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Tuesday, September 21, 2021

ब्राह्मण मतानि लुब्धस्य कार्यविधिम्, किं ब्राह्मणा: राष्ट्रीयताया: सहाय्य करिष्यन्ति पुनः वा…………? ब्राह्मण वोट को लुभाने की कवायद, क्या ब्राह्मण राष्ट्रीयता का साथ देगा या फिर…………?

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उत्तर प्रदेशे अग्रिम् वर्षम् भवक: विधानसभा निर्वाचनम् गृहीत्वा राजनैतिक गतिविधिन: तीव्रम् अभवत्, यस्मिन् सर्वाणि राजनीतिक दलानि अधिक तः अधिकम् मतदातानां सामजस्य च् तान् समाजम् लुब्धस्य कार्यविध्याम् संलग्ना: !

उत्‍तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसमें सभी राजनीतिक दल अधिक से अधिक वोटर्स और समाज के उस तबके को लुभाने की कवायद में जुट गए हैं !

यत् तस्य जये निर्णायक भूमिकाम् निर्वहतुम् शक्नोन्ति ! बहुजन समाज दलस्य सामाजिक तकनीकस्य सूत्रमपि इदृशमेवास्ति, येन तत एकदा पुनः राज्यस्य सत्तायां पुनरागमनाय बलम् व्ययति !

जो उनकी जीत में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं ! बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला भी ऐसा ही है, जिसके जरिये वह एक बार फिर से राज्‍य की सत्‍ता में वापसी के लिए जोर लगा रही है।

अयोध्यायां २३ जुलैम् शंखध्वन्या: वेद मंत्रोच्चारस्य च् मध्य बसपायाः प्रबुद्ध वर्ग विचार संगोष्ठी इतस्य आयोजनम् अस्यैव दिशायां बर्धितं पगमस्ति !

अयोध्या में 23 जुलाई को शंखध्वनि और वेद मंत्रोच्‍चार के बीच बसपा के प्रबुद्ध वर्ग विचार संगोष्ठी का आयोजन इसी दिशा में बढ़ाया गया कदम है !

बसपा नेतारः कार्यकर्ता: च् इति काळम् जय भीम जय भारत इतस्य स्व चिरपरिचित उद्घोषाणां अतिरिक्त जय श्रीराम जय परशुराम इतस्योद्घोषाणां अपि उद्घोषिता:, यत् बसपायाः कश्चितैव सम्मेलने संभवतः प्रथमदा भविष्यति !

बसपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस दौरान जय भीम-जय भारत के अपने चिरपरिच‍ित नारों के अतिरिक्‍त जयश्रीराम और जय परशुराम के नारों का भी उद्घोष किया, जो बसपा के किसी सम्‍मेलन में संभवत: पहली बार लगे !

एतानि उद्घोषाणि २०२२ तमस्य विधानसभा निर्वाचनम् गृहीत्वा एकेन प्रकरेण बसपायाः राजनीतिक दिशाम् निश्चितं कृतवान ! दलै: ब्राह्मणान् संयुक्तस्य जिम्मेवारिम् बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रम् दत्तम् !

इन नारों ने 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर एक तरह से बसपा की राजनीतिक दिशा तय कर दी है। पार्टी से ब्राह्मणों को जोड़ने की जिम्‍मेदारी बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को दी गई है !

येन पूर्वमपि २००७ तमे अस्यैव राजनीतिक समीकरणस्याधारे बसपाम् सत्तायामानये महत्वपूर्ण भूमिकाम् निर्वहित: स्म इदम् प्रयोगम् सियासते च् सामाजिक तकनीकस्य नामे लोकप्रियमभवत् !

जिन्‍होंने पहले भी 2007 में इसी राजनीतिक समीकरण के आधार पर बसपा को सत्‍ता में लाने में अहम भूमिका निभाई थी और यह प्रयोग सियासत में सोशल इंजीनियरिंग के नाम से लोकप्रिय हो गया !

बसपा २००७ तमे ब्राह्मणान् स्वेण सह संयुक्ताय सर्व समाज इतस्योद्घोषम् दत्तम् स्म ! यद्यपि आरंभे कश्चितमपि इति राजनैतिक समीकरणस्य साफल्यं गृहीत्वा बहु आशाम् नासीत् !

बसपा ने 2007 में ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़ने के लिए ‘सर्व समाज’ का नारा दिया था। हालांकि शुरुआत में किसी को भी इस राजनीतिक समीकरण की सफलता को लेकर बहुत उम्‍मीद नहीं थी !

तु यदा परिणाममागतं तदा येन राजनीतिक विदुष: अपि विस्मिता: ! अधुना लगभगम् एकार्द्ध दशक अनंतरम् २०२२ तमस्य विधानसभा निर्वाचनायापि बसपा तैव प्रकारम् ब्राह्मणान् स्वेण सह संयुक्तस्य प्रयत्नम् कृतमस्ति !

लेकिन जब नतीजे आए तो इसने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया। अब करीब डेढ़ दशक बाद 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए भी बसपा ने उसी तरह ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है !

स्व इति अभियानस्य आरंभाय तत येन प्रकारम् अयोध्यायाः चयनम् कृतं, ततापि स्वच्छम् कृतवान त्त उत्तरप्रदेश विधानसभा निर्वाचने दलस्य दिशाम् किं भविष्यति !

अपने इस अभियान की शुरुआत के लिए उसने जिस तरह अयोध्‍या का चयन किया, उसने भी साफ कर दिया कि यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी की दिशा क्‍या होगी !

अयोध्यायाः मंचतः बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र: स्पष्टम् मथुरायां, काश्याम् चित्रकूटे अपि इदृशाणि सम्मेलनानामायोजनस्य कृतरैस्ति, यस्मात् स्पष्टमस्ति तत बसपा ब्राह्मणान् स्वेण सह संयुक्ते कश्चित गंभीरताया संलग्नम् !

अयोध्‍या के मंच से बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र स्‍पष्‍ट मथुरा, काशी (वाराणसी) और चित्रकूट में भी ऐसे सम्‍मेलनों के आयोजन का ऐलान कर चुके हैं, जिससे जाहिर है कि बसपा ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़ने में किस गंभीरता से जुटी हुई है !

बसपा पूर्वमपि बहु अवसरेषु भाजपायाः वर्तमान सर्वकारे ब्राह्मणानामोपेक्षायाः प्रकरणमोत्थितं ! दळं प्रदेशे अभवत् बहु समाघातेषु ब्राह्मणानां हननस्य प्रकरणमपि उत्थितं !

बसपा पहले भी कई अवसरों पर बीजेपी की मौजूदा सरकार में ब्राह्मणों की उपेक्षा का मसला उठा चुकी है। पार्टी ने प्रदेश में हुई कई मुठभेड़ों में ब्राह्मणों के मारे जाने का मसला भी उठाया !

येषुतः एकः नाम विकास दूबे यथा भयावह अपराधिण: अपि अस्ति ! येन दलम् आरोपम् आरोपितं तत भाजपायाः नेतृत्वम् वर्तमान सर्वकारः ब्राह्मण विरोधिनस्ति !

जिनमें से एक नाम विकास दूबे जैसे कुख्‍यात अपराधी का भी है ! इसके जरिये पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी की अगुवाई वाली मौजूदा सरकार ब्राह्मण विरोधी है !

उत्तर प्रदेश ब्राह्मण मतस्य महत्वस्यानुमानम् अस्यैव वार्ताया संनियुजितुम् शक्नोति तत अत्र लगभगम् प्रत्येक दलम् इति वर्गम् लुब्धस्य कार्यविध्याम् संलग्नानि ! वर्तमानैव जितिन प्रसादस्य कांग्रेसम् त्याजित्वा सम्मिलितमपि अस्यैव दृष्टिकोणेन दर्शितं !

यूपी में ब्राह्मण वोट की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां तकरीबन हर पार्टी इस वर्ग को लुभाने की कवायद में जुटी है। हाल ही में जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने को भी इसी नजरिये से देखा गया।

कांग्रेसे रममानः सः ब्राह्मण चेतना मंचस्यापि गठनम् कृतः स्म, तु अधुना यदा सः कांग्रेसम् त्याजित्वा भाजपायाम् सम्मिलित:, येन ब्राह्मण मतम् लुब्धस्य भाजपायाः कार्यविधिम् रूपे दृश्यते !

कांग्रेस में रहते हुए उन्‍होंने ब्राह्मण चेतना मंच का भी गठन किया था, लेकिन अब जब वह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम चुके हैं, इसे ब्राह्मण वोट को लुभाने की बीजेपी के कवायद के तौर पर देखा जा रहा है !

येन २०१७ तमस्य निर्वाचने तर्हि ब्राह्मणानां पूर्णतया समर्थनम् ळब्धानि, तु अग्रम् चरित्वा खिन्नतायाः असंतोषस्य च् स्थितिम् अपि दर्शनम् ळब्धानि !

जिसे 2017 के चुनाव में तो ब्राह्मणों का भरपूर समर्थन मिला, लेकिन आगे चलकर नाराजगी और असंतोष की स्थिति भी देखने को मिली !

उत्तरप्रदेशे ब्राह्मण मतानि लगभगम् ८-१० प्रतिशतं सन्ति इदृशेषु लगभगम् प्रत्येक दलानि येन स्वेण सह संयुक्तस्य कार्यविध्याम् संलग्नानि ! बहु स्थानम् ब्राह्मणं मतदातानां अभिरुचि प्रत्याशिणां जय पराजय निश्चिते महत्वपूर्ण भूमिकाम् निर्वहन्ति !

यूपी में ब्राह्मण वोट करीब 8-10 फीसदी हैं और ऐसे में तकरीबन हर पार्टी उन्‍हें अपने साथ जोड़ने की कवायद में जुटी हुई है। कई जगह ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान उम्मीदवारों की जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

बसपाया सह बहवः दलानां दृष्टिम् तानि विधानसभा आसनेषु स्थिरा: ! उत्तरप्रदेशे पूर्व त्रय विधानसभाम् प्रवृत्त्या ज्ञातम् भवति तत येन दलम् इति समुदायस्य समर्थनम् ळब्धानि, तत सत्तायामागमने साफल्यं रमितानि !

बसपा सहित तमाम पार्टियों की नजर उन विधानसभा सीटों पर बनी हुई है। उत्‍तर प्रदेश में पिछले तीन विधानसभा के ट्रेंड से पता चलता है कि जिस पार्टी को इस समुदाय का समर्थन मिला है, वह सत्‍ता में आने में सफल रही है।

इतिदा इदम् कार्यविधिम् कति साफल्यं भवति कानि दलम् सत्तायामागमने कृतार्थ भवति, इदम् दर्शक: वार्ता भविष्यति ! तु इति निश्चितमस्ति तत बसपासि भाजपा वा, सपासि कांग्रेस वा कश्चितापि दलानि ब्राह्मण समाजम् लुब्धस्य कार्यविध्याम् पश्च नास्ति !

इस बार यह कवायद कितनी सफल होती है और कौन सी पार्टी सत्‍ता में आने में कामयाब होती है, यह देखने वाली बात होगी ! पर इतना तय है कि बसपा हो या बीजेपी, सपा हो या कांग्रेस कोई भी पार्टी ब्राह्मण समाज को लुभाने की कवायद में पीछे नहीं है !

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