साधुवाद ! उत्तरप्रदेश आरक्षकस्य शौर्यवान उप महानिरीक्षक सुभाष चन्द्र दूबे: ! धन्यवाद ! उत्तर प्रदेश पुलिस के जाबांज उप महानिरीक्षक सुभाष चन्द्र दूबे !

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फोटो डीआईजी आजमगढ़ रेंज सुभाषचंद्र दूबे साभार

सत्य घटना पर आधारित !

तमिलनाडो: कोयम्बटूरस्य नरीनपुरमस्य वासिन् ६० वर्षीय नागलक्ष्मी वर्ष २०१६ तमे स्व भर्त्ता सेनवग मूर्ते: निधनस्यानंतर: विक्षिप्ताभव्यते ! तस्या: पुत्र्यौ मंगला चेलवी सत्यप्रियैव च् स्तः, कश्चित् पुत्रः नास्ति ! नागलक्ष्मी २०१७ तमस्य निदाघे अकस्मात् गृहातलुप्यते !

तमिलनाडु के कोयम्बटूर के नरीनपुरम की रहने वाली 60 वर्षीया नागलक्ष्मी वर्ष 2016 में अपने पति सेनवग मूर्ति की मृत्यु के बाद विक्षिप्त हो गयीं ! उनकी दो बेटियाँ मंगला चेलवी तथा सत्यप्रिया ही हैं,कोई बेटा नहीं है ! नागलक्ष्मी 2017 की गर्मियों में एकाएक घर से गायब हो गयीं !

साभार प्रियांक

नागलक्ष्म्या: जामाता संतोष:,यत् तत परिश्रान्ति कृत गृहस्य व्ययम् निस्सरयति स्म,सः बहु हस्त पदमचालयत् तु स्व वृद्धा श्वश्रूम् नान्वेषणयते ! अंततः क्लमथत्वा परजित्वातिष्ठयते ! लगभगम् त्र्यार्द्ध वर्षम् भवमानः इति घटनाम् ! संतोष: अमान्यते स्म ततधुना तस्य श्वश्रू नागलक्ष्मी सदाय लुप्तमभव्यतैनश्यते वा !

नागलक्ष्मी के दामाद संतोष,जो कि मजदूरी कर घर का खर्चा निकालते थे,उन्होंने काफी हाथ पाँव मारे पर अपनी बुजुर्ग सास को ढूंढ न पाये ! अंततः थक-हार कर बैठ गये ! लगभग साढ़े तीन साल होने को हुए इस घटना को ! संतोष मान चुके थे कि अब उनकी सास नागलक्ष्मी हमेशा के लिए लापता हो चुकी हैं अथवा मर चुकी हैं !

तु भवस्य केचनान्यैव स्वीकारमासीत् ! विक्षिप्त नागलक्ष्मी अत्र विभर्मतमानः धूमयानेण दक्षिण भारतात् उत्तर भारताप्राप्तम् ! तस्या भाग्यम् तया उत्तरप्रदेशस्य आजमगढ़ानयतु ! एकातर्हि विक्षिप्त, द्वितीयावृद्धावस्था, तृतीयाज्ञाता प्रान्तम् चतुर्था भाषायाः दुरूहता च् !

परन्तु होनी को कुछ और ही मंजूर था ! विक्षिप्त नागलक्ष्मी इधर भटकते हुए ट्रेन से दक्षिण भारत से उत्तर भारत आ पहुँची ! उनकी किस्मत उन्हें उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ ले आयी ! एक तो विक्षिप्त,दूसरा बुढ़ापा,तीसरा अनजान इलाका एवं चौथा भाषा की समस्या !

२०१७ तमस्य मध्यात् गृहित्वा २०२० तमस्य आरम्भैव लगभगम् द्वयार्ध वर्षम् साजमगढ़स्य मार्गेषु परिभ्रमयते ! कश्चित केचनाददात् तर्हि अभक्ष्यते ! कश्चित केचन विदीर्णाददते तर्हि अधार्यते ! तु अवक्षयेनैवाक्षिप्यते उच्छिष्टम् सा भक्षित्वा स्वोदरस्य क्षुधम्तृप्तयते ! इदानीं भीषण शीत,वर्षा,उष्ण इति सर्वा सा स्वच्छंद नभैसह्यते !

2017 के मध्य से लेकर 2020 की शुरुआत तक लगभग ढाई साल वह आजमगढ़ की सड़कों पर भटकती रहीं ! किसी ने कुछ दे दिया तो खा लिया,किसी ने कुछ फटा-चिटा दे दिया तो पहन लिया ! वरना कूड़े से ही फेंके गये जूठन को वह खाकर अपने पेट की भूख को शांत करती रहीं ! इस दौरान भीषण ठण्ड-बरसात गर्मी सब वह खुले आसमान में झेलती रहीं !

अस्य मध्य २१ जनवरी २०२० तममाजमगढ़ क्षेत्रस्य आरक्षक उपमहानिरीक्षकस्य पदमगृह्यते सुभाषचंद्र दूबे: ! केचनैव दिवसानामनंतरम् फरवरी मासे तेन तस्य सरकारी आवासस्य बाह्य गच्छति मार्गस्योपान्तमेदम् वृद्धा विक्षिप्त महिला नागलक्ष्मी अपश्येत्,,यत् अवकरस्य निचयेण स्वाय भक्षस्य केचनान्वेषणति स्म !

इस बीच 21 जनवरी 2020 को आजमगढ़ रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) का पदभार सम्भाला सुभाषचंद्र दुबे ने ! कुछ ही दिनों के बाद फरवरी महीने में उन्हें उनके सरकारी आवास के बाहर जाती सड़क के किनारे यह बुजुर्ग विक्षिप्त महिला नागलक्ष्मी दिखीं,जो कूड़े के ढेर से अपने लिए खाने का कुछ ढूंढ रही थीं !

अयम् पश्य डीआईजी इति आजमगढ़ क्षेत्रेण नासह्यते ! सः त्वरित उपर्युक्त महिलायाः प्रति सम्पूर्णाभिज्ञानम् एकत्रित कृतमारम्भयते ! अनुविद्यते तत पूर्व केचन वर्षात् इदम् दक्षिण भारतीय निःशक्त महिला इदमेव प्रकारम् परिभ्रमति आजमगढ़े ! केचनापि पृच्छने सा महिला बदैव नाशक्नोति स्म भाषागत पीड़ायाः कारणम् !

यह देख डीआईजी आजमगढ़ रेंज से रहा न गया ! उन्होंने तुरन्त उपर्युक्त महिला के बारे में सारी जानकारी एकत्रित करना शुरू किया ! पता चला कि पिछले कुछ वर्षों से यह दक्षिण भारतीय निःशक्त महिला इसी तरह भटक रही है आजमगढ़ में ! कुछ भी पूछने पर वह महिला बता ही नहीं पा रही थी भाषागत समस्या के कारण !

इत्ये डीआईजी इति सर्वात् पूर्व उक्त वृद्धा महिलायाः निवासम्,भक्षणौ वस्त्रम् च् इत्यादयस्य व्यवस्थाम् एकम् स्थानीय एनजीओ इत्यस्य माध्यमेणाकारयते ! तु पुनः केचन दिवसानि अनंतरम् डीआईजी इति अपश्यत् तत सा विक्षिप्त महिला तमैव प्रकारम् मार्गे पुनः परिभ्रमति !

इस पर डीआईजी ने सबसे पहले उक्त बुजुर्ग महिला के रहने,खाने-पीने और कपड़े इत्यादि का इंतजाम एक स्थानीय एनजीओ के माध्यम से करवाया ! पर फिर कुछ दिनों बाद डीआईजी ने देखा कि वह विक्षिप्त महिला उसी तरह सड़क पर फिर भटक रही है !

इत्ये यदा अभिज्ञानम् प्राप्तम् कृतः तेन तदा अनुबिदते तत उक्त विक्षिप्त महिला पुनः-पुनः एनजीओ इत्यस्य आश्रय स्थळात् व्यग्र भूत्वा पलायति स्म,तयावरुद्धस्य बहु प्रयासस्यानंतरम् !

इस पर जब जानकारी हासिल की उन्हें तब पता चला कि उक्त विक्षिप्त महिला बार-बार एनजीओ के आश्रय स्थल से बेचैन होकर भाग जा रही थी,उसे रोकने के अथक प्रयास के बावजूद !

इत्ये डीआईजी इति उक्त महिला नागलक्ष्म्या: वास, भक्षणौ वस्त्रम् च् इत्यादयस्य व्यवस्थाम् इतिदा स्थानीय कोटपालिकायाः महिला आवासे अकारयत्,तत्र बहु महिला आरक्षक वसन्ति !

इस पर डीआईजी ने उक्त महिला नागलक्ष्मी के ठहरने,खाने-पीने और कपड़े इत्यादि का इंतजाम इस बार स्थानीय कोतवाली के महिला आवास में करवाया,जहाँ तमाम महिला सिपाही रहती हैं !

इति कालम् डीआईजी इति आजमगढ़ क्षेत्र: सततं उक्त दक्षिण भारतीय वृद्धा महिलायाः मूल निवासस्थानम् अन्वेषणस्य प्रयासम् कृतवान ! बहु संचार साधनानि यथा,वार्तापत्र, सोशलमीडिया इत्यादयस्य माध्यमेन वार्ताम् प्रसृतः अक्रियते,तु परिणाम तैव ढाकस्य त्रय पत्राणि !

इस दौरान डीआईजी आज़मगढ़ रेंज ने लगातार उक्त दक्षिण भारतीय बुजुर्ग महिला के मूल पता को खोजने का प्रयास किया ! तमाम संचार साधनों यथा अखबार,सोशल मीडिया इत्यादि के माध्यम से खबर को प्रसारित किया गया,पर नतीजा वही ढाक के तीन पात !

पुनः प्राप्तम् आजमगढ़े एकः चिकित्सक: यत् दक्षिण भारतस्य तमिल भाषायाः विदासीत् ! तेन उक्त महिलायाः संवाद इति अकारयते ! महिलाया वार्तित्वा चिकित्सक महोदयः एतावत् तर्हि स्वच्छमक्रियते तत महिला दक्षिण भारते तमिलनाडो: सन्ति ! पुनः शनैः-शनैः सततं प्रयासानामनंतरम् उक्त वृद्धा महिला न्यूनानावृत्त चिकित्सक: महोदयेन !

फिर मिले आजमगढ़ में एक चिकित्सक जो दक्षिण भारत के तमिल भाषा के जानकार थे ! उनसे उक्त बुजुर्ग महिला का संवाद कराया गया ! महिला से बात कर चिकित्सक महोदय ने इतना तो साफ कर दिया कि महिला दक्षिण भारत में तमिलनाडु की हैं ! फिर धीरे-धीरे लगातार प्रयासों के बाद उक्त बुजुर्ग महिला थोड़ा खुली चिकित्सक महोदय से !

एकम् दिवसम् वार्तानीव वार्तायाम् उक्त वृद्धा महिला केचन चेतना उपवृत्ये आश्चर्यजनकरूपे केचनैकम् जङ्गमदूरभाषयन्त्रस्य क्रमांकानि अलिख्यते,तदा वृद्धा महिलाम् स्व नाम निवासस्थानम् लेखनम् कर्गद लेखनी दत्तवान तर्हि स्व नाम निवासस्थानम् न लिखशक्नोति सा,तु एतावतानि वर्षाणि अनंरतरमपि जङ्गमदूरभाषयंत्रम् क्रमांकानि स्मरणासीत् तया ! वृहदाश्चर्यजनकम्,तु सद् !

एक दिन बातों ही बातों में उक्त बुजुर्ग महिला ने कुछ चेतना लौटने पर आश्चर्यजनक रूप में कुछेक मोबाइल फोन के नम्बर्स लिख दिये, जब बुजुर्ग महिला को अपना नाम-पता लिखने को कागज-कलम दिया गया तो अपना नाम या पता न लिख पायीं वह,परन्तु इतने वर्षों बाद भी मोबाइल फोन नम्बर्स याद थे उन्हें ! घोर आश्चर्यजनक,किंतु सत्य !

पुनः किमासीत् ! आरक्षकः डीआईजी आजमगढ़ क्षेत्रस्य निर्देशानुसार तानि सर्वाणि जङ्गमदूरभाषयंत्राणि क्रमांकेषु सम्पर्कम् कृतवान ! सौभाग्येण एकम् जङ्गमदूरभाषयंत्रम् क्रमांके घटिका बादयते !

फिर क्या था ! पुलिस ने डीआईजी आजमगढ़ रेंज के निर्देशानुसार उन सभी मोबाइल नम्बर्स पर कॉन्टैक्ट किया ! सौभाग्य से एक मोबाइल फोन नम्बर पर घण्टी बजने लगी !

ततेण दूरभाषम् स्वीकृतवान वृद्धा महिलायाः जामाता संतोष:,यतधुना तया सदाय लुप्तन् मृतन् वा अमान्यते स्म ! संतोषस्य बहुहर्षित भवेत् ! पुनः नागलक्ष्मी महोदयाया सन्तोषस्य वार्ताम् अकारयेत् अंतिम पुष्टिहेतु चित्रपटवार्ता वा ! द्वयो श्वश्रू-जामाता एकम् द्वितीयं पश्य भाव विह्वलमभव्यते !

उधर से फोन रिसीव किया बुजुर्ग महिला नागलक्ष्मी के दामाद संतोष ने,जो अब उन्हें हमेशा के लिए लापता या मरा हुआ समझ चुके थे ! संतोष की खुशी का ठिकाना न रहा ! फिर नागलक्ष्मी जी से संतोष की बात करायी गयी एवं अंतिम पुष्टि के लिए वीडियो कॉल ! दोनों सास-दामाद एक दूसरे को देख भाव-विह्वल हो गये !

डीआईजी आजमगढ़ क्षेत्रः संतोषस्य कोयम्बटूरात् आजमगढ़ आगमनस्य व्यवस्थाम् अकारयत् ! संतोष: त्वरित: कोयम्बटूरात् आजमगढ़ाय निस्सरते ! ३१ दिसंबर २०२० तमम् आजमगढ़ प्राप्तम् सः स्व श्वश्रू नागलक्ष्मी महोदयाया: अभिज्ञान स्वयम् डीआईजी इत्यस्य समक्ष: कृतः !

डीआईजी आज़मगढ़ रेंज ने संतोष के कोयम्बटूर से आज़मगढ़ आने की व्यवस्था करायी ! संतोष तुरन्त कोयम्बटूर से आजमगढ़ के लिए निकल पड़े ! 31 दिसंबर 2020 को आजमगढ़ पहुँच उन्होंने अपनी सास नागलक्ष्मी जी की पहचान खुद डीआईजी के समक्ष की !

नागलक्ष्मी महोदयायाः जामाता उत्तरप्रदेश आरक्षकस्य इति मानवीय पहले भावुक भवउत्थेत् ! तेन यत् विश्वासम् नासीत्,तेन डीआईजी इति आजमगढ़ क्षेत्रः सुभाषचंद्र दुबेस्य योग्य: सक्षम: वा नेतृत्वे उत्तरप्रदेशस्य आजमगढ़ आरक्षकः कृतापदिश्यते स्म !

नागलक्ष्मी जी के दामाद संतोष उत्तर प्रदेश पुलिस की इस मानवीय पहल पर भावुक हो उठे ! उन्हें जो भरोसा नहीं था,उसे डीआईजी आजमगढ़ रेंज सुभाषचंद्र दुबे के योग्य व सक्षम नेतृत्व में उत्तरप्रदेश की आजमगढ़ पुलिस ने कर दिखाया था !

२०२१ तमस्य प्रथम दिवसः एक जनवरी इतम् सन्तोष: तस्य श्वश्रू नागलक्ष्मी महोदयायाः कोयम्बटूर पुनः गमनस्य पूर्ण व्यवस्थाम् (यात्रापत्रम्,भोजनम्,शीतेन रक्षा हेतु वस्त्राणि इत्यादि) उत्तरप्रदेश आरक्षक: प्रत्येन अक्रियते गोरखपुरात् कोयम्बटूराय धूमयान ग्रहीत्वा द्वये आंग्ल नववर्षेण सह अप्रेषयते !

2021 के पहले दिन एक जनवरी को संतोष एवं उनकी सास नागलक्ष्मी जी के कोयम्बटूर वापस जाने की पूरी व्यवस्था (टिकट, खानपान, ठण्ड से बचने हेतु कपड़े इत्यादि) उत्तरप्रदेश पुलिस की तरफ से की गयी और गोरखपुर से कोयम्बटूर के लिए ट्रेन पकड़वा कर दोनों को अंग्रेजी नववर्ष के साथ रवाना किया गया !

इदृशं कोरोना इत्याय कुख्यात २०२० तम: गच्छन्-गच्छन् सुदूर दक्षिण भारतस्य वृद्धा निःशक्त वा महिला नागलक्ष्मी महोदयै पूर्व केचन वर्षात् आच्छादित अन्धकारम् स्वेण सह गृहित्वा अनीयते २०२१ तमस्य च् आरम्भम् तस्या: जीवनस्य द्वितीय चक्रस्य एकम् नव प्रातम् गृहित्वागतवान !

इस प्रकार कोरोना के लिए कुख्यात 2020 जाते-जाते सुदूर दक्षिण भारत की बुजुर्ग व निःशक्त महिला नागलक्ष्मी जी के लिए पिछले कुछ वर्षों से छाए अंधकार को अपने साथ लेकर गया तथा 2021 की शुरुआत उनकी जिन्दगी की दूसरी पारी के एक नये सबेरे को लेकर आया !

कारण: एकमात्र डीआईजी आजमगढ़ क्षेत्रः सुभाषचंद्र दूबे: तस्य पूर्ण आरक्षकः सदस्यै: च् परिलक्ष्यते उत्कृष्ट मानवीय संवेदनशीलता: अथक कर्तव्यनिष्ठा: च् ! इति सम्पूर्ण सकारात्मक: घटनाक्रमाय डीआईजी आजमगढ़ क्षेत्रः सुभाष दूबे: तस्य पूर्ण आरक्षकस्य सदस्या: च् शुभाशयानि पात्र: अस्ति !

कारण एकमात्र डीआईजी आजमगढ़ रेंज सुभाषचंद्र दुबे एवं उनकी पूरी पुलिस टीम के द्वारा दिखाए गये उत्कृष्ट मानवीय संवेदनशीलता एवं अथक कर्तव्यनिष्ठा ! इस पूरे सकारात्मक घटनाक्रम के लिए डीआईजी आजमगढ़ रेंज सुभाषचंद्र दुबे एवं उनकी पूरी पुलिस की टीम बधाई की पात्र है !

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