“कांग्रेस का हाथ, महिला का अपमान करने वालो के साथ” – पार्टी की महिला नगरसेविका का हुआ अपमान, नेतृत्व की चुप्पी

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Picture Credit - Team Trunicle

कांग्रेस पार्टी अपने आप को महिला अधिकारों के लिए समर्पित पार्टी बताती है, इनका नेतृत्व हमेशा महिलाओ के अधिकारों और उनके सामान के बारे में बड़ी बड़ी बातें करता है, लेकिन आज हम आपको एक घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कांग्रेस के बनाये इस छद्म आवरण को उतार फेंकेगा।

हम बात कर रहे हैं नुसरत जहां की, जो कांग्रेस की सदस्य हैं और नगर परिषद् बालापुर (जिला अकोला) की नगर सेविका हैं । नुसरत एक जुझारू महिला हैं, जो अपने इलाके में समाजसेवा के लिए मशहूर हैं, और लोगो के बीच इनकी काफी उज्जवल छवि है, और इनका नाम हमेशा कुछ गिने चुने लोगो में लिया जाता है जो भ्रस्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं ।

तो हुआ ये की ३० अगस्त को नगर परिषद् की एक बैठक थी, जिसमे नगर परिषद् के अध्यक्ष सैयद एनोदीन खतीब ने नगर सेविका नुसरत जहां का अपमान किया । नुसरत की गलती सिर्फ इतनी थी की उन्होंने नगर परिषद् में व्याप्त भ्रस्टाचार का विरोध किया, जो खतीब के ही संरक्षण में फल फूल रहा है ।

नुसरत जहां ने मीटिंग में वार्ड में व्याप्त भ्रस्टाचार का मुद्दा उठाया, और जनता के पैसे की बर्बादी को रोकने का अनुग्रह किया, उन्होंने कहा कि हमे नगर परिषद् में साढ़े चार साल हो चुके हैं, और हमे जनता को काम का हिसाब देना पड़ेगा, जिसके बाद खतीब उखड गए और उन्होंने नुसरत का अपमान करना शुरू कर दिया । जबकि नुसरत ने खतीब को कुछ नहीं कहा था, सिर्फ भ्रस्ट अफसरों की शिकायत की थी, लेकिन ना जाने क्यों इस बात पर खतीब कुपित हो गए।

उन्होंने नुसरत को बोलने से मना कर दिया, और कहा कि आपको बोलने कि जरूरत नहीं है, आप अपनी जगह पर जा कर बैठ जाओ, हम आपके पति से बात करेंगे। नुसरत के पति रईस अहमद भी कांग्रेस के सदस्य हैं और वो भी अपने साफ़ व्यवहार और समाजसेवा के लिए जाने जाते हैं।

खतीब की इस अपमानजनक बात से नुसरत जहां को बुरा लगा, लेकिन उन्होंने पूरे सम्मान के साथ कहा की वो नगरसेविका हैं, और अपनी जिम्मेदारियों को निभाना उन्हें आता है , इसलिए इस मामले के बाबत उनसे ही बात की जाए, और उनके पति का इस मुद्दे से कोई लेना देना नहीं है।

नुसरत जहां ने कहा कि अफसर और ठेकेदार हमारी बात नहीं सुनते हैं, हम जनसेवा के काम कैसे करवाएं? ऊपर से इतना भ्रस्टाचार है, उस पर कोई कार्यवाही नहीं होती है, इसका कोई जवाब नहीं देता है । इस बात पर खतीब को गुस्सा आया और उन्होंने बड़े ही अभद्र लहजे में नुसरत से वापस जा कर सीट पर बैठने को कहा और उनका अपमान भी किया।

नुसरत को ऐसे अपमान की आशा नहीं थी, वो इस वाकये से अवाक रह गयी और इस अपमान का विरोध करने के लिए उन्होंने अपनी चप्पल को टेबल पर रख दिया। इस बात से खतीब का पारा सातवे आसमान पर पहुँच गया और उन्होंने नुसरत के पति को बुलाया और कहा कि अपनी पत्नी को लेकर यहाँ से बाहर निकल जाओ, अन्यथा आपके साथ बुरा हो सकता है।

रईस अहमद ने बीच बचाव करते हुए कहा कि मुद्दे कि बात करनी चाहिए, ना कि इस तरह से महिला का अपमान करना चाहिए। ये सुनकर खतीब का गुस्से का कोई परिवार ना रहा और उन्होंने रईस को धमकी देते हुए कहा कि यहाँ से तुरंत चले जाओ, वर्ण अंजाम भुगतना पड़ेगा।

आप नीचे दिए गए वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह से बदतमीजी की जा रही है।

Video Credit – Zee News

खतीब यहीं नहीं रुके और अपमान जारी रखा , ये देख वहां उपस्थित अन्य नगरसेवकों ने भी उन्हें एक महिला का इस प्रकार अपमान करने से परहेज रखने को कहा । नुसरत ने कोई बुरा नहीं कहा, सिर्फ काम के सिलसिले में ही बात की है, उनका जवाब देने के बजाय उनका अपमान करना कहाँ का न्याय है। उसके बाद खतीब ने रईस को बाहर जाने को कहा, और मीटिंग संपन्न हुई।

इस घटना के बाद नुसरत और रईस ने इस बात की शिकायत महाराष्ट्र कांग्रेस और केंद्रीय नेतृत्व को भी की, लेकिन उनके पास आज तक कोई जवाब या किसी तरह का आश्वासन नहीं दिया गया है। अब दोनों ने नगर परिषद् में व्याप्त भ्रस्टाचार की शिकायत वहाँ के कलेक्टर ने करने का मन बना लिया है, और इसी बाबत वे जल्दी ही कार्यवाही करेंगे।

कौन हैं सैय्यद एनोदीन खतीब?

खतीब कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं, और फिलहाल नगर परिषद् बालापुर के नागा अध्यक्ष हैं । इनके पिता नातीकुद्दीन खतीब भी कांग्रेस के सदस्य रहे हैं, और इलाके में इनका काफी प्रभुत्व भी है। वो MLC भी रहे हैं और नगर परिषद् के अध्यक्ष भी रहे हैं, इस वजह से स्थानीय ठेकेदारों और अफसरों पर उनका प्रभुत्व रहा है। और यही वजह है कि इस परिवार के लोग भ्रस्टाचार में लिप्त हो गए हैं ।

इन लोगो ने यहाँ नगर अध्यक्ष, ठेकेदार और अफसरों का एक गठजोड़ बना लिया है, जो विकास के नाम पर सरकारी पैसे को हड़प जाते हैं, और जनता के काम नहीं करते। इस वजह से इलाके में विकास कार्य भी नहीं हो पाते हैं, और जो काम होता भी है, वो स्तर का नहीं होता।

सबसे बड़ी बात ये है, कि इन लोगो पर कोई एक्शन भी नहीं होता, अगर कोई इनके भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाता है, तो उसे चुप करा दिया जाता है, या नुसरत जहां की तरह उसका अपमान किया जाता है।

इस घटना के बाद नुसरत और रईस रोष में हैं, क्युकी उन्होंने केवल अपनी जिम्मेदारी ही निभाई थी, एक नगर सेविका के रूप में नुसरत ने वही किया जो एक ईमानदार सेवक को करना चाहिए था, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ अपमान और धमकी मिली, वो भी उन्ही की पार्टी के नगर अध्यक्ष से।

नुसरत और रईस कई सालो से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं, और दोनों ने ही कई सरकारी स्कीम को जन जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूकिए निभायी है। चाहे गरीबो के लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड बनवाना हो, चाहे उनके लिए गैस कनेक्शन और घर का निर्माण कार्य हो, कोई अन्य जनसेवा वाली स्कीम हो, गौ सेवा के कार्य हो, या फिर जन जाग्रति के अभियान हो, ये दंपत्ति हर जगह आगे ही रहती है, और बदले में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

सबसे ज्यादा व्यथित वो इस बात से हैं, कि कांग्रेस नेतृत्व को घटना की जानकारी देने के बाद भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया है, भ्रष्ट लोगो पर कार्यवाही करना तो दूर की बात है। ऐसे अपमान और अनदेखी के बाद अगर दोनों कांग्रेस छोड़ दें या राजनीती छोड़ दें, तो इसमें किसका नुक्सान होगा? जाहिर है इससे समाज का ही नुक्सान होगा, क्यूंकि इतने कर्मठ और समर्पित कार्यकर्त्ता आज के जमाने में मिलते ही कहाँ हैं।

लेकिन कांग्रेस नेतृत्व से ऐसी स्थिति में कोई कार्यवाही करने की हमे तो उम्मीद कम ही लगती है, और इस वजह से कांग्रेस का ही नुक्सान होगा,क्यूंकि इतने समर्पित कार्यकर्ताओ का खुलेआम अपमान होगा तो धीरे धीरे लोग कांग्रेस छोड़ने में ही भलाई समझेंगे।

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