हुआ करते थे ! हिन्दुओं ने उसे फिर से मरम्मत करके बनवाया, लेकिन वे ज्यादा समय तक इस महल की रक्षा नहीं कर सके !

वास्तुकलास्य विश्वकर्मा वास्तुशास्त्रम् नामकम् प्रसिद्ध ग्रन्थे शिवलिंगेषु तेजलिंगस्य वर्णनम् आगच्छति ! ताजमहले तेजलिंगम् प्रतिष्ठित: आसीत् ! अतएव तस्य नाम तेजोमहालय इति भवति !

वास्तुकला के विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र नामक प्रसिद्ध ग्रंथ में शिवलिंगों में तेजलिंग का वर्णन आता है ! ताजमहल में तेजलिंग प्रतिष्ठित था ! इसीलिए उसका नाम तेजोमहालय पड़ा था !

शाहजहांस्य कालम् यूरोपीय देशेभ्यः आगतुम् बहवः जनानि भवनस्य उल्लेखम् ताज-ए-महल इति नामेन अकरोत्, यत् तत तस्य शिव मन्दिरम् परम्परागतम् संस्कृत नाम तेजोमहालयेन समानम् अस्ति ! अस्य विरुद्धम् शाहजहां: औरंगजेब: च् बहु सावधानेन सह संस्कृतेन समानम् इति शब्दस्य कुत्रैपि प्रयोगम् न कृतं तस्य स्थाने मकबरा इति शब्दस्येव प्रयोगम् अकरोत् !

शाहजहां के समय यूरोपीय देशों से आने वाले कई लोगों ने भवन का उल्लेख ताज-ए-महल के नाम से किया है, जो कि उसके शिव मंदिर वाले परंपरागत संस्कृत नाम तेजोमहालय से मेल खाता है ! इसके विरुद्ध शाहजहां और औरंगजेब ने बड़ी सावधानी के साथ संस्कृत से मेल खाते इस शब्द का कहीं पर भी प्रयोग न करते हुए उसके स्थान पर मकबरा शब्द का ही प्रयोग किया है !

ओकस्य अनुसरम् हुंमायूं:, अकबर:, मुमताज, एतमातुद्दौला: सफदरजंग: च् यथा समस्तम् शाही दरबारिम् च् जनानि हिन्दू प्रसादेषु मन्दिरेषु वा निखन्यते !

ओक के अनुसार हुमायूं, अकबर, मुमताज, एतमातुद्दौला और सफदरजंग जैसे सारे शाही और दरबारी लोगों को हिन्दू महलों या मंदिरों में दफनाया गया है !

ताजमहलम् तेजोमहालयम् शिव मन्दिरम् अस्ति !

ताजमहल तेजोमहालय शिव मंदिर है !

अस्य वार्ताम् स्वीकरोति एव भविष्यति तत ताजमहलस्य पूर्वेण निर्मितम् ताजस्य अभ्यांतरम् मुमताजया: शव निखन्यते न तत शवं निखनस्य उपरांत तस्य उपरि ताजस्य निर्माणम् अकरोत् !

इस बात को स्वीकारना ही होगा कि ताजमहल के पहले से बने ताज के भीतर मुमताज की लाश दफनाई गई न कि लाश दफनाने के बाद उसके ऊपर ताज का निर्माण किया गया !

ताजमहलम् शिव मन्दिरम् इंगित कर्तुम् शब्द तेजोमहालयम् मंदिरे अग्रेश्वरमहादेव: प्रतिष्ठित आसीत् ! पश्यतुम् जनाः अवलोकनम् करिष्यति तत अधोभवनस्य अभ्यांतरम् समाधि भवनम् कक्षे केवलं श्वेत संगमर्मरस्य प्रस्तर सम्मिलिताः सन्ति, अपितु अटारीम् समाधि भवनानि कक्षेषु पुष्प लतिका इत्यादयेन चित्रितम् चित्रकारिम् क्रियते !

ताजमहल शिव मंदिर को इंगित करने वाले शब्द तेजोमहालय शब्द का अपभ्रंश है ! तेजोमहालय मंदिर में अग्रेश्वरमहादेव प्रतिष्ठित थे ! देखने वालों ने अवलोकन किया होगा कि तहखाने के अंदर कब्र वाले कमरे में केवल सफेद संगमरमर के पत्थर लगे हैं जबकि अटारी व कब्रों वाले कमरे में पुष्प लता आदि से चित्रित चित्रकारी की गई है !

येन स्पष्ट प्रतितम् भवति तत मुमताजया: समाधिभवनम् कक्षेव शिव मन्दिरस्य गर्भगृहम् अस्ति ! संगमर्मरस्य शृङखले १०८ कलशं चित्रितम् तस्य उपरि १०८ कलशं आरूढ़म् सन्ति, हिन्दू मंदिर परम्परे शताष्टाधिकस्य संख्याम् पवित्रम् मान्यते !

इससे साफ जाहिर होता है कि मुमताज के मकबरे वाला कमरा ही शिव मंदिर का गर्भगृह है ! संगमरमर की जाली में 108 कलश चित्रित उसके ऊपर 108 कलश आरूढ़ हैं, हिन्दू मंदिर परंपरा में 108 की संख्या को पवित्र माना जाता है !

तेजोमहालयम् ताजमहलम् वा नागनाथेश्वरस्य नामेन ज्ञायन्ति स्म, कुत्रचित तस्य जलहरिम् नागेण कुण्डलितम् अभवत् यथा अरचयत् स्म ! इदम् मन्दिरम् विशालकायम् प्रासादम् क्षेत्रे आसीत् आगराम् पुरातन काले अंगिरा इति कथयति स्म, कुत्रचित अयम् ऋषि अंगिरास्य तपोभूमिम् आसीत् ! अंगिरा: ऋषि भगवतः शिवस्य उपासकम् आसीत् !

तेजोमहालय या ताजमहल को नागनाथेश्वर के नाम से जाना जाता था, क्योंकि उसके जलहरी को नाग के द्वारा लपेटा हुआ जैसा बनाया गया था ! यह मंदिर विशालकाय महल क्षेत्र में था ! आगरा को प्राचीनकाल में अंगिरा कहते थे, क्योंकि यह ऋषि अंगिरा की तपोभूमि थी ! अंगिरा ऋषि भगवान शिव के उपासक थे !

बहु प्राचीन कालेनेव आगरे ५ शिव मन्दिरम् निर्मितासीत् ! अत्रस्य निवासिना: सदिभ्यः यस्य ५ शिव मन्दिरेषु गत्वा दर्शनम् पूजनम् वा करोति स्म ! तु सम्प्रति केचन सदिभ्यः बालकेश्वरम्, पृथ्वीनाथम्, मनकामेश्वरम् राजराजेश्वरम् च् नामकम् केवलं चत्वारेव शिव मन्दिरम् शेषम् सन्ति ! पंचमम् शिव मन्दिरम् सद्य: पूर्वम् समाधिभवने परिवर्तितः ! स्पष्टतः तत् पंचमम् शिव मन्दिरम् आगरास्य इष्टदेवम् नागराज अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वरमेव सन्ति, यत् तत तेजोमहालये ताजमहले वा प्रतिष्ठितः आसीत् !

बहुत प्राचीन काल से ही आगरा में 5 शिव मंदिर बने थे ! यहां के निवासी सदियों से इन 5 शिव मंदिरों में जाकर दर्शन व पूजन करते थे ! लेकिन अब कुछ सदियों से बालकेश्वर, पृथ्वीनाथ, मनकामेश्वर और राजराजेश्वर नामक केवल 4 ही शिव मंदिर शेष हैं ! 5वें शिव मंदिर को सदियों पूर्व कब्र में बदल दिया गया ! स्पष्टतः वह 5वां शिव मंदिर आगरा के इष्टदेव नागराज अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर ही हैं, जो कि तेजोमहालय मंदिर या ताजमहल में प्रतिष्ठित थे !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here