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आदिपुरुष: सनातनास्थायामाघात: वा ? आदिपुरुष अथवा सनातन आस्था पर चोट ?

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वनवासकाळम् सीता महोदयायाः मेलनम् ऋषि अत्रे: भार्या महासती मातानसुयाया भूतस्य वृतांतमागच्छति ! कथ्यते मातानुसुया सीता महोदयाम् पतिव्रत धर्मस्य पालनस्य शिक्षा दत्तेन सह-सह तया दिव्य वस्त्राभूषणम् प्रदत्ता यत् कदापि मलिन न भवति स्म एवं सदैव स्वच्छम्, निर्मलम् एवं श्वेतम् रमति स्म !

वनवास के दौरान सीताजी की भेंट ऋषि अत्रि की पत्नी महासती माता अनुसुइया से होने का वृतांत आता है ! कहते हैं माता अनुसुइया ने सीताजी को पतिव्रत धर्म का पालन करने की शिक्षा देने के साथ-2 उन्हें दिव्य वस्त्र आभूषण प्रदान किए जो कभी मैले नहीं होते थे एवं सदैव स्वच्छ, निर्मल एवं उजले रहते थे !

सामान्यरूपेण रामायणस्य फिल्मांकनस्य काळं सर्वत्र श्रीरामम्, लक्ष्मणम् एवं सीता महोदयाम् वनवासी रूपेषु वल्कल वस्त्राणि एव धारयत् प्रदर्शयते ! “दिव्य बसन भूषन पहिराए ! जे नित नूतन अमल सुहाए !!” अर्थतः मातानुसूया तया इदृशं दिव्य वस्त्राणि आभूषणम् च् परिधायते, यत् नित्य-नव निर्मलं शोभनम् च् रमन्ते !

सामान्य रूप से रामायण के फिल्मांकन के दौरान सभी जगह श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीताजी को वनवासी रूप में वल्कल वस्त्र ही धारण किए हुए दर्शाया जाता है ! “दिव्य बसन भूषन पहिराए। जे नित नूतन अमल सुहाए॥” अर्थात माता अनुसुया ने उन्हें ऐसे दिव्य वस्त्र और आभूषण पहनाए, जो नित्य-नए निर्मल और सुहावने बने रहते हैं !

वर्तमानेव प्रदर्शितं आदिपुरुष चलचित्रे सीता महोदयायाः भूमिकाभिनीता नायिकायाः कुरूप गात प्रदर्शयत् वस्त्राणि द्रष्टु ! किं सीता महोदया वनवासे अस्य प्रकारम् केशानि प्रसारन्ती, ब्रा टाइप ऑफ शोल्डर कंचुकी धारित्वा चतुर्विंशति घटकानि श्रीराम महोदयेण सह रोमांस इति कर्तुं रमति स्म !

हाल ही में प्रदर्शित आदिपुरुष फिल्म में सीताजी की भूमिका निभाने वाली नायिका के बदरंग शरीर दर्शाते हुए वस्त्र देखिए ! क्या सीताजी वनवास में इस प्रकार जुल्फें फैलाए हुए, ब्रा टाइप ऑफ शोल्डर ब्लाउज पहनकर चौबीसों घंटे श्रीरामजी के साथ रोमांस करती रहतीं थीं ?

जगन्माता जानक्या: इयत् कुत्सित चित्रांकनं ? अद्य वयं स्वरम् नोत्थाम तु श्वम् तु तुभ्यं सीता महोदयाम् बिकिनी धारित्वा सरे स्नातुमपि प्रदर्शितमस्ति तर्क: च् दाष्यते तत किं सीता महोदया इयत् वर्षाणि एव वने स्नातुं न भविष्यति तु प्रदर्शे किं संकटमस्ति ! मूर्ख: अवगम्यतु किं ?

जगतमाता जानकी का इतना कुत्सित चित्रांकन ? आज हम आवाज ना उठाएं तो कल को तो तुम्हें सीताजी को बिकिनी पहने सरोवर में नहाते भी दिखा देना है और तर्क दिया जाएगा कि क्या सीताजी ने इतने वर्षों तक वन में नहाया नहीं होगा तो दिखाने में क्या हर्ज है ! बेवकूफ समझ रखा है क्या ?

इयतेव न, रामायणस्यानुसारम् वनवासकाळम् भगवतः श्रीराम: वनक्षेत्रे वासिन: ऋषिणां पूजने यज्ञे वा विघ्नकर्ता: बहूनां असुराणां वध कृत्वा पंचवटिम् असुरेभ्यः अवमोचयत् ! रामानंद सागर महोदयेण निर्देशित: रामायणे अपि श्रीराम महोदयम् पूजन कर्तुं, यजूणां रक्षतुं ऋषिभिः मुनिभिः सह सत्संग कर्तुं एव प्रदर्शयत् !

इतना ही नहीं, रामायण के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने वनक्षेत्र में रहने वाले ऋषियों के पूजा पाठ व यज्ञादि में विघ्न डालने वाले अनेक राक्षसों का वध कर पंचवटी को राक्षसों से मुक्त कराया ! रामानंद सागर जी द्वारा निर्देशित रामायण में भी श्रीरामजी को पूजा-पाठ करते, यज्ञों की रक्षा करते व ऋषि मुनियों के साथ सत्संग करते ही दिखाया गया है !

तु रचनात्मक स्वतंत्रतायाः नामनि कोट्यः सनातनी रामभक्तानां भावना: आहतस्य प्रयत्न कर्ता चलचित्रमादिपुरुषस्यानुसारम् तु भगवतः श्रीराम: सीता महोदया वने अस्य प्रकारम् परस्परं आलिंग्य, रोमांस इति कर्तुं दृश्यतः यथा तौ वनवासे न, हनीमून इति कर्तुं गतवंतौ !

परंतु रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर करोड़ों सनातनी रामभक्तों की भावनाओं को आहत करने का प्रयास करने वाली फिल्म आदिपुरुष अनुसार तो भगवान श्रीराम व सीताजी वन में इस प्रकार एक दूसरे से चिपके, रोमांस करते दिखाई दे रहे हैं जैसे वे वनवास पर नहीं, हनीमून मनाने गए हों !

भगवतः श्रीराम: माता सीता पूर्ण वन्यकाले ब्रह्मचर्यस्य पालितवंतौ स्म तु अस्य चलचित्रस्य अनुसारम् तु यथा तौ तत्र भोगस्यातिरिक्तं अन्य कार्यमेव न कृतवन्तौ ! पूर्ण चलचित्रे अस्यैव प्रकारस्यापत्तिपूर्ण दृश्यानि सन्ति !

भगवान श्रीराम व माता सीता ने पूरे वनवास काल में ब्रह्मचर्य का पालन किया था परंतु इस फिल्म के अनुसार तो जैसे उन्होंने वहाँ भोग के अतिरिक्त और कुछ किया ही नहीं ! पूरी फिल्म में इसी तरीके के आपत्तिजनक दृश्य हैं !

अद्य यदि भवान् रचनात्मक स्वतंत्रतायाः नामनि यै: अस्य अभद्राचरणस्य स्वतंत्रता दाष्यति तु श्वम् इमे वामपंथिन: भांड अस्माकं आराध्यान् लिपलॉक चुम्बन कृतरपि प्रद्रक्ष्यन्ते तर्क: च् दाष्यन्ते तत राम सीता च् दंपति आस्ताम् तु किं तयो संसर्ग इति भवितुं न भविष्यत: ? तु प्रदर्शने किं दोष: अस्ति ?

आज अगर आप रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर इन्हें इस छिछोरेपन की छूट देंगे तो कल को ये वामपंथी भांड हमारे आराध्यों को लिपलॉक किस करते भी दिखाएंगे और तर्क देंगे कि राम और सीता पति पत्नी थे तो क्या उनमें संसर्ग नहीं होता होगा ? तो दिखाने में क्या बुराई है ?

भवान् स्वच्छन्दता दत्वा ददातु यै: इदृशं-इदृशं कुत्सित वामी प्रयोग: करिष्यन्ति अस्माकं पवित्र देवी-देवै: सह तत भवता दर्शितुं न शक्ष्यते ! हिंदुत्वम् किमवगम्यत यूयम् ?

आप छूट देकर देखिए इन्हें ये ऐसे-2 कुत्सित वामी प्रयोग करेंगे हमारे पवित्र देवी देवताओं के साथ कि आपसे देखा नहीं जाएगा ! हिंदुत्व को समझ क्या रखा है तुम लोगों ने ?

अस्माकं अग्रिम वंशान् सीता महोदयायाः रूपे सलज्ज, शालिनी दीपिका चिखलिया महोदया यथादर्श स्वरूपस्य स्थाने इयमर्धनग्न, कचाचित राक्षसी कृति सेनन स्मरणागच्छतु इदम् व्यवस्था क्रियते ! न करिष्यामः वयं स्वीकार्य !

हमारी आगामी पीढियों को सीताजी के रूप में सलज्ज, शालीन दीपिका चिखलिया जी जैसे आदर्श स्वरूप के स्थान पर यह अधनंगी, बाल बिखराए राक्षसी कृति सेनन स्मरण आए यह व्यवस्था की जा रही है ! नहीं करेंगे हम बर्दाश्त !

याः चपि आदिपुरुषे हिंदू धर्मस्यारध्यानां विकृत चित्रांकनस्य समर्थन: कुर्वन्ति तै: ममाग्रहास्ति येनैव प्रकारेणान्यानां संप्रदायानां आदरणीय चरित्रै: सह रचनात्मक स्वतंत्रतायाः प्रदर्श्य दर्शयन्तु नैव हिंदुत्वम् तस्य स्थित्यां त्यजन्तु !

और जो भी लोग आदिपुरुष में हिंदू धर्म के आराध्यों के विकृत चित्रांकन का समर्थन कर रहे हैं उन सभी से मेरा आग्रह है इसी तरह से अन्य संप्रदायों के आदरणीय चरित्रों के साथ रचनात्मक स्वतंत्रता का प्रदर्शन करके दिखाएं अन्यथा हिंदुत्व को उसके हाल पर छोड़ दें !

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