गजवा-ए-हिंद – भारत के खिलाफ एक इस्लामी साजिश, इसका ब्लूप्रिंट, और हिंदू इसे कैसे रोक सकते हैं?

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Picture Credit - Trunicle

अगर आप किसी इस्लामी कट्टरपंथी से उनके लंबे समय से संजोए हुए सपने के बारे में पूछेंगे, तो आपको केवल एक ही जवाब मिलेगा, गजवा-ए-हिंद। हालांकि यह शब्द सैकड़ों वर्षों से हम सुनते आ रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इसने लाइमलाइट हासिल की है। इस शब्द का इस्तेमाल कट्टरपंथी इस्लामी समूहों, इंडियन मुजाहिदीन, आईएसआईएस और अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा भी किया गया है, और ऐसा लगता है कि यह उनकी दीर्घकालिक योजना का एक हिस्सा है।

गजवा-ए-हिंद अब हमारी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है, और नेताओं ने इस पर खुलकर चर्चा शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 फरवरी को अपने ट्वीट में कहा था कि ‘कयामत’ तक गजवा-ए-हिंद का सपना पूरा नहीं होगा। एएनआई से बात करते हुए, सीएम योगी ने कहा, “‘गजवा-ए-हिंद’ का सपना देखने वालों के लिए, यह पीएम मोदी के नेतृत्व में नया भारत है। नया भारत सभी के विकास के लिए है, लेकिन किसी का तुष्टीकरण नहीं है। यह संविधान के अनुसार चलेगा, शरीयत के अनुसार नहीं। ‘गजवा-ए-हिंद’ का सपना कयामत के दिन तक साकार नहीं होगा।

इस लेख में हम आपको गजवा-ए-हिंद को समझने में मदद करेंगे, इस मिशन को हासिल करने का इस्लामिक ब्लूप्रिंट बताएँगे, और ये भी बताएँगे कि हिंदू को इस बारे में क्या करना चाहिए।

गजवा-ए-हिंद क्या है?

यह शब्द हदीस से लिया गया है, जहां पैगंबर ने कहा था – ‘अल्लाह ने मेरे उम्माह के दो समूहों को नरक की आग से बचाया है; वह समूह जो अल-हिंद (भारतीय उपमहाद्वीप) पर हमला करेगा, और जो मरियम के बेटे ईसा (यीशु) के साथ होगा।

अबू हुरैरा ने कहा – पैगंबर ने हमें अल-हिंद की विजय का वादा किया है। यदि मैं इसमें शामिल होने में सक्षम हूं, तो मैं इस पर अपनी संपत्ति और अपना जीवन खर्च करूंगा। अगर मुझे मार दिया जाता है, तो मैं शहीदों में से सबसे उच्च स्थान पाउँगा और अगर मैं वापस आऊंगा, तो मैं नरक की आग से मुक्त हो जाऊंगा।

सरल शब्दों में, इसे “भारत के खिलाफ पवित्र युद्ध” माना जा सकता है। यह एक युद्ध है जो पैगंबर के मार्गदर्शन में लड़ा जाता है, और ऐसा माना जाता है कि जो कोई भी इस युद्ध को लड़ता है वह जन्नत में जाएगा। गजवा-ए-हिंद के बारे में कहा जाता है कि कयामत से पहले दो युद्ध होंगे और जब तक मुसलमान इन दो युद्धों को नहीं जीतते हैं, तब तक कोई कयामत नहीं होगी।

सुनन-नासाई, बुक ऑफ जिहाद, 3175 के अनुसार, यह हर मुसलमान का कर्तव्य है कि वह दुनिया में ऐसी परिस्थितियां पैदा करे कि लोग मूर्ति पूजा करना बंद कर दें। इसलिए पहला युद्ध हिंदुओं के खिलाफ होगा और यह पवित्र युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक कि सभी मूर्ति पूजा करने वाले इस्लाम में परिवर्तित नहीं हो जाते। फिर सीरिया की एक दूसरी सेना रोम पर हमला करेगी और इस दुनिया में हर व्यक्ति मुस्लिम बन जाएगा।

गजवा-ए-हिंद – भारत के लिए ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

जहां तक भारत का सवाल है, यह इस्लामी आक्रमणकारियों के लगातार निशाने पर रहा है, जो भारत को दार-अल-इस्लाम बनाने के बहाने हमला करते रहे। हमारे पूर्वजों ने पहले से ही शुरुआती या मध्ययुगीन इस्लामी काल में गजवा-ए-हिंद का अनुभव किया है। भारतीय उपमहाद्वीप को दार-अल-हर्ब के रूप में देखा गया था, जिसका अर्थ है “युद्ध का घर या निवास” या “युद्ध का क्षेत्र”।

मूल रूप से, इसे एक ऐसे क्षेत्र के रूप में देखा गया था जो इस्लाम द्वारा शासित नहीं था, और भारत को इस्लामी शासन के तहत लाने और इसे दार-अल-इस्लाम बनाने के लिए इस्लामिक आक्रमकारियों ने हम पर साल दर साल हमले किये गए । इन युद्धों के अलग-अलग कारण और संदर्भ थे – चाहे वह मुहम्मद बिन कासिम द्वारा सिंध की विजय हो या मध्ययुगीन काल के दौरान विभिन्न मुस्लिम आक्रमणकारियों के तहत इस्लामी शासन हो।

सौभाग्य से हमारे बहादुर पूर्वज थे, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, पृथ्वीराज चौहान, दाहिर, पृथु, विश्व सिंघा, ललितादित्य मुक्तपिडा, राजा सम्ग्रामराजा, प्रतिहार, चालुक्य, राष्ट्रकूट, गुहिल, नाइकी देवी, देवपाला, जोगराज सिंह गुर्जर जैसे, जिनके दिखाए गए प्रतिरोध और वीरता के कारण गजवा-ए-हिंद का इस्लामिक सपना अभी तक पूरा नहीं हो पाया।

कट्टरपंथी मौलाना और आतंकवादी संगठनो ने दशकों से मुसलमानो को भड़काया है, गुमराह किया है, और इसके लिए उन्होंने “गजवा-ए-हिंद” को एक बहाना बनाया है, इसका उपयोग करके ये लोग मुसलमानो को अपने संगठनों में शामिल होने के लिए उकसाते हैं, और उन्हें बरगलाते हैं कि उस हर इंसान को मार देना चाहिए जो इस्लामी दर्शन में विश्वास नहीं करते हैं, जिन्हे काफिर कहा जाता है।

भारत के मामले में, गजवा-ए-हिंद का उपयोग मुसलमानों को भारत के खिलाफ विद्रोह करने के लिए उकसाने के लिए एक भ्रामक आंदोलन के रूप में किया गया है। मुसलमानों में ज्ञान की कमी इतनी अधिक है कि वे इस आंदोलन के बारे में नहीं जानते हैं, मौलाना उन्हें कुरआन और हदीस कि आयतो को तोड़ मरोड़कर बताते हैं, और इनका हवाला देकर अपने ही देश के खिलाफ लड़ने के लिए भड़काया जाता है।

गजवा-ए-हिंद – इस्लामिक संगठनो का भारत पर कब्जे का ब्लूप्रिंट

आजादी के बाद से पाकिस्तान ने गजवा-ए-हिंद को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से भारत पर 3 बार हमला किया, लेकिन वह हर बार बुरी तरह विफल रहा। दुर्भाग्य से, हमारे मुस्लिम समर्थक राजनीतिक दल, सेक्युलर संविधान, और अत्यधिक कट्टरपंथी मुल्ला और मौलवियों ने गजवा-ए-हिंद के बुरे मिशन को अंजाम देने में पाकिस्तान की मदद की।

इस मिशन के दो मूल उद्देश्य हैं

  • भारत की अर्थव्यवस्था पर कब्जा करना
  • भारत के लोकतंत्र को नष्ट करना

भारत की अर्थव्यवस्था पर कब्जा करने का ब्लूप्रिंट

  • वक्फ बोर्ड के माध्यम से अधिकतम भूमि पर कब्जा करना। वर्तमान में, वक्फ बोर्ड के पास 5 लाख एकड़ से अधिक भूमि है, और यह भारत में तीसरा सबसे बड़ा भूस्वामी है।
  • हलाल अर्थव्यवस्था जो तेजी से बढ़ रही है, मुस्लिम रोजगार के लिए विशेष प्रावधान और बिना किसी प्रयास के मुसलमानों को बहुत सारा पैसा देती है। खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों, एफएमसीजी और यहां तक कि कपड़ों के लिए हलाल प्रमाणन शुरू कर दिया गया है।
  • सरकार से अधिकतम ऋण और अन्य विशेषाधिकार और सुविधाएं प्राप्त करें और छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों पर कब्जा करें।

भारत के लोकतंत्र को नष्ट करने का ब्लूप्रिंट

किसी भी लोकतंत्र की शक्ति अंततः संख्या में ही निहित है। 1947 में मुस्लिम आबादी 9% थी, जबकि 2011 में यह बढ़कर 14.5% हो गई, और अब यह निश्चित रूप से जनसंख्या जिहाद के 3-बिंदु दृष्टिकोण को नियोजित करके 20% से अधिक है।

  • प्रजनन – यह ज्यादा बच्चे पैदा करने कि योजना है। मुसलमानों को बहुविवाह की अनुमति है, इसलिए उनकी प्रजनन दर किसी भी अन्य धर्म की तुलना में तेज है। वे हिंदू महिलाओं को प्रभावित करने और मुस्लिम बच्चों को पैदा करने के लिए लव जिहाद प्रथा पर भी भरोसा करते हैं।
  • धर्मांतरण – यह किसी अन्य धर्म के लोगों को अवैध रूप से इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए है। इस उद्देश्य के लिए बहुत सारे तौर तरीके और पेट्रो-डॉलर के पैसे का उपयोग किया जाता है। यहां तक कि जय भीम – जय मीम आंदोलन भी एससी / एसटी और दलितों को इस्लाम में धर्मान्तरित करने की एक साजिश है।
  • घुसपैठ – लाखों बांग्लादेशी और रोहिंगा अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कर रहे हैं और कदम-दर-कदम प्रणाली के माध्यम से नागरिकता प्राप्त कर रहे हैं। स्थानीय राजनेता, मुस्लिम नेता और हैंडलर उन्हें सभी प्रासंगिक दस्तावेज प्राप्त करने में मदद कर रहे हैं।

गजवा-ए-हिंद को हिन्दू कैसे रोक सकते हैं ?

इस समय भारत एक मुश्किल समय से गुजर रहा है, जहाँ हम पर हर तरफ से हमले किये जा रहे हैं, हमारे विरोधी इस्लाम के प्रसार के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए हर चाल आजमा रहे हैं। एक नागरिक के रूप में हमें अपनी सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए और अपने राष्ट्र और धर्म के खिलाफ इस नापाक एजेंडे को तोड़ने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए।

  • WAQF बोर्ड अधिनियम को समाप्त करें
  • हलाल इकॉनमी को रोका जाए
  • अल्पसंख्यक मंत्रालय को समाप्त करें और सभी अनन्य अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति और मुफ्त सुविधाएं बंद करें
  • लव जिहाद पर तत्काल प्रतिबंध लगाएं
  • जनसंख्या नियंत्रण विधेयक लागू करें
  • बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया जाए
  • इस्लामिक NGO को विदेशी वित्त पोषण पर प्रतिबंध
  • मुस्लिमों के धर्म परिवर्तन पर प्रतिबंध
  • CAA और NRC लागू करें
  • हिंदू समुदाय को मजबूत करें

इन कदमों का पालन करके हम निश्चित रूप से न केवल गजवा-ए-हिंद के उनके लंबे समय से पोषित सपने को तोड़ सकते हैं, बल्कि हिंदुओं को एक साथ एकजुट कर सकते हैं, जो हमें भविष्य में इस तरह के किसी भी हमले को रोकने में मदद करेगा।

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