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Thursday, May 26, 2022

देशे प्रथमदा गीताप्रेस गोरक्षपुरस्य हिंदू धार्मिक पुस्तकानां विक्रयस्य ९८ वर्षाणां रिकार्ड इति त्रोटितं ! देश में पहली बार गीताप्रेस गोरखपुर की हिंदू धार्मिक पुस्तकों की बिक्री का 98 वर्ष का रिकॉर्ड टूटा !

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कोरोनाकाले पुस्तकं-पत्रिकानां मुद्रणे संकटस्य मध्य विश्वस्य सर्वात् वृहदप्रकाशन समूहं गीताप्रेस इतस्य धार्मिक पुस्तकानां रिकार्ड इति विक्रयं भवति ! विगत अक्टूबरे ६.८० कोटि मूल्यस्य धार्मिक पुस्तकानि विक्रयं यत् अधुनैवस्य रिकार्ड इत्यस्ति ! याचनाया पुस्तकानि भंडारण सम्पादितुमभवत् !

कोरोना काल में पुस्तक-पत्रिकाओं की प्रिंटिंग पर संकट के बीच दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशन समूह गीता प्रेस की धार्मिक पुस्तकों की रिकॉर्ड बिक्री हो रही है ! बीते अक्तूबर में 6.80 करोड़ कीमत की धार्मिक पुस्तकें बिकीं जो अभी तक का रिकॉर्ड है ! मांग से पुस्तकें आउट ऑफ स्टॉक हो गई हैं !

इदम् स्थिति तदास्ति, यदा देशस्य ५० धूमयानपत्तने गीताप्रेस इतस्य पुस्तकापणानि अवरुध्दमस्ति ! धूमयानपत्तनानां पुस्तकापणेषु विक्रयं नसममस्ति ! कोरोनायाः कारणन् लॉकडाउन इतस्यानंतरम् गोरक्षपुरस्य विश्वप्रसिद्धम् गीताप्रेस इतस्य धार्मिक पुस्तकानां विक्रये ग्रहणमभवत् स्म !

ये स्थिति तब है, जब देश के 50 रेलवे स्टेशन पर गीता प्रेस के बुक स्टॉल के शटर गिरे हुए हैं ! रेलवे स्टेशनों के बुक स्टॉलों पर बिक्री नहीं के बराबर है !कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के बाद गोरखपुर के विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस की धार्मिक पुस्तकों की बिक्री पर ग्रहण लग गया था !

अप्रैले ३९ लक्षस्य मईमासे च् केवलं ५७.७५ लक्षस्य मूल्यस्य पुस्तकानां विक्रयमभवत् ! तु अनलॉक-१ इतस्यघोषणाया सहैव जूने २.६२ कोटिनां पुस्तकानि विक्रयमभवन् ! सितंबर आगतं-आगतं विक्रयं द्विगुणितेनापि अधिकं भूत्वा ५.६४ कोटि रूप्यकाणि प्राप्तानि !

अप्रैल में 39 लाख और मई महीने में सिर्फ 57.75 लाख कीमत की पुस्तकों की बिक्री हुई ! लेकिन अनलॉक-1 की घोषणा के साथ ही जून में 2.62 करोड़ की पुस्तकें बिकीं ! सितम्बर आते-आते बिक्री डबल से भी अधिक होकर 5.64 करोड़ रुपये पहुंच गई !

अक्टूबर मासे गीताप्रेस इतस्येतिहासस्य सर्वाधिक विक्रयं पंजीकृतानि ! अक्टूबरे अभवत् ६.८० कोटि मूल्यस्य पुस्तकानां विक्रये डिजिटल माध्यमस्यापि योगदानमस्ति ! गीताप्रेस इतस्य न्यासी देवीदयाल अग्रवालस्य कथनमस्ति तत गीताप्रेस ऑनलाइन माध्यमेन पुस्तकानां विक्रये ८०० प्रतिशततः अधिकस्योत्थानमागतं !

अक्टूबर महीने में गीता प्रेस के इतिहास की सर्वाधिक बिक्री दर्ज की गई ! अक्तूबर में हुई 6.80 करोड़ कीमत की पुस्तकों की बिक्री में डिजिटल प्लेटफार्म का भी योगदान है ! गीता प्रेस के ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल का कहना है कि गीता प्रेस ऑनलाइन प्लेटफार्म से पुस्तकों की बिक्री में 800 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया !

मार्च २०२० तमेव गीताप्रेस इतस्य वेबसाइट book.gitapress.org इत्ये लगभगम् प्रत्येक मासम् बहुसंकटेन १०० ऑर्डर इति आगच्छति ! जूने ७१९ ऑर्डर ळब्धानि तर्हि अगस्ते केवलं ८५६ ऑर्डर इति ळब्धानि ! अधुनैदं संख्या १००० इत्येन निकषा प्राप्तानि ! गीताप्रेस इतस्य न्यासी लालमणि तिवारी ज्ञापित: तत नवंबरस्य विक्रयं अक्टूबरतः केचन न्यूनं अस्ति !

मार्च 2020 तक गीताप्रेस की वेबसाइट book.gitapress.org पर औसतन हर महीने बमुश्किल बमुश्किल सौ ऑर्डर आते थे ! जून में 719 ऑर्डर मिले तो अगस्त में कुल 856 ऑर्डर मिले ! अब यह संख्या 1000 के करीब पहुंच गई है ! गीता प्रेस के ट्रस्टी लालमणि तिवारी ने बताया कि नवम्बर की बिक्री अक्तूबर से थोड़ी कम है !

दिसंबरे विक्रयस्य रिकार्ड इति एकदा पुनः त्रोटयति ! कोरोनाकाले गीताप्रेस इतस्य धार्मिक, आध्यात्मिक प्रेरणादायी वा कथानकानां पुस्तकानां बहुयाचनां अस्ति ! पुस्तकानि ऑनलाइन इति पठ्यन्ते ! ऑनलाइन माध्यमे श्रीमद्भगवतगीता, श्रीरामचरित मानस, सुंदरकांड, दुर्गासप्तशती !

दिसम्बर में बिक्री का रिकॉर्ड एक बार फिर टूट रहा है ! कोरोना काल में गीताप्रेस की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कहानी की किताबों की धूम है ! किताबें ऑनलाइन पढ़ी जा रही हैं ! ऑनलाइन प्लेटफार्म पर श्रीमद्भगवतगीता, श्रीरामचरितमानस, सुंदर कांड, दुर्गा सप्तशती !

योगदर्शन, व्रतपरिचय, ईशाद्या: नवोपनिषद, गीतायाः तत्वविवेचनी टीका, हनुमान चालीसा इत्यादयः धार्मिकपुस्तकानां याचनामस्ति ! तत्रैव बालकानां अपि कथानकस्य लगभगम् एक सहस्र भिन्न-भिन्न पुस्तकानि गीताप्रेस इतस्य वेबसाइट इत्ये उपलब्धम् सन्ति !

योग दर्शन, व्रत परिचय, ईशादि के नौ उपनिषद, गीता की तत्वविवेचनी टीका, हनुमान चालीसा आदि धार्मिक पुस्तकों की मांग है ! वहीं बच्चों की भी कहानी की लगभग एक हजार अलग-अलग किताबें गीताप्रेस की वेबसाइट पर मौजूद हैं !

येषु लकड़ी की तलवार, एक शाम जादूगर के साथ, छह अंधे और हाथी, चूहे को मिली पेंसिल, भोजन की थाली, बंदर की मूंछे, तीन नन्हें खरगोश, नीला सियार, बिच्छू और मगरमच्छ इत्यादयः पुस्तकानि पठ्यन्ते ! याचनायाः कारणम् गीताप्रेस इत्ये ४०० तः अधिकप्रकारस्य पुस्तकानां भंडारम् संपादितानि !

इनमें लकड़ी की तलवार, एक शाम जादूगर के साथ, छह अंधे और हाथी, चूहे को मिली पेंसिल, भोजन की थाली, बंदर की मूंछे, तीन नन्हें खरगोश, नीला सियार, बिच्छू और मगरमच्छ आदि पुस्तकें पढ़ी जा रही हैं ! मांग के चलते गीता प्रेस में 400 से अधिक प्रकार की पुस्तकों का स्टाक खत्म हो गया है !

गीताप्रेस प्रबंधनस्यानुरूपम्, पतंजलि योग प्रदीप, नारदपुराण, संक्षिप्त श्रीमद्देवीभागवत, संक्षिप्त ब्रह्मपुराण, नरसिंह पुराण, भागवत सटीक (तमिल), वाल्मीकि रामायण (तमिल), गीता तत्वविमोचनी (उड़िया, अंग्रेजी), श्रीरामचरितमानस (मराठी, तेलगु, रोमन), सचित्र हनुमान चालीसा, मत्स्य पुराण गर्गसंहिता च् यथैव महत्वपूर्ण पुस्तकानां भंडारण सम्पादितानि !

गीता प्रेस प्रबंधन के मुताबिक, पतंजलि योग प्रदीप, नारद पुराण, संक्षिप्त श्रीमद्देवीभागवत, संक्षिप्त ब्रह्मपुराण, नरसिंह पुराण, भागवत सटीक (तमिल), वाल्मीकि रामायण (तमिल), गीता तत्व विवेचनी (उड़िया, अंग्रेजी), श्रीरामचरितमानस (मराठी, तेलुगु, रोमन), सचित्र हनुमान चालीसा, मत्स्य पुराण और गर्ग संहिता जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकों का स्टॉक खत्म हो गया है !

मुद्रणाय १५० पुस्तकानि प्रतीक्षारत: सन्ति ! आपूर्ति सामान्यकर्तुम् चत्वाराणि घटकानि अतिरिक्त मशीन इति चाल्यते ! वर्ष १९२७ तमे महात्मा गांधिण: प्रेरणाया स्थापितं गीताप्रेस इत्येन १५ भाषासु लगभगम् १८०० प्रकारस्य पुस्तकानि प्रकाशितं भवन्ति !

छपाई के लिए 150 पुस्तकें लाइन में हैं ! आपूर्ति सामान्य करने को चार घंटे अतिरिक्त मशीन चलाई जा रही है ! वर्ष 1927 में महात्मा गांधी की प्रेरणा से स्थापित गीता प्रेस से 15 भाषाओं में करीब 1800 तरह की पुस्तकें प्रकाशित होती हैं !

हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, बांग्ला, उड़िया, असमिया, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलगु, कन्नड़, मलयालम, उर्दू, पंजाबी नेपाली वा भाषासु पुस्तकानि प्रकाशितं भवन्ति ! गीताप्रेस इतस्योत्पाद प्रबंधक डॉ लालमणि तिवारिण: कथनमस्ति तत कोरोनायाः कारणं जनाः गृहेभ्यः न्यूनम् निःसरन्ति !

हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, बांग्ला, उड़िया, असमिया, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलगु, कन्नड़, मलयालम, उर्दू, पंजाबी व नेपाली भाषाओं में पुस्तकें प्रकाशित होती हैं ! गीता प्रेस के उत्पाद प्रबंधक डॉ लालमणि तिवारी का कहना है कि कोरोना के कारण लोग घरों से कम निकल रहे हैं !

पाठकान् पुस्तकानि सुरक्षितं ळब्धन्ति ! ऑनलाइन इतस्य ऑफलाइन ऑर्डर इत्ये बहु वृद्धिमभवन् ! अमेजनेत्यादयेण अपि विक्रयं भवति ! पूर्वांचलस्य प्रतिष्ठितं पुस्तकविक्रेता: ज्ञापयन्ति तत कोरोना काले बहु साहित्यिकस्य, धार्मिकस्य लाइफ स्टाइल इतस्य च् पत्रिकानां प्रकाशनम् संपादनेणापणमुखेण गीताप्रेस इतस्य पुस्तकानि विक्रयानि !

पाठकों को पुस्तकें सुरक्षित मिल जा रही हैं ! ऑनलाइन के ऑफ लाइनऑर्डर में काफी वृद्धि हुई है ! अमेजन आदि से भी बिक्री हो रही है ! पूर्वांचल के प्रतिष्ठित बुक सेलर बताते हैं कि कोरोना काल में कई साहित्यिक, धार्मिक और लाइफ स्टाइल की पत्रिकाओं का प्रकाशन खत्म होने से काउंटर से गीता प्रेस की पुस्तकें बिकीं !

गीताप्रेस इतस्य एतेषां पुस्तकानां सर्वाधिक याचनां गीताप्रेस इतस्य पुस्तकानि नेपालेण, अमेरिकाया सह विश्वस्य सर्वेषु देशेषु गच्छन्ति ! कोरोना काले श्री रामचरितमानसस्य, गीता साधक संजीवन्या:, वाल्मीकि रामायणस्य, भागवत महापुराणस्य शिव महापुराणस्य च् सर्वाधिकानि ऑर्डर ळब्धानि !

गीता प्रेस की इन पुस्तकों की सर्वाधिक मांग
गीता प्रेस की पुस्तकें नेपाल, अमेरिका समेत दुनिया के सभी देशों में जाती हैं ! कोरोना काल में श्री रामचरितमानस, गीता साधक संजीवनी, वाल्मीकि रामायण, भागवत महापुराण और शिवमहापुराण के सर्वाधिक ऑर्डर मिले हैं !

गीताप्रेस इतस्य मुख्यापणस्य प्रमुख: राममूरत सिंह: ज्ञापयति तत बहु इदृशा: जनाः सन्ति, यत् वृहद संख्यायां पुस्तकानि क्रीत्वा मंदिरेषु सार्वजनिक स्थलेषु च् वितरन्ति ! एकः वणिज: प्रत्येक १५ दिवसे आगच्छन्ति वितरणाय च् १० तः १५ सहस्र मूल्यस्य पुस्तकानि नयन्ति !

गीता प्रेस के मुख्य स्टॉल के प्रमुख राममूरत सिंह बताते हैं कि तमाम ऐसे लोग हैं, जो बड़ी संख्या में पुस्तकें खरीदकर मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर वितरित कर रहे हैं ! एक व्यापारी हर 15 दिन पर आते हैं और बांटने के लिए 10 से 15 हजार कीमत की पुस्तकें ले जाते हैं !

येषु नारी धर्म, परम सेवा, नारी शिक्षा, स्त्रियों के लिए कर्तव्य शिक्षा, दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा, गीता, हनुमान चालीसा प्रमुखानि सन्ति ! नव वर्षाय जनाः डायरी इतस्य स्थानम् गीता दैनन्दिन्या: याचनां कुर्वन्ति !

इनमें नारी धर्म, परम सेवा, नारी शिक्षा, स्त्रियों के लिए कर्त्यव्य शिक्षा, दुर्गा सप्तसती, दुर्गा चालीसा, गीता, हनुमान चालीसा प्रमुख है ! नये वर्ष के लिए लोग डायरी की जगह गीता दैनन्दिनी की डिमांड कर रहे हैं !

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