रामनवमी पर पूजा रोकने को लेकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुआ बवाल ।

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रामनवमी के दिन पूजा का विरोध करने और मेस में मांसाहार बनाए जाने को लेकर बवाल हो गया।


विवाद इतना बढ़ गया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और वामपंथी छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच लात घूंसे चलने के साथ ही पानी की बोतलें तक चल गई।


दोनों तरफ से 10 छात्र घायल हुए हैं पुलिस मामले की जांच कर रही है ।
रविवार को रामनवमी पर कावेरी छात्रावास के छात्रों ने दुर्गा पूजा आयोजित की थी । इसके पोस्टर 3 दिन पहले परिसर में लगाए गए थे।


आरोप है कि दोपहर करीब 3:00 बजे वामपंथी संगठन के साथी एनएसयूआई के छात्रों ने पूजा के विरोध में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया ।


इसके बाद शाम को मेस में मांसाहार बनवाना शुरू कर दिया पता चलने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ताओं ने विरोध किया ।


उनका कहना था कि रविवार को मेस में शाकाहारी छात्रों के लिए पनीर और मांसाहारी छात्रों के लिए चिकन बनाए जाने की व्यवस्था है ।


लेकिन जब रामनवमी है और पूजा चल रही है तो मांसाहार ना बनाया जाए ।


विवाद बढ़ा और मारपीट शुरू हो गई। उस समय किसी तरह माहौल को शांत किया गया ,लेकिन देर शाम फिर दोनों गुट आमने सामने आ गए, और प्रदर्शन करने लगे एक दूसरे पर पानी की बोतलों से हमला किया ।


अब आप सोच सकते हैं कि कितनी नफरत करते हैं वामपंथी छात्र संगठन रामनवमी के त्योहार से।


एक तरफ वामपंथी संगठन कहते हैं हमें आपसी सौहार्द बनाए रखना चाहिए, हमें सब धर्मों का पालन करना चाहिए और उन्हीं के छात्र गुट के लोग रामनवमी पर इस तरह का बवाल मचाते हैं।


यह रामनवमी का विरोध नहीं है बल्कि हिंदुओं की आस्था का विरोध है, वोट बैंक की राजनीति का परिणाम है ।


जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से इन वामपंथी छात्र संगठनों के कब्जे में रहा है ,लेकिन अब जब से लोगों में जागरूकता आई है ,तब से इस विश्वविद्यालय पर उंगलियां उठने लगी है।

यही बात चुभ रही है इन वामपंथी छात्र संगठनों को।
श्री राम नवमी के पावन पर्व पर मांसाहार का भोजन बनाकर उन्होंने हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है ।

क्या ऐसा यह किसी और धर्म के साथ करने का सोच सकते हैं ? नहीं यह केवल हिंदुओं के खिलाफ ही ऐसा कर सकते हैं।

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