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किं भवान् जानाति भारते चीनी भाषायामपि मुद्रयति स्म वार्तापत्रम् ! क्या आप जानते हैं भारत में चीनी भाषा में भी छप रहा था अखबार !

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भारत विविधतानां देशमस्ति ! अत्र प्रत्येकं किलोमीटर इत्यां भाषा, वचन परिवेशतः च् गृहीत्वा भोजनमेवापि परिवर्त्तते ! राज्यम् तु त्यजतु, प्रत्येक जनपदस्य पृथक विशेषतास्ति ! अनुमानतः ८०० भाषा: युक्तं अस्मिन् देशे बहवः भाषा: वैदेशतः अपि आगतवत: !

भारत विविधताओं का देश है ! यहाँ हर कुछ किलोमीटर पर भाषा, बोली और रहन-सहन से लेकर खान-पान तक भी बदल जाता है ! राज्य तो छोड़ दीजिए, हर एक जिले की अलग विशेषता है ! लगभग 800 भाषाओं वाले इस देश में कई भाषाएँ विदेश से भी आई हैं !

कुत्रचित् भारतम् सर्वान् समुदायानालिंगयत् ! संकटस्य काळम् तै: गृहम् दत्तवान् ! किं भवतम् ज्ञातमस्ति तत भारते चीनी भाषायामपि एकस्य वार्तापत्रस्य संचालनम् भवति स्म ? यद्यपि सम्प्रति वार्ता इदमस्ति तत भारतस्य एकमात्र चीनी भाषायाः वार्तापत्रम् सम्प्रति अवरुद्धयत् !

क्योंकि भारत ने सभी समुदायों को गले लगाया है ! मुसीबत के वक्त उन्हें घर दिया है ! क्या आपको पता है कि भारत में चीनी भाषा में भी एक अखबार का संचालन हो रहा था ? हालाँकि अब खबर ये है कि भारत के एकमात्र चीनी भाषा का अखबार अब बंद हो गया है !

इदम् वार्तापत्र चीनस्य मंदारिन भाषायां मुद्रयति स्म ! सेओंग पॉव नामकास्य वार्तापत्रम् द ओवरसीज चायनीज कॉमर्स ऑफ इंडिया इत्या: नाम्नापि ज्ञायते स्म ! इदम् कोलकातायां प्रकाशितं भवति स्म ! यस्य कारणमस्ति तत कोलकातायां एकं इदृशं क्षेत्रमपि अस्ति !

ये अखबार चीन की मंदारिन भाषा में छपता था ! सेओंग पॉव नामक इस समाचारपत्र को द ओवरसीज चायनीज कॉमर्स ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता था ! ये कोलकाता में प्रकाशित होता था ! इसका कारण है कि कोलकाता में एक ऐसे क्षेत्र भी है !

येन लघु चीन कथ्यते तत्र च् चीनी भाषा ज्ञायकानां जनसंख्या रमति ! अस्य वार्तापत्रस्य सर्कुलेशन सततं न्यून भवति स्म सम्प्रति चिदम् अनुमानतः अवरुद्धयत् ! मार्च २०२० तमे यदा वैश्विक कोरोना महामार्या: कारणम् लॉकडाउन अभवत् स्म, तस्मात् पूर्वमेवास्य वार्तापत्रस्य अंतिम संस्करणम् मुद्रितं अभवत् स्म !

जिसे मिनी चीन कहते हैं और वहाँ चीनी भाषा जानने वालों की जनसंख्या रही है ! इस अखबार का सर्कुलेशन लगातार कम हो रहा था और अब ये लगभग बंद हो गया है ! मार्च 2020 में जब वैश्विक कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लगा था, उससे पहले ही इस अखबार का अंतिम संस्करण प्रिंट हुआ था !

कदाभवत् स्म, इदम् दिनांक कश्चितम् स्मरणम् नास्ति ! एकं तु कोरोना महामार्या: यस्मिन् संकटमभवत्, उपरितः यस्य संपादक: कुओ-त्साई-चांगस्य जुलै २०२० तमे निधनम् अभवत् ! अस्य वार्तापत्रस्य स्थापना १९६९ तमे चीनी समुदायस्य नेता ली-युओन-चीनेण कारितवान् स्म !

कब हुआ था, ये तारीख किसी को याद नहीं है ! एक तो कोरोना महामारी की इस पर मार पड़ी, ऊपर से इसके संपादक कुओ-त्साई चांग की जुलाई 2020 में मौत हो गई ! इस अखबार की स्थापना सन् 1969 में चीनी समुदाय के नेता ली-यूओन-चीन द्वारा किया गया था !

यस्मात् पूर्वम् चायनीज जर्नल ऑफ इंडिया नाम्नः चीनी वार्तापत्रं मुद्रयति स्म ! यस्यारंभस्य ३४ वर्षमनंतरम् सेओंग पॉवस्य प्रकाशनम् अरभत् ! येन ४ पृष्ठेषु प्रकाशितं क्रियते ! यद्यपि वार्तानां संख्या न्यून भवति स्म, अतएव चीनस्य, ताइवानस्य हांगकांगस्य चतिरिक्तं कोलकातायाः आंग्लभाषी वार्तापत्रै: वार्ता: गृहीत्वा यस्मिन् मुद्रयति स्म !

इससे पहले चायनीज जर्नल ऑफ इंडिया नाम का चीनी अखबार छपता था ! इसकी शुरुआत के 34 वर्ष बाद सेओंग पॉव का प्रकाशन शुरू हुआ ! इसे 4 पन्नों में प्रकाशित किया जाता था ! चूँकि खबरों की संख्या कम होती थी, इसीलिए चीन, ताइवान और हॉन्गकॉन्ग के अलावा कोलकाता के अंग्रेजी अखबारों से खबरें लेकर इसमें डाला जाता था !

तस्य मंदारिन भाषायां अनुवादम् क्रियते स्म ! टीओआई इत्या: वार्तायाः अनुसारम्, एकः अवकरम् वणिज: दीपू मिस्त्री ज्ञाप्तवान् तत सम्प्रतीदम् स्थानम् संभवतः भविष्ये उद्घाटयत् ! सः अवकरस्यान्वेषणे वार्तापत्राणां कार्यालयाणि एव गच्छते, यत्रतः तेन पुरातन वार्तापत्रम् ळब्धति !

उनका मंदारिन में अनुवाद किया जाता था ! TOI की खबर के अनुसार, एक कचरा कारोबारी दीपू मिस्त्री ने बताया कि अब ये जगह शायद ही भविष्य में खुले ! वो कूड़े-कचरे की खोज में अक्सर अखबारों के दफ्तरों तक जाते रहे हैं, जहाँ से उन्हें पुराने अखबार मिलते हैं !

सः ज्ञाप्तवान् ततास्य सेओंग पॉवस्य कार्यालये केचनासंदिका: डेस्क चित्यादयः आसन्, सहैव प्रिंटर संगणकं चपि आस्ताम् ! तु, संपादकस्य निधनस्यानंतरं कर्मचारिनः अत्रागतुमवरुद्धयन् बहूनि फर्नीचर चचोरयन् ! चायनीज एसोशिएशन ऑफ इंडिया इत्या: अध्यक्ष: चेन-याहो-हुआ अस्य वार्तापत्रस्य नियमित् ग्राहक: आसीत् !

उन्होंने बताया कि इस सेओंग पॉव के कार्यालय में कुछ कुर्सियाँ और डेस्क वगैरह थे, साथ ही प्रिंटर और कम्प्यूटर भी था ! लेकिन, संपादक की मृत्यु के बाद कर्मचारियों ने यहाँ आना बंद कर दिया और कई फर्नीचर चोरी हो गए ! चायनीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष चेन-याओ-हुआ इस अखबार के नियमित ग्राहक थे !

यस्य पार्श्व प्रतिदिनप्रातः कॉपी प्राप्तयति स्म ! सः ज्ञाप्तवान् तत कोलकातायाः तंगरायां चीनी जनानां संख्या न्यूनयति, अतएव इदृशं योग्य जना: न ळब्धन्ति यः अस्य वार्तापत्रम् चालितुं अशक्नोत् ! सः ज्ञाप्तवान् ततात्रस्य अधिकतर: युवा न तु चीनी पठितुं शक्नोति नैव च् लिखितुं शक्नोति !

जिनके पास हर सुबह कॉपी पहुँचती थी ! उन्होंने बताया कि कोलकाता के तंगरा में चीनी लोगों की संख्या घट रही है, इसीलिए ऐसे योग्य लोग नहीं मिल रहे हैं जो इस अखबार को चला सकें ! उन्होंने बताया कि यहाँ के अधिकतर युवा न तो चीनी पढ़ सकते हैं और न ही लिख सकते हैं !

सः दिवगंत संपादकस्य सहायक: हेलेन-यांगम् नव जनानां नियुक्ति: कृत्वा तै: मंदारिन शिक्षणं अकथयत्, कुत्रचित् सास्य भाषायाः ट्यूशन अपि ददाते ! तु, इदम् योजना साफल्यं नाभवत् कुत्रचित् तंगरायां सम्प्रति हक्का चिनीनां जनसंख्या: अस्ति याः मंदारिन नावगमयन्ति !

उन्होंने दिवंगत संपादक के अस्सिस्टेंट हेलेन यांग को नए लोगों की भर्ती करके उन्हें मंदारिन सिखाने को कहा, क्योंकि वो इस भाषा की ट्यूशन भी देती रही हैं ! लेकिन, ये योजना सफल नहीं हुई क्योंकि तंगरा में अब हक्का चीनियों की जनसंख्या है जो मंदारिन नहीं समझती !

चीनी मीडिया संस्थानम् एससीएमपी दिसंबर २०२० तमे प्रकाशितं एके लेखे एव ज्ञाप्तवत् स्म ततेदमवरुद्धयति ! यस्य यः संपादक: आसीत्, तः प्रातः ८ वादनम् द्विचक्रिकातः कार्यालयं प्राप्तयति स्म ! यस्यानंतरम् तः दिवसस्य सर्वाणि वृहत् वार्ता: अंवेषयति स्म !

चीनी मीडिया संस्थान SCMP ने दिसंबर 2020 में प्रकाशित एक लेख में ही बताया था कि ये अखबार बंद हो रहा है ! इसके जो संपादक थे, वो सुबह के 8 बजे साइकिल से दफ्तर पहुँच जाते थे ! इसके बाद वो दिन की सभी बड़ी खबरों को खँगालते थे !

यस्यानंतरम् तः अग्रिम संस्करणस्य तत्परतासु संलग्नयति स्म ! ज्ञापयतु ततारंभे अस्य वार्तापत्रं हस्तलिखित रूपे प्रकाशितं क्रियते ! ४-५ जनाः मेलित्वा २००० कॉपी मुद्रयन्ति स्म ! महामार्या पूर्वम् पाठकानां संख्या न्यूनभूतस्य उपरांतम् वार्तापत्रम् चलति स्म !

इसके बाद वो अगले संस्करण की तैयारियों में जुट जाते थे ! बता दें कि शुरुआत में इस अखबार को हस्तलिखित रूप में प्रकाशित किया जाता था ! 4-5 लोग मिल कर 2000 कॉपी छापते थे ! महामारी से पहले पाठकों की संख्या कम होने के बावजूद अखबार चल रहा था !

कुत्रचित् यस्य संपादक: सदैव स्वमूलतः संयुक्ते बलम् ददाति स्म ! यः अस्य वार्तापत्रस्य स्थापना कृतरासीत्, तस्य प्रपौत्राः सम्प्रति कोलकातायां एकं जलपानगृहम् चालयन्ति ! यस्मात् पूर्वम् यत् भारते चीनी भाषायाः प्रथम वार्तापत्रम् मुद्रयति स्म, तत् २०२१ तमे बहूनां संकटानां कारणमवरुद्धयत् स्म !

क्योंकि इसके संपादक हमेशा अपने जड़ों से जुड़े रहने पर जोर देते थे ! जिन्होंने इस अखबार की स्थापना की थी, उनके पोते अब कोलकाता में एक रेस्टॉरेंट चलाते हैं ! इससे पहले जो भारत में चीनी भाषा का पहला अखबार छपता था, वो 2001 में कई समस्याओं के कारण बंद हो गया था !

सेओंग पॉवस्यापि कदा बहु अधिकं याचना भवते स्म ! लॉकडाउनतः पूर्वम् स्थितिम् इदृशं अभवत् स्म तत केवलं २०० प्रत्य: एव प्रकाशितं भवन्ति स्म २.५० रूप्यकेषु च् एकं विक्रयते स्म ! सम्प्रति भारते अपि चीनी मूलस्य छात्र मंदारिनस्य स्थानम् आंग्लभाषाम् महत्वम् ददन्ति !

सेओंग पॉव की भी कभी बहुत ज्यादा माँग हुआ करती थी ! लॉकडाउन से पहले हालत ऐसी हो गई थी कि मात्र 200 प्रतियाँ ही प्रकाशित होती थीं और 2.50 रुपए में एक बिकती थी ! अब भारत में भी चीनी मूल के छात्र मंदारिन की जगह अंग्रेजी को प्राथमिकता देते हैं !

ज्ञापयतु तत भारते चीनी संख्यायाः वसस्य कथानकमपि रोचकमस्ति ! इदम् वार्ता आंग्लानां काळस्यास्ति ! यांग-डाजहाओ नाम्नः एकः वणिज: तदा विमानतः यात्रा करोति स्म ! अस्मिन् काळम् तः बंगाल की खाड़ी इत्यां एके झंझावते अवरुद्धयत् ! तेन टोंग अचीव: अछी इत्या: नाम्नापि ज्ञायते !

बता दें कि भारत में चीनी संख्या के बसने की कहानी भी रोचक है ! ये बात अंग्रेजों के जमाने की है ! यांग डजहाओ नाम का एक व्यापारी तब जहाज से यात्रा कर रहा था ! इस दौरान वो बंगाल की खाड़ी में एक तूफान में फँस गया !उसे टोंग अचीव या Achhi के नाम से भी जाना जाता है !

झंझावते अवरुद्धस्यानंतरम् तं कोलकाता हार्बर (तदा कलकत्ता) इत्यां आश्रय: नयवान् ! तदा तत्रस्य ब्रिटिश गवर्नर वारेन हेस्टिंग्सतः तेन सहाय्य ळब्धवान् ! कलिकातायाः अचीपुरे तेन भूमि प्रदत्तवान् ! यस्मिन् तं सुगर प्लांटेशन कृतवान् ! चीनी मिल इत्या: अतिरिक्तं सूकरानां एकं फार्म इत्यापि अरचयत् !

तूफान में फँसने के बाद उसने कोलकाता हार्बर (तब कलकत्ता) में शरण ली ! तब यहाँ के ब्रिटिश गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंगस से उसे सहायता मिली ! कोलकाता के अचीपुर में उसे जमीन दी गई ! इसमें उसने सुगर प्लांटेशन किया ! चीनी मिल के अलावा सूअरों का एक फार्म भी बनाया गया !

तेन चीनतः श्रमिका: अत्रानयस्याज्ञापि ळब्धवत् ! कदात्र ३०००० चीनी श्रमिका: वसन्ति स्म ! तंगरा तिरेट्टापणे च् बंगस्य चाइना टाउन इत्या: रूपे ज्ञायते स्म ! कदात्र चीनी भाषायाः बहूनि विद्यालयानि अपि भवन्ते स्म ! पेई मेई इति नाम्नः एकं विद्यालयं छात्राणां संख्या न्यून भूतस्य कारणमवरुद्धयत् !

उसे चीन से मजदूर यहाँ लाने की इजाजत भी मिल गई ! कभी यहाँ 30,000 चीनी मजदूर रहा करते थे ! तंगरा और तिरेट्टा बाजार को बंगाल के चाइनाटाउन के रूप में जाना जाता था ! कभी यहाँ चीनी भाषा के कई स्कूल भी हुआ करते थे ! पेई मेई नाम का एक स्कूल छात्रों की संख्या कम होने के कारण बंद हो चुका है !

अत्रतः सर्वोच्च न्यायालयं २००२ तमे चमड़ा निर्माता: २३० संस्थानि कुत्रैवान्य प्रेषणस्याज्ञाम् दत्तवान्, यस्यानंतरम् चीनी जनसंख्या न्यून भवितुं गतवान् ! बहवः स्वकार्यमेव परिवर्त्तयन् ! सम्प्रति इदम् चाइनाटाउन न रमेत्तम ! यत् चीनी वार्तापत्रमवरुद्धम् अभवत्, तस्य प्रथम पृष्ठे अंतरराष्ट्रीय वार्ता: भवति स्म !

यहाँ से सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में चमड़ा बनाने वाली 230 फैक्ट्रियों को कहीं और भेजने का आदेश दिया, जिसके बाद चीनी जनसंख्या घटती चली गई ! कइयों ने अपना प्रोफेशन ही बदल लिया ! अब ये चाइनाटाउन नहीं रहा ! जो चीनी अखबार बंद हुआ है, उसके पहले पेज पर अंतरराष्ट्रीय खबरें होती थीं !

द्वितीये चिनस्य कलिकातायाः च् चिनीनां वार्ता:, तृतीये स्वास्थ्य बालकानां च् वार्ता: भवति स्म अंतिम पृष्ठे च् हांगकांगस्य, मकाऊ इत्या: ताइवानस्य च् वार्ता भवति स्म ! ज्ञापयतु तत सेंट्रल कलिकातायां एकं चीनी ब्रेकफास्ट आपणमपि अस्ति ! तत्रापि पूर्वम् एके दशके चीनी जलपानगृहाणां संख्या न्यूनमभवत् ! सम्प्रति चीनी प्रभाव: अपि न्यूनम् भवति ! यत् देशाय सम्यक् अस्ति !

दूसरे पर चीन और कोलकाता के चीनियों की खबरें, तीसरे पर स्वास्थ्य और बच्चों वाली खबरें होती थीं और अंतिम पेज पर हॉन्गकॉन्ग, मकाउ और ताइवान की खबरें होती थीं ! बता दें कि सेन्ट्रल कोलकाता में एक चीनी ब्रेकफास्ट बाजार भी है ! वहाँ भी पिछले एक दशक में चीनी रेस्टॉरेंट्स की संख्या घटी है ! अब चीनी प्रभाव भी कम हो रहा है ! जोकि देश के लिए अच्छा है !

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