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रूसे जीवितमभवत् ४८५०० वर्षाणि पुरातन जोम्बी विषाणु, विश्वे आगतवान कोरोनायापिवृहत् संकटम्, सदिभिः हिमे सन्निपतं स्म, ग्लोबल वार्मिंगतः निस्सरेत् बहिः ! रूस में जिंदा हुआ 48500 साल पुराना Zombie Virus, दुनिया पर मँडरा रहा कोरोना से भी बड़ा खतरा, सदियों से बर्फ में जमे थे, ग्लोबल वार्मिंग से निकल रहे बाहर !

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अधुना जनाः कोरोना महामारीतः न पारम् याति स्म विश्वे चेकं नव वृहत् च् महामार्या: संकटमागतवान ! मान्यते ततेतिदा संकटम् कोरोना माहमारीतः अपि भयावह भवितुं शक्नोति ! इदृशं येन कारणं, कुत्रचित् फ्रांसस्य वैज्ञानिका: रूसे सन्निपतन् सरस्य अधो ४८५०० वर्षाणि पुरातन जोम्बी विषाणुम् जीवितुं कृतवान !

अभी लोग कोरोना महामारी से उबर भी नहीं सके थे और दुनिया में एक नई और बड़ी महामारी का खतरा मंडराने लगा है ! माना जा रहा है कि इस बार खतरा कोरोना महामारी से भी खतरनाक हो सकता है ! ऐसा इसलिए, क्योंकि फ्रांस के वैज्ञानिकों ने रूस में जमी हुई झील के नीचे दबे 48,500 साल पुराने जॉम्बी वायरस को जिंदा किया है !

वैज्ञानिका: अनुसंधानं कृतवन्तः तत जोम्बी विषाणु बहु अधिकं संक्रामक: अस्ति ! यत् तीव्रताया सह प्रसृतुं शक्नोति ! ब्लूमबर्गस्य एकस्य सूचनापत्रस्य अनुरूपम्, शोधकर्ता: रूसस्य साइबेरिया क्षेत्रे पर्माफ्रास्टतः एकत्रितं प्राचीन प्रारूपानां अनुसंधानम् कृतमस्ति ! सूचनापत्रस्यानुरूपम् वैज्ञानिका: १३ आमोत्पादकानि विषाणुनां विशेषताम् ज्ञापन् तै: जीवितुं कृतवान !

वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जॉम्बी वायरस बहुत अधिक संक्रामक है ! जो तेजी के साथ फैल सकता है ! ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने रूस के साइबेरिया क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट से एकत्रित प्राचीन नमूनों की जाँच की है ! रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने 13 रोगजनक वायरसों की विशेषता बताते हुए उन्हें जिंदा कर दिया !

यै: जोम्बी विषाणु इति नाम प्रदत्तवान ! वैज्ञानिका: लब्धवन्तः तत बहूनि शताब्द्य: एव धराया: अधो हिमे रमस्योपरांतापि विषाणु संक्रामक निर्मितुं रमेत् ! न्यूयार्क पोस्टस्यानुसारम्, बहु प्राचीन अज्ञात विषाणो: जीवितं भूतेन पादपेषु, पशुसु मानवेषु च् भयावहाम: उत्पादितुं शक्नोन्ति !

इन्हें जॉम्बी वायरस नाम दिया गया है ! वैज्ञानिकों ने पाया कि कई शताब्दियों तक जमीन के नीचे बर्फ में दबे रहने के बावजूद भी वायरस संक्रामक बने रहे हैं ! न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, बहुत प्राचीन अज्ञात वायरस के जीवित होने से पौधों, पशुओं और मनुष्यों में घातक रोग उत्पन्न हो सकते हैं !

प्रारंभिकानुसंधानस्यानुसारम्, ग्लोबल वार्मिंग इत्या: कारणं स्थायी रूपेण सन्निपतन् तत क्षेत्रं स्खलयन्ति यत् उत्तरी गोलार्धस्यार्धस्यार्धम् अंशमाच्छादयन्ति ! शोधकर्ता: कथ्यन्ति, १० लक्ष वर्षाणि एव सन्निपत् कार्बनिक पदार्थानां क्षेत्रे पुनर्जीवितं सेलुलर रोगाणुभिः यथा प्रोकैरियोट्स, यूनिसेल्यूलर, यूकेरियोट्स सह-सह विषाणु अपि सम्मिलिता: सन्ति !

शुरुआती शोध के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्थायी रूप से जमे हुए वो इलाके पिघल रहे हैं जो उत्तरी गोलार्ध के एक-चौथाई हिस्से को कवर करती हैं ! शोधकर्ता कहते हैं, 10 लाख सालों तक जमे कार्बनिक पदार्थों के इलाके में पुनर्जीवित सेलुलर रोगाणुओं जैसे प्रोकैरियोट्स, यूनिसेल्यूलर, यूकेरियोट्स के साथ-साथ वायरस भी शामिल हैं !

यत् प्रागैतिहासिक काळतः निष्क्रियं रमन्ति ! वैज्ञानिका: दीर्घकाळतः ग्लोबल वार्मिंग इतं विश्वाय संकटम् ज्ञापयन्ति ! सततं अह्वेयताम् ददाते तत ग्लोबल वार्मिंग इत्या: कारणं सन्निपत् हिमस्खलनेण जलवायु इति परिवर्तितुं भविष्यति, यस्मात् पारिस्थितिकतंत्रमसंतुलितं भविष्यति !

जो प्रागैतिहासिक काल से निष्क्रिय रहे हैं ! वैज्ञानिक लंबे समय से ग्लोबल वॉर्मिंग को दुनिया के लिए खतरा बता रहे हैं ! लगातार चेतावनी दी जा रही है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण जमी हुई बर्फ पिघलने से जलवायु परिवर्तन होगा, जिससे पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ जाएगा !

इयतेव न जलवायु परिवर्तनेण धरायां अधो स्थितं मीथेन इति विघटितं भविष्यति, यस्मात् ग्रीनहाउस प्रभावम् भविष्यति ! सूचनापत्रे अकथयत् तत ग्लोबल वार्मिंगतः इदम् संभावनामस्ति तत प्राचीन प्रमाफ्रॉस्ट (हिमतः आच्छादितं क्षेत्रम्) इति स्खलने बहु अज्ञात विषाणु बहिः आगमिष्यति !

इतना ही नहीं जलवायु परिवर्तन से जमीन में दबी मीथेन विघटित हो जाएगी, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव पड़ेगा ! रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग से यह संभावना है कि प्राचीन परमाफ्रॉस्ट (बर्फ से ढके इलाके) पिघलने पर कई अज्ञात वायरस बाहर आ जाएँगे !

यस्य विश्वे बहु असाधु प्रभावम् भवितुं शक्नोति ! अनुसंधानमधुना प्रारंभिक चरणे अस्ति ! यस्यानंतरं वैज्ञानिका: ऊष्मा, उष्णता, ऑक्सीजन अन्य च् बाह्य पर्यावरणीय स्थित्या: संपर्के आगते एतेषां अज्ञात विषाणुनां संक्रामकतायाः स्तरस्य आकळनम् करिष्यन्ति !

जिसका दुनिया पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है ! जाँच अभी शुरुआती दौर में है ! इसके बाद वैज्ञानिक प्रकाश, गर्मी, ऑक्सीजन और अन्य बाहरी पर्यावरणीय माहौल के संपर्क में आने पर इन अज्ञात विषाणुओं की संक्रामकता के स्तर का आकलन करेंगे !

सूचनापत्रस्यानुरूपम्, सर्वात् पुरातन विषाणु येन पैंडोरावायरस येडोमा इति कथ्यते, यस्योम्र ४८५०० वर्षाणितः अधिकं ज्ञाप्यते ! इति विषाणु अस्यैव दलेण २०१३ तमे अन्वेषन् तं विषाणो: अपि रिकार्ड त्रोटितवान यस्योम्र ३०००० वर्षाणितः अधिकं ज्ञाप्येत् स्म !

रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पुराना वायरस जिसे पैंडोरावायरस येडोमा कहा जाता है, इसकी उम्र 48,500 साल से ज्यादा बताई जा रही है ! इस वायरस ने इसी टीम द्वारा 2013 में खोजे गए उस वायरस का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया जिसकी उम्र 30,000 साल से ज्यादा बताई गई थी !

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