काखिलेश यादवाय शिवपाल सिंह यादव: केवलं राजनैतिक आवश्यकतामासीत् ! क्या अखिलेश यादव के लिए शिवपाल सिंह यादव सिर्फ सियासी जरूरत थे !

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राजनित्यां राजनीतिक व्यक्तित्वेभ्यः संभावना सदैव स्थितं रमति ! राजनीतिक मुखानि स्वसर्वाणि निर्णयेषु कालस्य याचित्वा स्वमवसरवादिन् भवेन रक्षणस्य प्रयत्नमपि कुर्वन्ति !

सियासत में राजनीतिक शख्सियतों के लिए संभावना हमेशा बरकरार रहती है ! राजनीतिक चेहरे अपने सभी फैसलों पर समय की मांगकर खुद को अवसरवादी होने से बचाने की कोशिश भी करते हैं !

वस्तुतः इमानि वार्ता: अतएव भवन्ति कुत्रचित प्रगति शील समाजवादी दलस्याध्यक्ष: शिवपाल सिंह यादव: बुधवासरम् सीएम योगी आदित्यनाथेण लगभगम् २० पलम् मेलनम् कृतरासीत् !

दरअसल यह बातें इसलिए हो रही हैं क्योंकि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने बुधवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से करीब 20 मिनट मुलाकात की थी !

सम्प्रति प्रश्नमिदमस्ति तत यदा शिवपाल सिंह यादव: स्वयं कथित: तत मेलनम् शिष्टाचारेण संलग्नं अस्ति तर्हि राजनैतिककारणं अन्वेषणस्यावश्यकतां कास्ति, तु वार्ता केवलं इयतैव नास्ति, का शिवपाल यादवम् परिलक्ष्यति तत तस्य केवलं राजनैतिक रूपे प्रयोगमभवत् !

अब सवाल यह है कि जब शिवपाल सिंह यादव खुद कह चुके हैं कि मुलाकात शिष्टाचार से जुड़ी थी तो सियासी मायने को ढूंढने की जरूरत क्या है, लेकिन बात सिर्फ इतनी सी नहीं है, क्या शिवपाल यादव को लगता है कि उनका सिर्फ सियासी तौर पर इस्तेमाल हुआ !

समाजवादी दलस्य चिह्ने शिवपाल यादव: रणित: स्म निर्वाचनम् शिवपाल यादव: तादृशं तर्हि स्वदळम् चालयति, तु २०२२ तमस्य निर्वाचनम् सः समाजवादी दलस्य चिह्ने रणित: ! तकनीक्यां रूपे सः समाजवादी दलस्य अंशम् सन्ति !

एसपी के सिंबल पर शिवपाल यादव लड़े थे चुनाव, शिवपाल यादव वैसे तो अपनी पार्टी चलाते हैं, लेकिन 2022 का चुनाव वो समाजवादी पार्टी के सिंबल पर लड़े ! तकनीकी तौर पर वो समाजवादी पार्टी के हिस्सा हैं !

प्रकरण तदारंभितं यदा समाजवादी दल विधायक दलस्य गोष्ठिमभवत् तस्मिन् च् शिवपाल यादवं न आहूतं तस्यच् पीड़ामपि प्रदर्शितं ! विद्वाना: कथ्यन्ति तत राजनित्या: अनुसारम् जनाः स्वम् वृद्ध: कदापि न मांयन्ति !

मसला तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी विधायक दल की बैठक हुई और उसमें शिवपाल यादव को बुलाया नहीं गया और उनका दर्द भी झलका ! जानकार कहते हैं कि सियासत के मानिंद लोग खुद को बूढ़ा कभी नहीं मानते हैं !

तु शिवपाल यादवम् येन प्रकारेण २०२२ तमस्य निर्वाचनेण पूर्वाखिलेश यादव: स्वदले आनीत: तस्य अग्रस्य राजनितिं संभवतः न अवगम्यितः तेन चिदम् वार्ता तदावगम्यितः यदा तकनीकी कारणं दत्तन् समाजवादी दळम् कथितं तत शिवपाल यादव: तर्हि घटकदलेण सन्ति !

लेकिन शिवपाल यादव को जिस तरह से 2022 के चुनाव से पहले अखिलेश यादव अपने पाले में लाए उसके आगे की राजनीति को शायद नहीं समझ सके और उन्हें यह बात तब समझ में आई जब तकनीकी हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी ने कह दिया कि शिवपाल यादव तो घटक दल से हैं !

गठबंधनदलानां गोष्ठिभिः पृथकदिनांकं निर्धारितं स्म ! शिवपाल सिंह यादवस्य अखिलेश यादवस्य च् संबंधे अवगम्यितुं २०१७ तमस्य वर्षे दृष्टिकर्तुं भविष्यति ! यूपी निर्वाचनी परिवर्तने गतं स्म समाजवादी दलस्याभ्यांतरम् सत्ता संघर्षमपि उत्कर्षे आसीत् !

गठबंधन दलों की बैठक के लिए अलग तारीख मुकर्रर की गई थी ! शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव के संबंधों को समझने के लिए 2017 के साल पर गौर करना होगा ! यूपी चुनावी मोड में जा चुका था और समाजवाजी पार्टी के अंदर सत्ता संघर्ष भी चरम पर था !

दले अधिपत्याय मुलायम सिंह यादवस्य भ्रातरे पुत्रे च् रणम् भवितौ आस्ताम् ! दलाय राजनैतिक रणे पितृव्य: अर्थतः शिवपाल सिंह यादवं पराजितुं अभवत् अखिलेश यादव दलस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष: अभवत् !

पार्टी पर दावेदारी के लिए मुलायम सिंह यादव के भाई और बेटे में जंग छिड़ी थी ! पार्टी के लिए सियासी जंग में चाचा यानी शिवपाल सिंह यादव को परास्त होना पड़ा और अखिलेश यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए !

दले अखिलेश यादव: अधिपत्ये साफल्यं अवश्यमेव ळब्ध: तु सता तेन हस्तेन निःसृत: ! सत्तागमनस्य अनंतरम् अखिलेशे शिवपाल सिंह यादवे च् जिह्वायी रणम् तीव्रमभवत् तस्य च् प्रभावमिदमभवत् !

पार्टी पर अखिलेश यादव कब्जा जमा पाने में कामयाबी जरूर मिली लेकिन सत्ता उनके हाथ से फिसल गई ! सत्ता जाने के बाद अखिलेश और शिवपाल सिंह यादव में जुबानी जंग तेज हुई और उसका असर यह हुआ !

२०१९ तमस्य साधारणनिर्वाचनेण पूर्वम् शिवपाल सिंह यादव: पृथकदलेण सह निर्वाचनीक्षेत्रे अवतरित: तस्य च् प्रभावमिदमभवत् तेन तर्हि लाभं न ळब्ध: तु समाजवादी दळम् बहुक्षतिमभवत् ! समाजवादी दळम् स्वपारंपरिकासनम् फिरोजाबादम् रक्षितुं न शक्नुतं !

2019 के आम चुनाव से पहले शिवपाल सिंह यादव अलग दल के साथ चुनावी मैदान में उतरे और उसका असर यह हुआ कि उन्हें तो फायदा नहीं मिला लेकिन समाजवादी पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ ! समाजवादी पार्टी अपनी पारंपरिक सीट फिरोजाबाद को नहीं बचा सकी !

२०१७, २०१९ तमस्य च् परिणामानां अनंतरम् समाजवादी दलस्य समर्थका: कुत्रैव न कुत्रैवेच्छन्ति स्म तत पितृव्यस्य भातृजस्य च् मेलनमभवताम् ! लगभगम् त्र्याः वर्षस्य प्रयत्नस्यानंतरम् परस्परेण सहागतौ !

2017 और 2019 के नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी के समर्थक कहीं न कहीं चाहते थे कि चाचा और भतीजे का मिलन हो जाए ! करीब तीन साल की कोशिश के बाद दोनों एक दूसरे के साथ आए !

विद्वानानां कथनमस्ति तत स्पष्टताया वार्तासीत् तत शिवपाल यादव: स्वयं स्वदळमग्रम् बर्धने असाफल्यं इव रमित: तु समाजवादी दळम् लाभम् ळब्धितं !

जानकारों का कहना है कि जाहिर सी बात थी कि शिवपाल यादव खुद अपनी पार्टी को आगे बढ़ा पाने में नाकाम ही रहते लेकिन समाजवादी पार्टी को फायदा मिलता !

अखिलेश यादवमनुभूत: तत २०२२ तमस्य निर्वाचनं करोतु निधनतु वास्ति दृष्टिगत रणनीतिक रूपे कश्चित प्रकारस्य प्रमाद: न भवनीयः बहु कटु अनुभवानां चनंतरम् सः शिवपाल सिंह यादवम् स्वदले आनीत: !

अखिलेश यादव को लगा कि 2022 का चुनाव करो या मरो का है लिहाजा रणनीतिक तौर पर किसी तरह की भूल नहीं होनी चाहिए और तमाम कटू अनुभवों के बाद वो शिवपाल सिंह यादव को अपने खेमे में लाए !

२०२२ तमस्य परिणामेषु सपा विजयी आंकड़ाया द्रुतं रमितं तु २०१७ तमस्य निर्वाचने यादवलैंड अर्थतः मैनपुर्याम्, एटायाम्, इटावायां, फिरोजाबादे वृहत् क्षत्या स्वरक्षितं अर्थतः समाजवादी दळम् लाभमभवत्, तु वार्ता यदा समाजवादी दळम् विधायक दलस्य गोष्ठ्यां शिवपाल सिंह यादवस्य सम्मिलितस्यागतं तर्हि सः द्रुतं गत: !

2022 के नतीजों में सपा जादुई आंकड़ों से दूर रही लेकिन 2017 के चुनाव में यादवलैंड यानी मैनपुरी, एटा,इटावा, फिरोजाबाद में बड़े नुकसान से बच गई यानी कि समाजवादी पार्टी को फायदा हुआ, लेकिन बात जब समाजवादी पार्टी विधायक दल की बैठक में शिवपाल सिंह यादव के शामिल होने की आई तो वो किनारा कस लिए !

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