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आगच्छतु स्वेतिहासम् ज्ञायतु ! सम्यक् ज्ञानाय स्व इतिहासस्य समक्षम् बभूव ! आओ अपना इतिहास जाने ! बेहतर ज्ञान के लिए अपने इतिहास के समक्ष हों !

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केवल प्रतीक चित्र

महाराज विक्रमादित्यपरमारम् प्रति देशम् लगभगम् किंचित ज्ञानमस्ति, सुवर्णस्य चटका तर्हि स्मरणम् अस्ति तु कः निर्मितं ततापि ज्ञायतु अस्माकं च् हिंदू कैलेंडर पंचांगस्य संवतस्य चारंभ कः कृतः !

महाराज विक्रमादित्य परमार के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, सोने की चिड़िया तो याद है लेकिन किसने बनाई वो भी जाने और हमारे हिन्दू कैलेंडर पंचांग और सम्वत की शुरुवात किसने की !

यः भारतं सुवर्णस्य चटका निर्मितमासीत् स्वर्णिम काळम् चानीतमासीत् ! अस्यैव नाम्ना विक्रमी संवतं चरति ! उज्जैनस्य महान राजपूत नृपरासीत्, गन्धर्व सेन परमार:, त्रय: संतत्य: आसीत् !

जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था और स्वर्णिम काल लाया था ! इन्हीं के नाम से विक्रमी संवत चलता है ! उज्जैन के महान राजपूत राजा थे, गन्धर्वसेन परमार, जिनके तीन संताने थी !

सर्वात् वया बालिकासीत् मैनावती, तस्याः लघु बालक: भतृहरि सर्वात् लघु च् वीर विक्रमादित्य:, भगिनी मैनावत्या: पाणिग्रहण धारानगर्याः नृप: पदमसेनेण सह कृतवान, यस्या: एकः बालक: अभवत्, गोपीचंद: !

सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती, उससे छोटा लड़का भतृहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य, बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसेन के साथ कर दी, जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द !

अग्रे गत्वा गोपीचंद: श्री ज्वालेन्दर नाथ महोदयेण योग दीक्षा नीतवन्तः तपः कर्तुं च् वनेषु गतवन्तः, पुनः मैनावत्यापि श्री गुरू गोरक्ष नाथ महोदयेण योग दीक्षाम् नीतवती !

आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए, फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली !

अद्येदम् देशमत्रस्य च् संस्कृति केवलं विक्रमादित्यस्य कारणमस्तित्वे अस्ति ! अशोक मौर्य: बौद्ध धर्म स्वीकृतवान स्म बौद्ध भूत्वा २५ वर्षाणि राज्यं कृतवान स्म ! भारते तदा सनातन धर्मम् लगभगम् समापने आगतवान स्म, देशे बौद्ध: जैन: च् अभवतामस्ताम् !

आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमदित्य के कारण अस्तित्व में है ! अशोक मौर्य ने बौद्ध धर्म अपना लिया था और बौद्ध बनकर 25 साल राज किया था ! भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे !

रामायण महाभारत यथा ग्रन्थानि विस्मृतवान स्म, महाराज विक्रम: इव पुनः तस्यान्वेषणम् कृत्वा स्थापित: ! विष्णो: शिव महोदयस्य च् मंदिरम् निर्मित्वा सनातन धर्मम् रक्षित: !

रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया ! विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाकर सनातन धर्म को बचाया !

विक्रमादित्यस्य नवरत्नेषुतः एकः कालिदास: अभिज्ञान शाकुन्तलमलिखत्, यस्मिन् भारतस्य इतिहासमस्ति नैव भारतस्येतिहासम् किं मित्राणि वयं भगवतः कृष्णम् रामम् च् इव विस्मृतवन्तः स्म, अस्माकं ग्रन्थमिव भारते विस्मृतस्य तटे आगतवान स्म !

विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमें भारत का इतिहास है अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रों हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे, हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे !

तत काळम् उज्जैनस्य नृप: भतृहरि राज्यं त्यक्त्वा श्री गुरू गोरक्ष नाथ महोदयेण योगस्य दीक्षा नीतवान तपः कर्तुं च् वनेषु गतवान, राज्यं स्वानुज: विक्रमादित्यम् दत्तवान !

उस समय उज्जैन के राजा भतृहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए, राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया !

वीर विक्रमादित्य: अपि श्री गुरू गोरक्ष नाथ महोदयेण गुरू दीक्षा गृहीत्वा राज्यकार्यं करिष्यते अद्य च् तस्यैव कारणम् सनातन धर्ममवशेषमस्ति, अस्माकं संस्कृतिमवशेषमस्ति !

वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्हीं के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है !

महाराज विक्रमादित्य: केवलं धर्ममेव न रक्षित:, सः देशमार्थिक रूपे सुवर्णस्य चटका कृतवान, तस्य राज्यं इव भारतस्य स्वर्णिम राज्यं कथ्यते ! विक्रमादित्यस्य काले भारतस्य वस्त्राणि, वैदेशिक वणिजा: सुवर्णस्य भारेण क्रयन्ति स्म !

महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया, उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाया, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है ! विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यापारी सोने के वजन से खरीदते थे !

भारते इयत् सुवर्णमागतवान स्म तत विक्रमादित्य काले सुवर्णस्य मुद्रा: चरति स्म, भवन्तः गूगल इमेज कृत्वा विक्रमादित्यस्य सुवर्णस्य मुद्रा: दर्शितुं शक्नोन्ति ! हिंदू कैलेंडर पंचांगमपि विक्रमादित्यस्य स्थापितं कृतमस्ति !

भारत में इतना सोना आ गया था कि विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे, आप गूगल इमेज कर विक्रमदित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं !हिन्दू कैलंडर पंचांग भी विक्रमदित्य का स्थापित किया हुआ है !

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